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आचार्य श्री ने इंडिया नहीं भारत बोलो का दिया था नारा: विशाल जैन
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संवाद न्यूज एजेंसी
डोंगराखुर्द। अपराजेय साधक जैन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज के देह त्याग से सर्वत्र शोक की लहर है। महामुनिराज के समाधिस्थ होने पर ब्लॉक क्षेत्र मड़ावरा अंतर्गत संकुल केंद्र पारौल के उच्च प्राथमिक विद्यालय गुरयाना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ ज्ञान दीप प्रज्वलित कर आचार्य वंदना से किया गया।
अहिंसा सेवा संगठन के संस्थापक सहायक अध्यापक विशाल जैन ने आचार्य विद्या सागर महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, आचार्य श्री ने लोक कल्याण की भावना से राष्ट्र के नव निर्माण और चतुर्मुखी विकास के लिए अविस्मरणीय योगदान दिया। त्याग की प्रतिमूर्ति आचार्य श्री की प्रेरणा से अहिंसा, गो सेवा, बालिका शिक्षा, स्वावलंबन और स्वदेशी अपनाओ, शिक्षा-स्वास्थ्य, हिंदी भाषा उत्थान, भारतीय और श्रमण संस्कृति की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने देश को इंडिया नहीं भारत बोलो का नारा एवं प्रतिभाओं का निर्यात न करने का संदेश दिया। शिक्षक, शिक्षामित्र, ग्रामीण एवं बच्चों ने महामुनिराज के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर संतोष कुशवाहा, नरेंद्र प्रताप सिंह, हाकम सिंह, अनीता तिवारी, विनीता कुमारी, मल्थूबाई, रतिदेवी, उमा, उर्मिला आदि मौजूद रहे।
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डोंगराखुर्द। अपराजेय साधक जैन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज के देह त्याग से सर्वत्र शोक की लहर है। महामुनिराज के समाधिस्थ होने पर ब्लॉक क्षेत्र मड़ावरा अंतर्गत संकुल केंद्र पारौल के उच्च प्राथमिक विद्यालय गुरयाना में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसका शुभारंभ ज्ञान दीप प्रज्वलित कर आचार्य वंदना से किया गया।
अहिंसा सेवा संगठन के संस्थापक सहायक अध्यापक विशाल जैन ने आचार्य विद्या सागर महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, आचार्य श्री ने लोक कल्याण की भावना से राष्ट्र के नव निर्माण और चतुर्मुखी विकास के लिए अविस्मरणीय योगदान दिया। त्याग की प्रतिमूर्ति आचार्य श्री की प्रेरणा से अहिंसा, गो सेवा, बालिका शिक्षा, स्वावलंबन और स्वदेशी अपनाओ, शिक्षा-स्वास्थ्य, हिंदी भाषा उत्थान, भारतीय और श्रमण संस्कृति की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने देश को इंडिया नहीं भारत बोलो का नारा एवं प्रतिभाओं का निर्यात न करने का संदेश दिया। शिक्षक, शिक्षामित्र, ग्रामीण एवं बच्चों ने महामुनिराज के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर संतोष कुशवाहा, नरेंद्र प्रताप सिंह, हाकम सिंह, अनीता तिवारी, विनीता कुमारी, मल्थूबाई, रतिदेवी, उमा, उर्मिला आदि मौजूद रहे।
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