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आखिरकार मान गए युवा
lalitpur
Updated Sun, 27 Nov 2016 12:01 AM IST
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- फोटो : demo pic
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ललितपुर। मांगें माने जाने का आश्वासन मिलने पर बजाज पावर प्लांट का घेराव कर रही बुंदेलखंड किसान एवं मजदूर कल्याण समिति ने शनिवार देर शाम अपना आंदोलन खत्म कर दिया।
समिति के मोहर सिंह ने शुक्रवार को चार सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया था। शुक्रवार को धरना खत्म कराने को लेकर काफी मशक्कत हुई, लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने। शनिवार देर शाम एसडीएम महरौनी हरिश्चंद्र यादव व पावर प्लांट के जीए राजीव श्रीवास्तव द्वारा आंदोलनकारियों के साथ द्वारा वार्त्ता की गई। वार्त्ता के बाद धरने को खत्म करने का एलान कर दिया गया।
धरने का नेतृत्व कर रहे मोहर सिंह यादव ने बताया कि उनसे मांगों को पूरा करने के लिए समय मांगा गया था। उनके द्वारा प्रशासन व प्लांट प्रबंधन को दस दिन का समय दिया गया है। नौ दिसंबर तक मांगें नहीं माने जाने पर दोबारा आंदोलन किया जाएगा। वहीं प्लांट के जीएम राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि आंदोलन कर रहे लोगों की चार मांगों में से तीन मांगों को सरकार द्वारा पूरा किया जा सकता है जिनको प्रशासन द्वारा सरकार को भेज दिया जाएगा।
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वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग के संबंध में बताया गया कि प्लांट की ओर से अकुशल श्रमिक के तौर पर उन गांवों के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया है। वर्तमान में प्लांट में कार्यरत एक हजार अकुशल मजदूरों में से साढ़े छह सौ मजदूर स्थानीय हैं। आगे भी इसी तरह से स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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समिति के मोहर सिंह ने शुक्रवार को चार सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया था। शुक्रवार को धरना खत्म कराने को लेकर काफी मशक्कत हुई, लेकिन आंदोलनकारी नहीं माने। शनिवार देर शाम एसडीएम महरौनी हरिश्चंद्र यादव व पावर प्लांट के जीए राजीव श्रीवास्तव द्वारा आंदोलनकारियों के साथ द्वारा वार्त्ता की गई। वार्त्ता के बाद धरने को खत्म करने का एलान कर दिया गया।
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धरने का नेतृत्व कर रहे मोहर सिंह यादव ने बताया कि उनसे मांगों को पूरा करने के लिए समय मांगा गया था। उनके द्वारा प्रशासन व प्लांट प्रबंधन को दस दिन का समय दिया गया है। नौ दिसंबर तक मांगें नहीं माने जाने पर दोबारा आंदोलन किया जाएगा। वहीं प्लांट के जीएम राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि आंदोलन कर रहे लोगों की चार मांगों में से तीन मांगों को सरकार द्वारा पूरा किया जा सकता है जिनको प्रशासन द्वारा सरकार को भेज दिया जाएगा।
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वहीं स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग के संबंध में बताया गया कि प्लांट की ओर से अकुशल श्रमिक के तौर पर उन गांवों के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनकी जमीन का अधिग्रहण किया गया है। वर्तमान में प्लांट में कार्यरत एक हजार अकुशल मजदूरों में से साढ़े छह सौ मजदूर स्थानीय हैं। आगे भी इसी तरह से स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।