{"_id":"6a42d72a9c7968bcc70a649b","slug":"anganwadi-centers-locks-hanging-at-some-no-children-present-at-others-lalitpur-news-c-131-1-ltp1017-158820-2026-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंगनबाड़ी केंद्र : कहीं लटके ताले, कहीं बच्चों की नहीं रही मौजूदगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंगनबाड़ी केंद्र : कहीं लटके ताले, कहीं बच्चों की नहीं रही मौजूदगी
विज्ञापन
महरौनी ब्लॉक के अधिकांश केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे बच्चे, कई स्थानों पर तौल मशीनें भी खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। गर्भवती महिलाओं और छह वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने, प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 1975 में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई थी। कभी इन केंद्रों का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता था, लेकिन अब कई केंद्र अपने मूल उद्देश्यों से भटकते नजर आ रहे हैं।
स्थिति यह है कि अधिकांश केंद्रों पर बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए थे, वे धरातल पर पूरे होते नहीं दिख रहे। सोमवार को विकासखंड महरौनी के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया गया तो कहीं केंद्रों पर ताले लटके मिले तो कहीं केंद्र पूरी तरह खाली पड़े दिखाई दिए। कई स्थानों पर तौल मशीनें भी खराब मिलीं। प्रस्तुत है जमीनी हकीकत...
दृश्य-एक
समय : सुबह 10:10 बजे | स्थान : कुआंघोषी
ग्राम पंचायत कुआंघोषी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र खुला मिला, लेकिन वहां एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि केंद्र पर 65 बच्चे, पांच गर्भवती एवं छह धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
दृश्य-दो
समय : सुबह 10:40 बजे | स्थान : खिरिया लटकंजू
ग्राम पंचायत खिरिया लटकंजू के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1 पर ताला लटका मिला। वहीं केंद्र क्रमांक-2 पर केवल 10 बच्चे मौजूद थे। यहां तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के 39 तथा शून्य से तीन वर्ष आयु वर्ग के 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इसके अलावा छह गर्भवती और सात धात्री महिलाएं भी पंजीकृत हैं। केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका मौजूद थीं, लेकिन तौल मशीन खराब पड़ी मिली।
दृश्य-तीन
समय : सुबह 11 बजे | स्थान : छायन
ग्राम पंचायत छायन स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद थीं, जबकि सहायिका की ड्यूटी पोलियो अभियान में लगी थी। यहां भी तौल मशीन खराब मिली।
दृश्य-चार
समय : सुबह 11:30 बजे | स्थान : दरौना
ग्राम दरौना स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1 जर्जर अवस्था में मिला। यहां शून्य से छह वर्ष तक के कुल 97 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान एक भी बच्चा केंद्र पर मौजूद नहीं मिला। यहां बच्चों के लिए भोजन भी नहीं बन रहा था।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आंगनबाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएं
छह वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण
गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल एवं टीकाकरण
बच्चों को अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराना
गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को अनुपूरक पोषण देना
महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा प्रदान करना
नवजात एवं छह वर्ष तक के बच्चों की देखभाल
गंभीर रूप से कुपोषित अथवा बीमार बच्चों को स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर करना
बच्चों को विद्यालय पूर्व अनौपचारिक शिक्षा उपलब्ध कराना
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
पुष्टाहार योजना में हुआ बदलाव
पहले आंगनबाड़ी केंद्रों पर केवल दो प्रकार का पुष्टाहार वितरित किया जाता था, लेकिन अब विभिन्न श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए अलग-अलग प्रकार के पोषण आहार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को आटा, बेसन एवं मीठा हलवा
तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आटा, बेसन, बर्फी, दलिया, मूंग तथा नमकीन सोया खिचड़ी
गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आटा, बेसन, सोया बर्फी, मीठा दलिया, मूंग दाल एवं नमकीन खिचड़ी
अतिकुपोषित बच्चों को ऊर्जा युक्त विशेष आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसका उद्देश्य बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को गति देना तथा महिलाओं में एनीमिया एवं कुपोषण जैसी समस्याओं को कम करना है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। इसकी जानकारी कर बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाएगी। यदि कोई आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सविता पुरोहित, प्रभारी सीडीपीओ, ललितपुर
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। गर्भवती महिलाओं और छह वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने, प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराने तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 1975 में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई थी। कभी इन केंद्रों का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता था, लेकिन अब कई केंद्र अपने मूल उद्देश्यों से भटकते नजर आ रहे हैं।
स्थिति यह है कि अधिकांश केंद्रों पर बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। जिन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आंगनबाड़ी केंद्र खोले गए थे, वे धरातल पर पूरे होते नहीं दिख रहे। सोमवार को विकासखंड महरौनी के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया गया तो कहीं केंद्रों पर ताले लटके मिले तो कहीं केंद्र पूरी तरह खाली पड़े दिखाई दिए। कई स्थानों पर तौल मशीनें भी खराब मिलीं। प्रस्तुत है जमीनी हकीकत...
विज्ञापन
दृश्य-एक
समय : सुबह 10:10 बजे | स्थान : कुआंघोषी
ग्राम पंचायत कुआंघोषी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र खुला मिला, लेकिन वहां एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बताया कि केंद्र पर 65 बच्चे, पांच गर्भवती एवं छह धात्री महिलाएं पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
दृश्य-दो
समय : सुबह 10:40 बजे | स्थान : खिरिया लटकंजू
ग्राम पंचायत खिरिया लटकंजू के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1 पर ताला लटका मिला। वहीं केंद्र क्रमांक-2 पर केवल 10 बच्चे मौजूद थे। यहां तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के 39 तथा शून्य से तीन वर्ष आयु वर्ग के 30 बच्चे पंजीकृत हैं। इसके अलावा छह गर्भवती और सात धात्री महिलाएं भी पंजीकृत हैं। केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका मौजूद थीं, लेकिन तौल मशीन खराब पड़ी मिली।
दृश्य-तीन
समय : सुबह 11 बजे | स्थान : छायन
ग्राम पंचायत छायन स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर एक भी बच्चा मौजूद नहीं था। केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद थीं, जबकि सहायिका की ड्यूटी पोलियो अभियान में लगी थी। यहां भी तौल मशीन खराब मिली।
दृश्य-चार
समय : सुबह 11:30 बजे | स्थान : दरौना
ग्राम दरौना स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1 जर्जर अवस्था में मिला। यहां शून्य से छह वर्ष तक के कुल 97 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान एक भी बच्चा केंद्र पर मौजूद नहीं मिला। यहां बच्चों के लिए भोजन भी नहीं बन रहा था।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाएं
छह वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण
गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल एवं टीकाकरण
बच्चों को अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराना
गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को अनुपूरक पोषण देना
महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा प्रदान करना
नवजात एवं छह वर्ष तक के बच्चों की देखभाल
गंभीर रूप से कुपोषित अथवा बीमार बच्चों को स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर करना
बच्चों को विद्यालय पूर्व अनौपचारिक शिक्षा उपलब्ध कराना
पुष्टाहार योजना में हुआ बदलाव
पहले आंगनबाड़ी केंद्रों पर केवल दो प्रकार का पुष्टाहार वितरित किया जाता था, लेकिन अब विभिन्न श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए अलग-अलग प्रकार के पोषण आहार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को आटा, बेसन एवं मीठा हलवा
तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आटा, बेसन, बर्फी, दलिया, मूंग तथा नमकीन सोया खिचड़ी
गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को आटा, बेसन, सोया बर्फी, मीठा दलिया, मूंग दाल एवं नमकीन खिचड़ी
अतिकुपोषित बच्चों को ऊर्जा युक्त विशेष आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसका उद्देश्य बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास को गति देना तथा महिलाओं में एनीमिया एवं कुपोषण जैसी समस्याओं को कम करना है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। इसकी जानकारी कर बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाएगी। यदि कोई आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सविता पुरोहित, प्रभारी सीडीपीओ, ललितपुर