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किसानों की फसल चट रहे अन्ना जानवर

Mon, 10 Aug 2020 11:42 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2020 11:42 PM IST
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Animal destroyed farmer crop
ड़ोगरा खुर्द में सड़क पर खड़े अन्ना पशु - फोटो : LALITPUR
डोगराखुर्द (ललितपुर)। इन दिनों किसानों को दोहरी समस्या से जूझना पड़ रहा है। एक तो कम बारिश में किसान पहले से परेशान हैं। वहीं, अन्ना जानवर भी खेतों में खड़ी फसलों को चट कर रहे हैं। इसे देख अन्ना जानवरों को अमझरा की गोशाला में पहुंचाया जा रहा है। इस कार्य में ग्राम प्रधान व लेखपाल सहयोग कर रहे हैं।
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जिले के ग्रामीण क्षेत्र में अन्ना जानवर किसानों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। वे मौका पाकर खेतों में खड़ी फसलों को चौपट कर रहे हैं। नील गाय, जंगली जानवर भी इस समस्या को गंभीर बना रहे हैं। कई गांव के लोग जंगल के किनारे बसे गांवों में अन्ना पशुओं को छोड़कर चले जाते हैं। इससे ग्राम डोगरा खुर्द, पटना पारोल, दिगवार, गुरयाना, देवरी, चांदोरा, गुढा खिरिया, नाराहट क्षेत्र के किसानों को खेती करना मुश्किल हो गया है। किसान खेतों में खड़ी फसल की रखवाली करे या मजदूरी कर
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परिवार का भरण-पोषण करें। लंबे समय से किसान इस तरह नुकसान झेलते चले आ रहे हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी किसानों को अन्ना पशुओं की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। पिछले सालों से किसान दैवीय आपदाओं से परेशान चले आ रहे हैं। अब कम बारिश में फसलें रोग ग्रस्त होने लगती हैं। इस तरह किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
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आवारा गोवंश झुंड बनाकर खेतों में खड़ी फसलों को उजाड़ते हैं। इस कारण रात दिन खेतों के पास रहकर फसलों की रखवाली करनी पड़ती है। जो किसान खेत में रखवाली नहीं करने जाता है, उनकी अगले दिन फसलें उजड़ी मिलती है। - सुरेश
आसपास के गांवों के किसान छुट्टा जानवरों को जंगल के किनारे बसे गांव में छोड़ जाते हैं। इसके बाद अन्ना जानवर जंगल में जाने की जगह झुंड बनाकर सड़क पर घूमते रहते हैं, जिससे यातायात भी बाधित होता है। - हरीराम दुबे
अन्ना जानवरों के साथ नीलगाय भी किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। जिससे किसानों के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। उन्हें फसलों की रखवाली करना मुश्किल हो रहा है। इससे किसानों को समस्या हो रही है। - मोतीलाल

ग्राम प्रधान व लेखपाल के माध्यम से अमझरा गोशाला में अन्ना जानवर एकत्रित किए जा रहे हैं। - अभिषेक कुमार सिंह, तहसीलदार, पाली
वर्ष 2016 के बाद नीलगाय को मारने के लाइसेंस मिलने बंद कर दिए गए हैं। इसके अलावा वन विभाग के पास उन्हें पकड़ने के कोई संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं। - आर के शाही, वन क्षेत्राधिकारी, गौना
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