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देश, धर्म व संस्कृति की रक्षा का संकल्प लें: मुनिश्री
Lalitpur
Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
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ललितपुर। क्षेत्रपाल मंदिर में आयोजित रक्षाबंधन विधान के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान 151 परिवाराें ने मिलकर 1.08 लाख श्रीफल चढ़ाकर 700 मुनियों को अर्ध्य चढ़ाए। मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने रक्षाबंधन विधान की महिमा बताते हुए राष्ट्र, धर्म व संस्कृति की रक्षा का संकल्प लेने का आह्वान किया।
बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े छह बजे रक्षाबंधन विधान का शुभारंभ हुआ। इस दौरान नित्य नियम पूजा, शांति धारा का आयोजन हुआ। तदोपरांत 151 परिवारों ने मिलकर 1.08 लाख श्रीफल चढ़ाकर 700 मुनियों को अर्ध्य चढ़ाए। इस अवसर पर मुनिश्री ने रक्षाबंधन विधान महिमा को विस्तार से बताते हुए कहा कि 700 मुनियों की रक्षा के लिए मुनि विष्णु कुमार ने अपने मुनि पद को छोड़कर श्रावक बनकर उनकी रक्षा की थी। उज्जैन नगर में एक राजा थे जो श्रवण संस्कृति को मानने वाले थे, उसके राज्य में 700 मुनियों का आगमन हुआ। मंत्रियों ने उन्हें अपमानित किया। राजा ने मंत्रियों को मुनियों के अपमान पर राज्य से निकाल दिया। वे चारों मंत्री राज्य छोड़कर हस्तिनापुर राज्य पहुंच गए। यहां उन्होंने हस्तिनापुर के राजा को विश्वास में लेकर मंत्री पद ही नहीं, इच्छित वर का भी वचन ले लिया। जब मुनि बिहार करते हुए हस्तिनापुर पहुंचे तो वह मंत्री उन मुनियों को पहचान गए और उन्होंने अपमान का बदला लेने का मन बना लिया। मंत्रियों ने 700 मुनियों पर घोर उपसर्ग करने के लिए राजा से इच्छित वर में तीन दिन का राज्य मांग लिया। तत्पश्चात उन्होंने मुनियों पर घोर उपसर्ग किया, जब मुनि विष्णु कुमार को इस उपसर्ग का पता चला तो उन्होंने अपना मुनि पद छोड़कर श्रावक का भेष धारण कर 700 मुनियों की रक्षा की थी। उस समय मुनि विष्णु कुमार ने हस्तिनापुर की जनता से कहा था कि आज के दिन रक्षा सूत्र बांधकर हमें वचन दो कि हम कभी श्रवण संस्कृति व मुनियों पर उपसर्ग नहीं होने देंगे। यही नहीं, उनकी रक्षा के लिए अपने प्राण भी न्योछावर कर देंगे। इसी श्रवण संस्कृति की रक्षा के लिए यह पर्व मनाया जाता है, साथ ही एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर श्रवण संस्कृति व मुनियों की रक्षा का संकल्प लिया जाता है।
इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य अपने परिवार सहित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने मुनिश्री का आशीर्वाद लेकर उन्हें श्रीफल भेंट किया। इस दौरान सकल दिगंबर जैन समाज के हजारों श्रेष्ठीजन, प्रबुद्ध नागरिक व श्रद्धालुगण मौजूद रहे। रक्षाबंधन विधान के पावन कार्यक्रम को सफल सकुशल संपन्न कराने में ब्र. प्रदीप भैया पीयूष, मनोज भैया, अन्नू भैया व उपस्थित ब्रह्मचारी भैया व ब्रह्मचारिणी दीदी एवं समाज के नवयुवक मंडलों का सराहनीय सहयोग रहा।
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बृहस्पतिवार की सुबह साढ़े छह बजे रक्षाबंधन विधान का शुभारंभ हुआ। इस दौरान नित्य नियम पूजा, शांति धारा का आयोजन हुआ। तदोपरांत 151 परिवारों ने मिलकर 1.08 लाख श्रीफल चढ़ाकर 700 मुनियों को अर्ध्य चढ़ाए। इस अवसर पर मुनिश्री ने रक्षाबंधन विधान महिमा को विस्तार से बताते हुए कहा कि 700 मुनियों की रक्षा के लिए मुनि विष्णु कुमार ने अपने मुनि पद को छोड़कर श्रावक बनकर उनकी रक्षा की थी। उज्जैन नगर में एक राजा थे जो श्रवण संस्कृति को मानने वाले थे, उसके राज्य में 700 मुनियों का आगमन हुआ। मंत्रियों ने उन्हें अपमानित किया। राजा ने मंत्रियों को मुनियों के अपमान पर राज्य से निकाल दिया। वे चारों मंत्री राज्य छोड़कर हस्तिनापुर राज्य पहुंच गए। यहां उन्होंने हस्तिनापुर के राजा को विश्वास में लेकर मंत्री पद ही नहीं, इच्छित वर का भी वचन ले लिया। जब मुनि बिहार करते हुए हस्तिनापुर पहुंचे तो वह मंत्री उन मुनियों को पहचान गए और उन्होंने अपमान का बदला लेने का मन बना लिया। मंत्रियों ने 700 मुनियों पर घोर उपसर्ग करने के लिए राजा से इच्छित वर में तीन दिन का राज्य मांग लिया। तत्पश्चात उन्होंने मुनियों पर घोर उपसर्ग किया, जब मुनि विष्णु कुमार को इस उपसर्ग का पता चला तो उन्होंने अपना मुनि पद छोड़कर श्रावक का भेष धारण कर 700 मुनियों की रक्षा की थी। उस समय मुनि विष्णु कुमार ने हस्तिनापुर की जनता से कहा था कि आज के दिन रक्षा सूत्र बांधकर हमें वचन दो कि हम कभी श्रवण संस्कृति व मुनियों पर उपसर्ग नहीं होने देंगे। यही नहीं, उनकी रक्षा के लिए अपने प्राण भी न्योछावर कर देंगे। इसी श्रवण संस्कृति की रक्षा के लिए यह पर्व मनाया जाता है, साथ ही एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधकर श्रवण संस्कृति व मुनियों की रक्षा का संकल्प लिया जाता है।
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इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य अपने परिवार सहित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने मुनिश्री का आशीर्वाद लेकर उन्हें श्रीफल भेंट किया। इस दौरान सकल दिगंबर जैन समाज के हजारों श्रेष्ठीजन, प्रबुद्ध नागरिक व श्रद्धालुगण मौजूद रहे। रक्षाबंधन विधान के पावन कार्यक्रम को सफल सकुशल संपन्न कराने में ब्र. प्रदीप भैया पीयूष, मनोज भैया, अन्नू भैया व उपस्थित ब्रह्मचारी भैया व ब्रह्मचारिणी दीदी एवं समाज के नवयुवक मंडलों का सराहनीय सहयोग रहा।
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