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पांच बजे बाद सीएचसी में सन्नाटा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Mar 2017 12:58 AM IST
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पांच बजे बाद सीएचसी में सन्नाटा
- फोटो : demo
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क्षेत्र में जनता के स्वास्थ्य के लिए सरकार द्वारा बनाए गए सीएचसी में आम दफ्तरों की तरह शाम पांच बजे के बाद सन्नाटा पसर जाता है। आपातकालीन मरीजों की देखरेख के लिए सीएचसी में कोई व्यवस्था नहीं दिखती है, जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्र के लोगों की चिकित्सा सेवा के लिए सरकार की ओर से तालबेहट नगर में 30 बेड की सुविधा वाला सीएचसी बनाया हुआ है, इसमें प्रतिदिन भारी संख्या में आसपास के क्षेत्र से मरीज अपना उपचार कराने के लिए आते हैं। सीएचसी के रिकार्ड के मुताबिक ही रोजाना औसतन 300 मरीज पंजीकरण कराते हैं। अस्पताल में अस्थि रोग, फिजीशियन, दंत चिकित्सक हैं। नेत्र चिकित्सक के स्थान पर एक कर्मचारी द्वारा नेत्र रोगियों को देखा जा रहा है। अस्पताल के बारे में यह बात अब आम हो गई है कि यह अस्पताल रोजाना सुबह आम दफ्तरों की तरह खुलता हैं और शाम पांच बजे के बाद सन्नाटा हो जाता है। आपात स्थिति होने पर चिकित्सक तलाश करने पर भी नहीं मिलते हैं। इस कारण लोगों को काफी परेशान हाल देखा जाता है। अस्पताल में वार्ड ब्वाय तक नहीं मिलते हैं, जबकि ड्यूटी पूरे समय लगाई जाती हैं। आपात काल के लिए चिकित्सक की भी ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में इस अस्पताल के भरोसे इलाज की बात सोचने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय-समय पर लोगों की ओर से स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से शिकायत की जाती हैं, जिसका असर कुछ दिन दिखता है लेकिन उसके बाद हालात जस के तस हो जाते हैं। कुछ अर्से पहले स्वास्थ्य अधिकारियों से सीएचसी में पांच बजे के बाद सन्नाटा होने की शिकायत की गई थी। अफसरों ने इसका संज्ञान लिया तो चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी कुछ दिन के लिए अलर्ट दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद फिर वही हालात हो गए।
आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही बरतना किसी भी दशा में उचित नहीं है। ऐसे मामले में लापरवाह कर्मचारियों पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके सोनी, चिकित्सा अधीक्षक, तालबेहट।
घायल वृद्ध को कर दिया झांसी रेफर
तालबेहट। ग्राम दौलता निवासी जयपाल पुत्र निरन सिंह उम्र 57 वर्ष शाम को अपने खेत पर गया था। उसी समय गले में रस्सी बंधा बैल भागने लगा। जिसकी चपेट में आने से जयपाल गिर गए और उनका पैर टूट गया। उन्हें गंभीर हालत में उपचार के लिए सीएचसी तालबेहट लाया गया। जहां उनका कोई इलाज नहीं किया और सीधे मेडिकल कालेज झांसी लिए रेफर करने की औपचारिकता निभा दी गई।
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ईएनटी और नेत्र चिकित्सक नहीं
तालबेहट। सीएचसी में ईएनटी सर्जन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ कई वर्षों से नहीं हैं, जिनकी नियुक्ति के लिए बार-बार मांग उठती है। मांग पर अफसरों और नेताओं की ओर से आश्वासन मिलते हैं लेकिन इन चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की जाती है। इन चिकित्सकों के अभाव में मरीजों का इलाज नहीं होता है। ईएनटी मरीजों को लौटना पड़ता है। नेत्र रोगियों को एक स्वास्थ्य कर्मी द्वारा इलाज के नाम पर परीक्षण किया जाता है।
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क्षेत्र के लोगों की चिकित्सा सेवा के लिए सरकार की ओर से तालबेहट नगर में 30 बेड की सुविधा वाला सीएचसी बनाया हुआ है, इसमें प्रतिदिन भारी संख्या में आसपास के क्षेत्र से मरीज अपना उपचार कराने के लिए आते हैं। सीएचसी के रिकार्ड के मुताबिक ही रोजाना औसतन 300 मरीज पंजीकरण कराते हैं। अस्पताल में अस्थि रोग, फिजीशियन, दंत चिकित्सक हैं। नेत्र चिकित्सक के स्थान पर एक कर्मचारी द्वारा नेत्र रोगियों को देखा जा रहा है। अस्पताल के बारे में यह बात अब आम हो गई है कि यह अस्पताल रोजाना सुबह आम दफ्तरों की तरह खुलता हैं और शाम पांच बजे के बाद सन्नाटा हो जाता है। आपात स्थिति होने पर चिकित्सक तलाश करने पर भी नहीं मिलते हैं। इस कारण लोगों को काफी परेशान हाल देखा जाता है। अस्पताल में वार्ड ब्वाय तक नहीं मिलते हैं, जबकि ड्यूटी पूरे समय लगाई जाती हैं। आपात काल के लिए चिकित्सक की भी ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में इस अस्पताल के भरोसे इलाज की बात सोचने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय-समय पर लोगों की ओर से स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से शिकायत की जाती हैं, जिसका असर कुछ दिन दिखता है लेकिन उसके बाद हालात जस के तस हो जाते हैं। कुछ अर्से पहले स्वास्थ्य अधिकारियों से सीएचसी में पांच बजे के बाद सन्नाटा होने की शिकायत की गई थी। अफसरों ने इसका संज्ञान लिया तो चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी कुछ दिन के लिए अलर्ट दिखाई दिए, लेकिन उसके बाद फिर वही हालात हो गए।
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आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही बरतना किसी भी दशा में उचित नहीं है। ऐसे मामले में लापरवाह कर्मचारियों पर अवश्य कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके सोनी, चिकित्सा अधीक्षक, तालबेहट।
घायल वृद्ध को कर दिया झांसी रेफर
तालबेहट। ग्राम दौलता निवासी जयपाल पुत्र निरन सिंह उम्र 57 वर्ष शाम को अपने खेत पर गया था। उसी समय गले में रस्सी बंधा बैल भागने लगा। जिसकी चपेट में आने से जयपाल गिर गए और उनका पैर टूट गया। उन्हें गंभीर हालत में उपचार के लिए सीएचसी तालबेहट लाया गया। जहां उनका कोई इलाज नहीं किया और सीधे मेडिकल कालेज झांसी लिए रेफर करने की औपचारिकता निभा दी गई।
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ईएनटी और नेत्र चिकित्सक नहीं
तालबेहट। सीएचसी में ईएनटी सर्जन एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ कई वर्षों से नहीं हैं, जिनकी नियुक्ति के लिए बार-बार मांग उठती है। मांग पर अफसरों और नेताओं की ओर से आश्वासन मिलते हैं लेकिन इन चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की जाती है। इन चिकित्सकों के अभाव में मरीजों का इलाज नहीं होता है। ईएनटी मरीजों को लौटना पड़ता है। नेत्र रोगियों को एक स्वास्थ्य कर्मी द्वारा इलाज के नाम पर परीक्षण किया जाता है।