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Lalitpur News: कुपोषण दूर करने का प्रशासनिक दावा फेल, साल दर साल बच्चे हो रहे शिकार
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ललितपुर। कुपोषण दूर करने के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन वह कदम नाकाफी साबित हुए हैं। साल दर साल बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। शासन के निर्देश पर कुछ वर्ष पूर्व अधिकारियों ने कुपोषित गांव को गोद लेकर उन्हें तंदुरुस्त करने की कवायद शुरू की थी। लेकिन यह अभियान भी धराशाही हो गया और गांव की हालत जस की तस बनी रही।
जनपद में कुपोषण खत्म नहीं हो रहा है। मां के गर्भ से ही कुपोषित बच्चे जन्म ले रहे हैं। हालांकि, आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भधारण के बाद से महिलाओं के पोषित आहार की जानकारी और उसका वितरण किया जाता है। लेकिन इसके बाद अगर पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो स्थिति में सुधार नहीं आया है। हालांकि, जनपद में कुछ प्रयासाें के कारण ठीक होने की दर बढ़ी है। जनपद में वर्ष 2022 में 6523 बच्चों को चिह्नित किया गया। इसमें अतिकुपोषित बच्चे 1634 थे। वर्ष 2023 में 4890 बच्चों का चिह्नित किया, जिसमें अतिकुपोषित 1321 बच्चे चिह्नित किए गए। वर्तमान वर्ष में जून तक 3790 बच्चों को चिह्नित किया गया, इसमें 926 अतिकुपोषित बच्चे मिले। जिले में इसके लिए कई योजनाएं आई हैं, लेकिन अतिकुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। अगर पिछले ढाई सालों के आंकड़े देखें तो 3881 अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित हुए हैं।
हफ्ते में दो बार लगता ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य शिविर
ग्राम पंचायतों में दो बार स्वास्थ्य शिविर लगाया जाता है। इसमें अतिकुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण होता है। प्रत्येक बुधवार और शनिवार को इस शिविर का आयोजन होता है। शिविर में जो बच्चे कमजोर होते हैं, उन्हें एनआरसी में भर्ती कराया जाता है। जहां बच्चों को पोषक आहार और तीमारदार को भोजन दिया जाता है।
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बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं का गर्भावस्था ही आंगनबाड़ी केंद्र पर चिह्नित करते हुए उन्हें उपचार पर पोषक आहार उपलब्ध कराया जाता है। ताकि, गर्भ में बच्चा पोषित हो। साथ ही हर कुपोषित बच्चों का निरंतर स्वास्थ्य परीक्षण होता है। - नीरज कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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जनपद में कुपोषण खत्म नहीं हो रहा है। मां के गर्भ से ही कुपोषित बच्चे जन्म ले रहे हैं। हालांकि, आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भधारण के बाद से महिलाओं के पोषित आहार की जानकारी और उसका वितरण किया जाता है। लेकिन इसके बाद अगर पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो स्थिति में सुधार नहीं आया है। हालांकि, जनपद में कुछ प्रयासाें के कारण ठीक होने की दर बढ़ी है। जनपद में वर्ष 2022 में 6523 बच्चों को चिह्नित किया गया। इसमें अतिकुपोषित बच्चे 1634 थे। वर्ष 2023 में 4890 बच्चों का चिह्नित किया, जिसमें अतिकुपोषित 1321 बच्चे चिह्नित किए गए। वर्तमान वर्ष में जून तक 3790 बच्चों को चिह्नित किया गया, इसमें 926 अतिकुपोषित बच्चे मिले। जिले में इसके लिए कई योजनाएं आई हैं, लेकिन अतिकुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। अगर पिछले ढाई सालों के आंकड़े देखें तो 3881 अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित हुए हैं।
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हफ्ते में दो बार लगता ग्राम पंचायतों में स्वास्थ्य शिविर
ग्राम पंचायतों में दो बार स्वास्थ्य शिविर लगाया जाता है। इसमें अतिकुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण होता है। प्रत्येक बुधवार और शनिवार को इस शिविर का आयोजन होता है। शिविर में जो बच्चे कमजोर होते हैं, उन्हें एनआरसी में भर्ती कराया जाता है। जहां बच्चों को पोषक आहार और तीमारदार को भोजन दिया जाता है।
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बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं का गर्भावस्था ही आंगनबाड़ी केंद्र पर चिह्नित करते हुए उन्हें उपचार पर पोषक आहार उपलब्ध कराया जाता है। ताकि, गर्भ में बच्चा पोषित हो। साथ ही हर कुपोषित बच्चों का निरंतर स्वास्थ्य परीक्षण होता है। - नीरज कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी।