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श्रमण की साधना ही समता है- आर्यिका विज्ञानमति
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मड़ावरा। आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका रत्न 105 विज्ञानमति और अंतरमति माता जी ससंघ 13 आर्यिकाओं का वर्णीनगर मड़ावरा में आगमन हुआ। आर्यिका संघ टीकमगढ़ स्थित दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र पपौरा से पद विहार करते हुए टीकमगढ़, महरौनी, सैदपुर, साढूमल आदि स्थानों पर रुकते हुए मड़ावरा नगर में चातुर्मास के लिए पहुंचा।
आर्यिका संघ ने नगर के 11 जिनालयों के दर्शन किए, इसके पश्चात आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश श्री महावीर विद्याविहार के परिसर हुआ। धर्मसभा के पूर्व आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण स्वस्ति महिला मंडल की सदस्याओं और दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न 105 विज्ञानमति माता ने कहा कि श्रमण की साधना ही समता है। ऐसे ही समता के धारी इस युग के आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज हैं, जिनकी प्रेरणा से रविवार मड़ावरा नगर में आने का सौभाग्य आर्यिकाओं को मिला है। यहां पर स्थित जिनबिंबों को देखकर ऐसा लगता है कि मड़ावरा प्राचीनकाल से ही धर्मनगरी रही है। आर्यिका रत्न अंतरमति माता ने कहा कि संगठित होकर रहो। संगठन में ही शक्ति होती है। हमें देव, शास्त्र, गुरु की वाणी को सुनकर धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और धर्म प्रभावना में आगे रहना चाहिए। इस दौरान सकल दिगंबर जैन समाज मड़ावरा के अलावा क्षेत्रीय जैन समाज के श्रावकगण मौजूद रहे।
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आर्यिका संघ ने नगर के 11 जिनालयों के दर्शन किए, इसके पश्चात आर्यिका संघ का मंगल प्रवेश श्री महावीर विद्याविहार के परिसर हुआ। धर्मसभा के पूर्व आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण स्वस्ति महिला मंडल की सदस्याओं और दीप प्रज्ज्वलन और मंगलाचरण किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न 105 विज्ञानमति माता ने कहा कि श्रमण की साधना ही समता है। ऐसे ही समता के धारी इस युग के आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज हैं, जिनकी प्रेरणा से रविवार मड़ावरा नगर में आने का सौभाग्य आर्यिकाओं को मिला है। यहां पर स्थित जिनबिंबों को देखकर ऐसा लगता है कि मड़ावरा प्राचीनकाल से ही धर्मनगरी रही है। आर्यिका रत्न अंतरमति माता ने कहा कि संगठित होकर रहो। संगठन में ही शक्ति होती है। हमें देव, शास्त्र, गुरु की वाणी को सुनकर धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और धर्म प्रभावना में आगे रहना चाहिए। इस दौरान सकल दिगंबर जैन समाज मड़ावरा के अलावा क्षेत्रीय जैन समाज के श्रावकगण मौजूद रहे।
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