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खंडहर में गुम होता जा रहा दूधई के प्राचीन मंदिरों का वैभव

Sun, 14 Jul 2019 08:06 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jul 2019 08:06 PM IST
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ancient dudhai temples in worse condition
ग्राम दूधई मे स्थित सूर्य मंदिर - फोटो : LALITPUR
खंडहर में गुम होता जा रहा दूधई के प्राचीन मंदिरों का वैभव
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डोंगराखुर्द (ललितपुर)। पाली क्षेत्र के ग्राम दूधई में विंध्याचल पर्वत पर स्थित प्राचीन मंदिर रखरखाव के अभाव में खंडहर होते जा रहे हैं। बरसात के मौसम में यहां पर जाने के लिए रास्ते बंद हो जाते हैं। जनपद प्राचीन संपदाओं से भरा पड़ा है। पर्यटकों को लुभाने के लिए अनेक पर्यटन स्थल हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह बदहाली का शिकार होते जा रहे हैं। पाली तहसील के कनपुरा घाटी से पांच किलोमीटर दूर ग्राम दूधई विंध्याचल पर्वत श्रंखला पर स्थित है। यहां के प्राचीन शिव मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी के किनारे कच्चे कंकरीले-पथरीले रास्ते से होकर जाना पड़ता है। पूरब दिशा में आकर्षक नक्काशी युक्त पत्थरों से बना सूर्य मंदिर, पश्चिम दिशा में शिव मंदिर, उत्तर दिशा में चबूतरे में पर रखी भगवान बारह की प्रतिमा और पश्चिम दिशा में अनेक खंडहर मंदिर हैं।
दक्षिण दिशा में सैकड़ों की संख्या में खंडहर प्रतिमाएं बिखरी पड़ी हैं। सूर्य मंदिर और शिव मंदिर सेंड स्टोन (पत्थरों) से बने हैं। मंदिरों का संतुलन इतना अच्छा है कि चाहे कितना भी आंधी-तूफान आए, लेकिन मंदिरों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। मंदिरों के पीछे बड़ा तालाब है। यह तालाब काफी लंबा व चौड़ा है। तालाब के पीछे पश्चिमी किनारे अनेक चौपड़े व कुएं हैं, जिनमें तालाब का पानी झिरकर आता है। इस कारण से यह चौपड़ा हमेशा स्वच्छ जल से भरे रहते हैं। चौंसठ योगिनी मंदिर ऊंचाई पर स्थित है।
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सड़क, बिजली व पानी का नहीं इंतजाम
विंध्याचल पर्वत शृंखला पर स्थित सूर्य, शिव और जैन मंदिर तक पहुंचने के लिए कंकरीला-पथरीला पगडंडीनुमा रास्ता है। रास्ता खराब होने की वजह से पर्यटकों को यहां जाने के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यहां न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही बिजली। पुरातत्व विभाग द्वारा यह संरक्षित है, लेकिन सड़क नहीं बनने के कारण यहां तक पहुंचना बहुत कठिन हो जाता है।
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बंद रहता है रेस्ट हाउस
पर्यटकों की सुविधा के लिए करीब 18 वर्ष पहले दुधई में रेस्ट हाउस बनाया गया था। जो कुछ दिनों तक ठीक चला। लेकिन, अब यह पूरी तरह से बंद पड़ा है। रखरखाव के अभाव खंडहर होता जा रहा है। प्रशासन द्वारा जगह-जगह प्रचार सामग्री तो लगाई गई है। पुरातत्व विभाग के फोल्ङरों में भी इसका जिक्र किया गया है, लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही है।

नहीं हो रहा संरक्षण
प्राचीन क्षेत्र की प्रगति पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण रुकी हुई है। यह मंदिर जिले का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर अनेक प्राचीन प्रतिमाएं टुकड़ों में बिखरी पड़ी हैं, जिनका संरक्षण पुरातत्व विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है। इस कारण प्रतिमाएं धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं।
सड़क निर्माण के लिए वन विभाग के नियमों के अनुसार अनुमति नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र के प्रचार- प्रसार की बहुत जरूरत है।
- एसके दुबे, पुरातत्व अधिकारी
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