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अब जमानत कराना नहीं होगा आसान

Sun, 01 Nov 2015 12:22 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Sun, 01 Nov 2015 12:22 AM IST
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ललितपुर। जेल में बंद अपराधियों को जमानत मिलना आसान नहीं होगा। सभी आरोपियों का आपराधिक रिकार्ड अब केंद्रीय जमानत रजिस्टर पर दर्ज होगा। इसी रजिस्टर में गैर जमानती अपराधों की स्वीकृत अथवा अस्वीकृत जमानत का रिकॉर्ड रखा जाएगा, जिससे हार्ड क्रिमिनल आसानी से जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।
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बहुत से मामलों में गैर जमानती धाराओं में बंद आरोपी के आपराधिक रिकार्ड और केस हिस्ट्री उपलब्ध नहीं होने के कारण अभियोजक जमानत का प्रभावी तरीके से न्यायालय में विरोध नहीं कर पाते हैं और अपराधी आसानी से अदालत से जमानत पा लेते हैं। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रवींद्र  कुमार गुप्ता ने सभी न्यायालयों के पेशकारों को केंद्रीय जमानत रजिस्टर तैयार करने को कहा है। इस रजिस्टर में गैर जमानती अपराधों की स्वीकृत अथवा अस्वीकृत जमानत का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
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इस रजिस्टर का मकसद उन अपराधियों की जमानत का रिकॉर्ड पुलिस विभाग को उपलब्ध कराना है, जिसमें पुलिस को जानकारी रहे कि संबंधित अपराधी को किन धाराओं में जमानत दी जा रही है। साथ ही आरोपी किस आधार पर  जमानत लेने के लिए कोर्ट में आवेदन कर रहे हैं, इसकी जानकारी विवेचक के पास है अथवा नहीं।
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 इसके अलावा संबंधित अभियोजन को भी कई बार अपराधी के पुराने रिकॉर्ड की स्थिति मालूम नहीं होती है, जिससे जमानत का विरोध करने में अभियोजक सफल नहीं हो पाते हैं। कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें शातिर अपराधी आराम से जमानत पा लेता है।

पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र में ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रवींद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि वे अपने अधीनस्थों को निर्देशित करें कि अभियोजक के मांगने पर संबंधित विवेचक आरोपी की केस हिस्ट्री के साथ पुराना आपराधिक रिकार्ड भी उपलब्ध कराएं, जिससे अभियोजक गैर जमानती धाराओं में निरुद्ध अपराधियों की जमानत का विरोध कर सकें और हार्डकोर क्रिमिनल जेल से बाहर न आ सकें।

नहीं कर पाएंगे गुमराह
 कई मामलों में अपराधी अदालत को गुमराह कर जमानत पाने में सफल हो जाते हैं। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा। ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रवींद्र कुमार गुप्त ने बताया कि कुछ मामलों में ऐसा होता है कि पहले मामला जान से मारने के प्रयास की धाराओं में दर्ज होता है, लेकिन कुछ दिनों बाद घायल की मौत होने के कारण अन्य धाराओं को बदल दिया जाता है, जबकि आरोपी पहली वाली धाराओं में ही जमानत पा लेता है और नई धाराओं में मामला तरमीम होने के बाद भी उसकी जमानत का विधि अभियोजक नहीं कर पाता है।


 इसी महीने महरौनी में एक मामला सामने आ चुका है, जिसमें दो आरोपियों की केस हिस्ट्री मिल जाने पर उनकी जमानत का विरोध किया जा सका। पिछले दिनों महरौनी पुलिस ने दो बोलेरो चोर पकड़े थे। दोनों आरोपियों ने चोरी के मामले में जमानत की अर्जी दी, जिसमें उन्हें जमानत मिलना संभावित था। लेकिन, अभियोजक को समय से आरोपियों की संपूर्ण जानकारी मिली कि दोनों आरोपियों पर आधा सैकड़ा से अधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह आदतन अपराधी है। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने दोनों की जमानत खारिज कर दी।
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