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पशुओं में फैली रहस्यमय बीमारी
Lalitpur
Updated Sat, 26 Apr 2014 05:30 AM IST
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ललितपुर। रहस्यमय बीमारी ने पशुओं की जान जोखिम में डाल दी है। रोगग्रस्त पशुओं की दो तीन दिनों के अंदर की मौत हो जा रही है। परेशान ग्रामीण पशुपालन विभाग की परिक्रमा लगा रहे हैं। इसके बावजूद विभागीय चिकित्सकों ने इससे निपटने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।
जनपद स्थित ग्रामीण इलाकों में पशुओं को रहस्मय बीमारियां हो रहीं हैं। खासकर गौवंश व भैंसों पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है। बीमारी से ग्रसित जानवर खाना पीना छोड़ देता है और उसका शरीर शिथिल पड़ने लगता है। अधिकतम दो से तीन दिनों के अंदर उसकी मौत हो जाती है। बीते दिनों जखौरा सहित आसपास के गांवों में चार दर्जन से अधिक जानवर इस बीमारी से अकाल काल के गाल में समा चुके हैं। धीरे- धीरे यह बीमारी अन्य ग्रामीण इलाकों में भी पैर पसारती जा रही है। ग्रामीण जब तक पशु चिकित्सकों से संपर्क करते हैं तब तक जानवर की मौत हो जाती है। इस संबंध में कई ग्रामीणों ने पशु पालन विभाग के अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया और रहस्यमय बीमारियों से पशुओं को बचाने की मांग की लेकिन विभागीय अधिकारी अभी तक इसको लेकर गंभीर नहीं हुए हैं।
खुले में छोड़ रहे शव
ललितपुर। रहस्यमय बीमारी से ग्रसित जानवर की मौत के बाद पशुपालक उसके शव को खुले में फेंककर चले जाते हैं। उससे उठने वाली सड़ांध लोगों को परेशान कर देती है। इससे बीमारी के और फैलने की संभावना बलवती होती है। वहीं, जानकारों का कहना है कि मृत जानवरों को जमीन में दफनाने से बीमारी का संक्रमण नहीं फैलता। साथ ही उसका शव बेहतर खाद में परिवर्तित हो जाता है।
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जनपद स्थित ग्रामीण इलाकों में पशुओं को रहस्मय बीमारियां हो रहीं हैं। खासकर गौवंश व भैंसों पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है। बीमारी से ग्रसित जानवर खाना पीना छोड़ देता है और उसका शरीर शिथिल पड़ने लगता है। अधिकतम दो से तीन दिनों के अंदर उसकी मौत हो जाती है। बीते दिनों जखौरा सहित आसपास के गांवों में चार दर्जन से अधिक जानवर इस बीमारी से अकाल काल के गाल में समा चुके हैं। धीरे- धीरे यह बीमारी अन्य ग्रामीण इलाकों में भी पैर पसारती जा रही है। ग्रामीण जब तक पशु चिकित्सकों से संपर्क करते हैं तब तक जानवर की मौत हो जाती है। इस संबंध में कई ग्रामीणों ने पशु पालन विभाग के अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया और रहस्यमय बीमारियों से पशुओं को बचाने की मांग की लेकिन विभागीय अधिकारी अभी तक इसको लेकर गंभीर नहीं हुए हैं।
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खुले में छोड़ रहे शव
ललितपुर। रहस्यमय बीमारी से ग्रसित जानवर की मौत के बाद पशुपालक उसके शव को खुले में फेंककर चले जाते हैं। उससे उठने वाली सड़ांध लोगों को परेशान कर देती है। इससे बीमारी के और फैलने की संभावना बलवती होती है। वहीं, जानकारों का कहना है कि मृत जानवरों को जमीन में दफनाने से बीमारी का संक्रमण नहीं फैलता। साथ ही उसका शव बेहतर खाद में परिवर्तित हो जाता है।
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