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Lalitpur News: किसानों की नहीं हो पा रही दोगुनी आय मटर की खेती में हो रहा मामूली फायदा
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रामकुमार साहू
बिरधा (ललितपुर)। जनपद का किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। किसानों को एक एकड़ खेत में मटर की फसल के लिए करीब 28500 रुपये की लागत लगानी पड़ी लेकिन जब बाजार में उपज की बिक्री हुई तो 29400 रुपये ही मिले।
हैरत की बात तो यह है कि खेत में बोने के लिए हरी मटर का बीज 14 हजार रुपये प्रति क्विंटल खरीदा था लेकिन जब उपज बेचने की बात आई तो मंडी में वही हरी मटर चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। इससे किसान को फायद नहीं हो पा रहा है।
किसानों का कहना है कि सरकार किसान की आय दोगुनी करने का दावा करती है लेकिन उसकी हकीकत किसान ही बता पा रहा है। किसानों का कहना है कि हर फसल की एमएसपी दरें तय होनी चाहिए और समय से सरकारी खरीद हो, इससे किसान को इसका लाभ मिल सके। हरी मटर का सरकारी रेट लगभग 10 से 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए ताकि किसान की लागत निकल सके। (संवाद)
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एक एकड़ खेत में फसल पर होने वाले अनुमानित व्यय
बोई गई मटर - 60 किलोग्राम - 8400 रुपये
खेत में खाद 2000 रुपये
खेत की जुताई और बोनी - 3000 रुपये
फसल में दो पानी - 6000 रुपये
पोषण और कीटनाशक दवा - 2000 रुपये
फसल की कटाई की मजदूरी 5000 रुपये
मढ़ाई (थ्रेसर) 1500 रुपये
घर से मंडी तक भाड़ा - 500 रुपये
एक एकड़ खेत में पैदावार - करीब सात क्विंटल
बाजार में उपज का भाव - 4200 रुपये प्रति क्विंटल
(लागत और बिक्री के आंकड़े किसानों से मिली जानकारी के अनुसार)
सरकार सफेद और हरी मटर की एमएसपी रेट फिक्स कर जल्द से जल्द सरकारी क्रय केंद्र खुलवाए। मांग पूरी नहीं हुई तो भाकियू (लोकशक्ति) अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होगा। - सुनील कुमार शर्मा, जिलाध्यक्ष
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बिरधा (ललितपुर)। जनपद का किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। किसानों को एक एकड़ खेत में मटर की फसल के लिए करीब 28500 रुपये की लागत लगानी पड़ी लेकिन जब बाजार में उपज की बिक्री हुई तो 29400 रुपये ही मिले।
हैरत की बात तो यह है कि खेत में बोने के लिए हरी मटर का बीज 14 हजार रुपये प्रति क्विंटल खरीदा था लेकिन जब उपज बेचने की बात आई तो मंडी में वही हरी मटर चार से साढ़े चार हजार रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। इससे किसान को फायद नहीं हो पा रहा है।
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किसानों का कहना है कि सरकार किसान की आय दोगुनी करने का दावा करती है लेकिन उसकी हकीकत किसान ही बता पा रहा है। किसानों का कहना है कि हर फसल की एमएसपी दरें तय होनी चाहिए और समय से सरकारी खरीद हो, इससे किसान को इसका लाभ मिल सके। हरी मटर का सरकारी रेट लगभग 10 से 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए ताकि किसान की लागत निकल सके। (संवाद)
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एक एकड़ खेत में फसल पर होने वाले अनुमानित व्यय
बोई गई मटर - 60 किलोग्राम - 8400 रुपये
खेत में खाद 2000 रुपये
खेत की जुताई और बोनी - 3000 रुपये
फसल में दो पानी - 6000 रुपये
पोषण और कीटनाशक दवा - 2000 रुपये
फसल की कटाई की मजदूरी 5000 रुपये
मढ़ाई (थ्रेसर) 1500 रुपये
घर से मंडी तक भाड़ा - 500 रुपये
एक एकड़ खेत में पैदावार - करीब सात क्विंटल
बाजार में उपज का भाव - 4200 रुपये प्रति क्विंटल
(लागत और बिक्री के आंकड़े किसानों से मिली जानकारी के अनुसार)
सरकार सफेद और हरी मटर की एमएसपी रेट फिक्स कर जल्द से जल्द सरकारी क्रय केंद्र खुलवाए। मांग पूरी नहीं हुई तो भाकियू (लोकशक्ति) अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होगा। - सुनील कुमार शर्मा, जिलाध्यक्ष