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एंबुलेंस मिली लेकिन रुकने का स्थान नहीं
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पाली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मांग कर रहे पालीवासियों को स्वास्थ्य केंद्र तो नहीं मिला, लेकिन एक एंबुलेंस जरूर मिल गई है। पर, यह सुविधा भी आधी अधूरी है। क्योंकि, एंबुलेंस बिरधा स्थित चिकित्सालय में रहती है और फोन कॉल करने पर ही पाली आती है। स्थानीय स्तर पर एंबुलेंस नहीं रुकने से लोगों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
नगर पंचायत अध्यक्ष रामकुमार चौरसिया ने 26 जुलाई को हरी झंडी दिखाकर पाली के लिए 108 एंबुलेंस की सुविधा शुरू की थी। बताया गया था कि हार्ट अटैक, सांस लेने में परेशानी, नवजात बच्चों के गंभीर मामले, सड़क दुर्घटना (हेड इंजरी आदि), आग से जलने के मामले, जहर गटकने एवं प्रसव के गंभीर मामलों में यह एंबुलेंस उपस्वास्थ्य केंद्र से लोगों की कॉल पर मरीजों के लिए उपलब्ध होगी। इससे यहां के लोगों में राहत नजर आई थी कि मरीजों को अब बाहर ले जाने के लिए अतिरिक्त समय की बर्बादी नहीं होगी ।
लेकिन, एक सप्ताह से एंबुलेंस पाली में नहीं रुक रही है, बल्कि बिरधा स्थित चिकित्सालय में रुकती है। इससे बिरधा से पाली बुलाने पर एंबुलेंस को दस किलोमीटर चलकर आना पड़ता है। इससे तुरंत एंबुलेंस की आस लगाए लोगों का इंतजार पंद्रह से बीस मिनट बढ़ जाता है। यह तो तब है, जब एंबुलेंस बिरधा स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद हो। अन्यथा, इंतजार और लंबा खिंच जाता है। देरी होने से मरीज के परिजन परेशान हो उठते हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी सुविधा से बिना सुविधा के ही ठीक थे।
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प्रसव उपस्वास्थ्य केंद्र पाली ग्रामीण की एएनएम ने रामा चौरसिया ने बताया कि एंबुलेंस का अभी पाली में स्टॉपेज नहीं हो रहा, विभाग से ऐसी जानकारी मिली है कि जल्द शुरू किया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी के मंडल मंत्री सुनील नामदेव ने बताया कि एंबुलेंस का स्टॉपेज पाली में नहीं होने से पाली के लोगों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। जल्द ही विभागीय अधिकारियों से बात की जाएगी, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।
एक व्यक्ति की हो चुकी है मौत
शुक्रवार को पाली निवासी रामसेवक पटेल की हार्टअटैक के कारण मौत हो गई। परिजनों ने बताया था कि रामसेवक के सीने में दर्द उठा, स्थानीय चिकित्सकों ने मना कर दिया। आनन- फानन जिला चिकित्सालय ले गए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और रामसेवक की मौत हो गई। लोगों का कहना है कि यदि पाली में ही अस्पताल की सुविधा होती तो शायद जान बच सकती थी।
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नगर पंचायत अध्यक्ष रामकुमार चौरसिया ने 26 जुलाई को हरी झंडी दिखाकर पाली के लिए 108 एंबुलेंस की सुविधा शुरू की थी। बताया गया था कि हार्ट अटैक, सांस लेने में परेशानी, नवजात बच्चों के गंभीर मामले, सड़क दुर्घटना (हेड इंजरी आदि), आग से जलने के मामले, जहर गटकने एवं प्रसव के गंभीर मामलों में यह एंबुलेंस उपस्वास्थ्य केंद्र से लोगों की कॉल पर मरीजों के लिए उपलब्ध होगी। इससे यहां के लोगों में राहत नजर आई थी कि मरीजों को अब बाहर ले जाने के लिए अतिरिक्त समय की बर्बादी नहीं होगी ।
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लेकिन, एक सप्ताह से एंबुलेंस पाली में नहीं रुक रही है, बल्कि बिरधा स्थित चिकित्सालय में रुकती है। इससे बिरधा से पाली बुलाने पर एंबुलेंस को दस किलोमीटर चलकर आना पड़ता है। इससे तुरंत एंबुलेंस की आस लगाए लोगों का इंतजार पंद्रह से बीस मिनट बढ़ जाता है। यह तो तब है, जब एंबुलेंस बिरधा स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद हो। अन्यथा, इंतजार और लंबा खिंच जाता है। देरी होने से मरीज के परिजन परेशान हो उठते हैं। लोगों का कहना है कि ऐसी सुविधा से बिना सुविधा के ही ठीक थे।
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प्रसव उपस्वास्थ्य केंद्र पाली ग्रामीण की एएनएम ने रामा चौरसिया ने बताया कि एंबुलेंस का अभी पाली में स्टॉपेज नहीं हो रहा, विभाग से ऐसी जानकारी मिली है कि जल्द शुरू किया जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी के मंडल मंत्री सुनील नामदेव ने बताया कि एंबुलेंस का स्टॉपेज पाली में नहीं होने से पाली के लोगों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। जल्द ही विभागीय अधिकारियों से बात की जाएगी, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके।
एक व्यक्ति की हो चुकी है मौत
शुक्रवार को पाली निवासी रामसेवक पटेल की हार्टअटैक के कारण मौत हो गई। परिजनों ने बताया था कि रामसेवक के सीने में दर्द उठा, स्थानीय चिकित्सकों ने मना कर दिया। आनन- फानन जिला चिकित्सालय ले गए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और रामसेवक की मौत हो गई। लोगों का कहना है कि यदि पाली में ही अस्पताल की सुविधा होती तो शायद जान बच सकती थी।