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तकनीक के सहारे बदले किसान

Fri, 29 Jan 2016 01:20 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
ब्यूराे/अमर उजाला Updated Fri, 29 Jan 2016 01:20 AM IST
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agriculture
ललितपुर। जिले में पानी की उपलब्धता व खेती के तरीके पर रिमोट सेंसिंग से नजर रखी जा रही है। इसको लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों के जीवन में तकनीकी के सहारे बदलाव लाएं।
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बृहस्पतिवार को विश्वरैया हाल में आयोजित कार्यशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक व कृषि शाखा के प्रमुख डा. आर के उपाध्याय ने बताया कि जनपद में संचालित पैक्ट योजना के जरिये किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएं, इसको लेकर सर्वे किया जा रहा है। पिछले एक वर्ष में सेंटर की ओर से जामनी, रोहिणी और सजनाम बांध के कमांड एरिया का सर्वे किया गया। यह सर्वे मुख्यत कृषि आधारित है और इसका उद्देश्य कमांड एरिया में फसल के पैटर्न को समझने का है। उन्होंने सेंटर की ओर से एरिया का बनाया गया मैप सींचपालों को उपलब्ध कराया। सींचपालों को मैप की बारीकियां समझाईं गईं और उनसे रिमोट सेंसिंग तकनीक से बनाए गए नक्शा का भौतिक सत्यापन करने को कहा गया। कंमाड एरिया में हो रही पानी की बर्बादी रोकने के तरीके बताए गए।
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वैज्ञानिक एसपीएस जादोन ने रिमोट सेंसिंग के उपयोग संबंधी जानकारी दी। अधिशाषी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड इंजी. एके झा ने बताया कि पैक्ट योजना को सफल बनाने के लिए रिमोट सेंसिंग सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके सेंटर की ओर से किसानों के हितैषी आंकड़े सिंचाई विभाग को उपलब्ध हो पा रहे हैं। इन आंकड़ों की मदद से सिंचाई विभाग किसानों को दिए जा रहे पानी के सही उपयोग पर नजर रख सकेगा। कार्यशाला में ए के गुप्ता, धनंजय सिंह, अश्वनी कुमार, सुरेश अवस्थी, ए के सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन परियोजना वैज्ञानिक धीरज द्विवेदी ने किया।
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भूसे के फेर में बर्बाद किसान
रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की ओर से सैटेलाइट की मदद से तैयार किए आंकड़ों ने जनपद के किसानों की बर्बादी के कारण भी खोजें है। एक तो जनपद में पानी की कमी है, अधिकांश खेती भंडारित किए पानी पर निर्भर है। दूसरी ओर जनपद में सबसे ज्यादा गेहूं की फसल बोई जाती है। गेहूं की फसल को अन्य फसलों से ज्यादा पानी की जरूरत होती है। सर्वे के दौरान किसानों ने वैज्ञानिकों को बताया कि गेहूं की फसल बोने के पीछे भूसा भी बड़ा कारण है। ऐसे में कमांड एरिया के किसानों को गेहूं की फसल केवल खाने योग्य उगाने व उसकी जगह ज्यादा से ज्यादा दलहन व तिलहन की फसल बोने को जागरूक किया जाएगा। दलहन व तिलहन फसलों से किसानों को ज्यादा दाम मिलेंगे और कम पानी के इस्तेमाल से टेल तक बसे किसानों को पानी उपलब्ध हो सकेगा।
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