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जायका से दूर होगी निर्धनता: उप निदेशक
Lalitpur
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। निर्धनता उन्मूलन परियोजना (जायका) के तहत स्वयं सहायता समूह गठित कर जंगलों के आसपास रहने वाले गरीब व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इस दौरान उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने को ऋण मुहैया कराया जाएगा। वन विभाग रेस्ट हाउस में पत्रकारों से मुलाकात के दौरान जायका परियोजना के डिप्टी डायरेक्टर एसके सक्सेना ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि वनों पर निर्भर रहने वालों को आत्म निर्भर बनाने के लिए संयुक्त वन प्रबंधन समिति के अंतर्गत तीन स्वयं सहायता समूह गठित किए जा रहे हैं। प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को ग्रेडिंग के पश्चात एक लाख दस हजार रुपये ऋण के रूप में दिए जाएंगे। इस राशि से समूह के सदस्य कुटीर उद्योग स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने स्वीकारा कि प्रवेश बिंदु के कार्य की गति धीमी रही है, जिस वजह से सामुदायिक भागीदारी नहीं बढ़ सकी है। दो दिन के भ्रमण के दौरान यह बात सामने आई है। हालांकि उन्होंने पौधरोपण को ठीकठाक बताया। स्थानीय स्तर पर समिति के कार्यों में चल रहे कमीशनबाजी के सवाल को टालते हुए कहा कि उच्च स्तर पर कहीं भी इस तरह का कोई प्रकरण नहीं है। गत वित्तीय वर्ष में कमीशन के मामले की जांच के बारे में कहा कि जांच के दायरे में चल रहे अफसरों को न्यायालय से स्थगन मिल गया है। मामले की जांच के लिए परियोजना निदेशक जायका रूपक डे, अतुल जिंदल मौके का भ्रमण कर चुके हैं। यही नहीं, कपासी, रमपुरा समितियों को भंग कर उनका पुनर्गठन किया गया है। इसके अलावा समिति के कार्यों का विशेष आडिट भी कराया जा चुका है।
इससे पहले डिप्टी डायरेक्टर ने रेस्ट हाउस परिसर में रेंजर, सचिव व एनजीओ की बैठक ली, इसमें पौधरोपण के दौरान चारा, घास, जड़ी बूटी लगाने को कहा। उन्होंने एनजीओ के कामकाज पर असंतोष जाहिर करते हुए सुधर जाने की हिदायत दी।
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उन्होंने कहा कि वनों पर निर्भर रहने वालों को आत्म निर्भर बनाने के लिए संयुक्त वन प्रबंधन समिति के अंतर्गत तीन स्वयं सहायता समूह गठित किए जा रहे हैं। प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को ग्रेडिंग के पश्चात एक लाख दस हजार रुपये ऋण के रूप में दिए जाएंगे। इस राशि से समूह के सदस्य कुटीर उद्योग स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने स्वीकारा कि प्रवेश बिंदु के कार्य की गति धीमी रही है, जिस वजह से सामुदायिक भागीदारी नहीं बढ़ सकी है। दो दिन के भ्रमण के दौरान यह बात सामने आई है। हालांकि उन्होंने पौधरोपण को ठीकठाक बताया। स्थानीय स्तर पर समिति के कार्यों में चल रहे कमीशनबाजी के सवाल को टालते हुए कहा कि उच्च स्तर पर कहीं भी इस तरह का कोई प्रकरण नहीं है। गत वित्तीय वर्ष में कमीशन के मामले की जांच के बारे में कहा कि जांच के दायरे में चल रहे अफसरों को न्यायालय से स्थगन मिल गया है। मामले की जांच के लिए परियोजना निदेशक जायका रूपक डे, अतुल जिंदल मौके का भ्रमण कर चुके हैं। यही नहीं, कपासी, रमपुरा समितियों को भंग कर उनका पुनर्गठन किया गया है। इसके अलावा समिति के कार्यों का विशेष आडिट भी कराया जा चुका है।
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इससे पहले डिप्टी डायरेक्टर ने रेस्ट हाउस परिसर में रेंजर, सचिव व एनजीओ की बैठक ली, इसमें पौधरोपण के दौरान चारा, घास, जड़ी बूटी लगाने को कहा। उन्होंने एनजीओ के कामकाज पर असंतोष जाहिर करते हुए सुधर जाने की हिदायत दी।
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