{"_id":"6a4d63ac9473bdbb200bb8e2","slug":"administration-swings-into-action-upon-receiving-reports-of-the-ashoka-pillar-being-dismantled-halts-work-and-initiates-an-inquiry-lalitpur-news-c-11-1-jhs1037-830582-2026-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: अशोक स्तंभ तोड़े जाने की सूचना पर हरकत में आया प्रशासन, काम रुकवाकर शुरू कराई जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: अशोक स्तंभ तोड़े जाने की सूचना पर हरकत में आया प्रशासन, काम रुकवाकर शुरू कराई जांच
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। शहर के तुवन चौराहा स्थित नहर पुलिया के पास बने अशोक स्तंभ को तोड़े जाने की सूचना पर प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। जिलाधिकारी सत्यप्रकाश के निर्देश पर राजस्व अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और तोड़फोड़ का कार्य रुकवाकर मामले की जांच शुरू कर दी। जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आने के बाद प्रशासन ने अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, स्टेशन रोड किनारे कई दशक पूर्व निर्मित इस स्तंभ पर भारत का नक्शा और अशोक स्तंभ अंकित था। इसके अलावा यहां विद्युत तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) भी स्थापित था, जो आसपास के क्षेत्र को कवर करता था। मंगलवार सुबह स्तंभ के चारों ओर हरी मैट लगाकर उसे ढक दिया गया और तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया।
मामले की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर मनीष कुमार को तत्काल मौके पर भेजकर कार्य रुकवाने और जांच कराने के निर्देश दिए। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार, लेखपाल और अन्य राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तोड़फोड़ का कार्य रुकवाया, लेकिन तब तक स्तंभ का ऊपरी हिस्सा, जिसमें अशोक लाट, भारत का नक्शा और बिजली रोधी यंत्र लगा था, क्षतिग्रस्त किया जा चुका था।
विज्ञापन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद भी कुछ समय तक मजदूर तोड़फोड़ का कार्य करते रहे। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान भाजपा नेता प्रदीप चौबे भी मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि यह स्तंभ ललितपुर की ऐतिहासिक धरोहर नहीं है, बल्कि इसे कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े डॉ. ताराचंद ने अपनी रूस यात्रा की स्मृति में बनवाया था। उन्होंने दावा किया कि संबंधित भूमि का फ्रीहोल्ड कराया जा चुका है और संपत्ति का एक हिस्सा बेचा भी जा चुका है। वहीं प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि संबंधित भूमि निजी है या नजूल की तथा स्तंभ को किस आधार पर हटाया जा रहा था। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आरोप लगाए गए हैं कि यह स्तंभ नजूल भूमि पर बना है। संबंधित पक्षों से अभिलेख मांगे गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मनीष कुमार, एसडीएम सदर
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
एक पक्ष भूमि को निजी बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे नजूल भूमि होने का दावा कर रहा है। मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई है। अभिलेखों की जांच के बाद निर्णय लिया जाएगा।
सत्यप्रकाश, जिलाधिकारी
विज्ञापन
ललितपुर। शहर के तुवन चौराहा स्थित नहर पुलिया के पास बने अशोक स्तंभ को तोड़े जाने की सूचना पर प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। जिलाधिकारी सत्यप्रकाश के निर्देश पर राजस्व अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और तोड़फोड़ का कार्य रुकवाकर मामले की जांच शुरू कर दी। जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आने के बाद प्रशासन ने अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, स्टेशन रोड किनारे कई दशक पूर्व निर्मित इस स्तंभ पर भारत का नक्शा और अशोक स्तंभ अंकित था। इसके अलावा यहां विद्युत तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) भी स्थापित था, जो आसपास के क्षेत्र को कवर करता था। मंगलवार सुबह स्तंभ के चारों ओर हरी मैट लगाकर उसे ढक दिया गया और तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया।
विज्ञापन
मामले की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर मनीष कुमार को तत्काल मौके पर भेजकर कार्य रुकवाने और जांच कराने के निर्देश दिए। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार, लेखपाल और अन्य राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तोड़फोड़ का कार्य रुकवाया, लेकिन तब तक स्तंभ का ऊपरी हिस्सा, जिसमें अशोक लाट, भारत का नक्शा और बिजली रोधी यंत्र लगा था, क्षतिग्रस्त किया जा चुका था।
विज्ञापन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद भी कुछ समय तक मजदूर तोड़फोड़ का कार्य करते रहे। सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान भाजपा नेता प्रदीप चौबे भी मौके पर पहुंचे। उनका कहना था कि यह स्तंभ ललितपुर की ऐतिहासिक धरोहर नहीं है, बल्कि इसे कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े डॉ. ताराचंद ने अपनी रूस यात्रा की स्मृति में बनवाया था। उन्होंने दावा किया कि संबंधित भूमि का फ्रीहोल्ड कराया जा चुका है और संपत्ति का एक हिस्सा बेचा भी जा चुका है। वहीं प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि संबंधित भूमि निजी है या नजूल की तथा स्तंभ को किस आधार पर हटाया जा रहा था। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आरोप लगाए गए हैं कि यह स्तंभ नजूल भूमि पर बना है। संबंधित पक्षों से अभिलेख मांगे गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मनीष कुमार, एसडीएम सदर
एक पक्ष भूमि को निजी बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे नजूल भूमि होने का दावा कर रहा है। मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई है। अभिलेखों की जांच के बाद निर्णय लिया जाएगा।
सत्यप्रकाश, जिलाधिकारी