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भाजपा के गढ़ को भेदने में विपक्ष हुआ नाकाम

Sun, 11 Jul 2021 01:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Jul 2021 01:21 AM IST
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apposition could not win in bjp stronghold
भाजपा के गढ़ को भेदने में विपक्ष हुआ नाकाम
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राजीव शुक्ला
ललितपुर। पंचायत चुनाव में भाजपा के गढ़ को भेदने में विपक्ष पूरी तरह नाकाम हो गया। सपा के दावे हवाई हो गए तो बसपा ने चुनाव से ही किनारा कर लिया। कांग्रेस की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। यही वजह रही कि जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर सभी छह ब्लॉकों में भाजपा का परचम फहरा रहा है।
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को सभी राजनीतिक दलों ने प्री विधानसभा चुनाव की तर्ज पर अपने प्रत्याशियों को लड़ाया था। चुनाव के परिणामों ने भाजपा को करारा झटका दिया। जिला पंचायत सदस्य के लिए 21 सदस्यों के सापेक्ष छह सदस्य ही विजयी हुए तो पार्टी तगड़ा झटका लगा। कारण साफ था कि छह सीटें जीतकर सपा भी भाजपा के बराबर में खड़ी थी, सारा दारोमदार जीतकर आए छह निर्दलीय सदस्यों के हाथों में था। वहीं बसपा के तीन सदस्य किस ओर खड़े होंगे यह भी साफ नहीं था, जबकि कांग्रेस हाशिये पर खड़ी नजर आई।
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ऐसे में सपा और भाजपा ने अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की, दोनों के प्रत्याशी भी घोषित हो गए लेकिन व्यूह रचना में भाजपा आगे निकल गई और सपा को शिकस्त देते हुए जिला पंचायत का निर्विरोध अध्यक्ष बनवा लिया। इस कामयाबी के बाद भाजपा के रणनीतिकारों ने ब्लॉक प्रमुख का चुनाव घोषित होते ही शतरंज की तरह अपनी गोटे बिछाकर पहले दिन ही पांच ब्लॉकों में निर्विरोध अध्यक्ष चुनवा लिए। चर्चा ऐसी है कि तालबेहट में रणनीति फेल हुई तो सत्ता की हनक काम आ गई। शनिवार को हुए मतदान में यहां भी भाजपा प्रत्याशी विजय सिंह ने एक मत से जीत दर्ज करा दी है, अब यह ब्लॉक भी पार्टी के खाते में चला गया।
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फिलहाल जिला पंचायत और ब्लॉकों पर भाजपा का परचम आगामी साल में होने वाले विधान सभा चुनाव में पार्टी की राह आसान जरूर करेगा। वहीं, जिले की दो विधानसभा सीटें व एक संसदीय सीट भाजपा के खाते में पहले से ही है। देखना यह होगा कि 2022 के चुनाव में भाजपा की यह व्यूह रचना कितना सफल हो सकेगी।
दोनों विधायक व पार्टी के वरिष्ठ नेता साथ-साथ नजर आए
पंचायत चुनाव में सत्ता और संगठन एक जुट होकर मैदान में डटे रहे। शहर विधायक रामरतन कुशवाह और महरौनी विधायक व राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ पूरे चुनाव में संगठन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते नजर आए। शनिवार को तालबेहट में हुए मतदान में भी दोनों विधायकों के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता साथ साथ नजर आए।

सपा की गुटबंदी अपने छह सदस्यों को भी नहीं जोड़ पाई
जिला पंचायत में सपा के छह सदस्य जीतने के बाद उम्मीद थी कि अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहेगा लेकिन पार्टी की गुटबंदी जीत कर आए अपने छह सदस्यों को भी एक पाले में खड़ा नहीं कर सकी। यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रयास करते तो जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए भाजपा की राह में कठिनाई खड़ी कर सकती थी।
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