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Lalitpur News: पढ़े-लिखों के 8.76 फीसदी वोट अवैध, कइयों ने लिखा ‘यूजीसी रोलबैक’
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झांसी। मतदाता स्नातक, लेकिन मतदान के तरीके में चूक ऐसी कि हजारों के वोट गिनती से बाहर हो गए। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक एमएलसी चुनाव में कुल पड़े 1,09,482 मतपत्रों में से 9,596 अवैध पाए गए। यानी करीब 8.76 फीसदी मतपत्रों पर दर्ज मत मान्य नहीं हुए।
किसी ने वरीयता के अंक लिखने के बजाय हस्ताक्षर कर दिए तो किसी ने टिक का निशान लगा दिया। कुछ मतपत्र खाली भी छोड़ दिए गए। दिलचस्प यह कि कुछ मतपत्रों पर ‘यूजीसी रोलबैक’ जैसे संदेश भी लिखे मिले। इस तरह कुछ मतदाताओं ने अपनी नाराजगी या मुद्दे को दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन उनके मत चुनावी गणना में शामिल नहीं हो सके।
हर 100 में नौ मतपत्र खारिज
स्नातक एमएलसी चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनाव से अलग होती है। इसमें मतदाता को उम्मीदवारों के सामने निर्धारित तरीके से अंकों में अपनी वरीयता दर्ज करनी होती है। नियमों के अनुरूप वरीयता अंकित नहीं करने पर मतपत्र अवैध हो सकता है। मतगणना के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, हर 100 में करीब नौ मतपत्र अवैध रहे। यानी हजारों मतदाताओं की पसंद वैध मतों के रूप में दर्ज ही नहीं हो सकी। इनमें नियमों के विपरीत निशान लगाने, हस्ताक्षर करने और मतपत्र खाली छोड़ने जैसे मामले शामिल रहे।
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अवैध मतों से भी कम वोट पाए 11 निर्दलीय
चुनाव में सपा और भाजपा के प्रत्याशियों के अलावा 11 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। परिणाम में इन सभी निर्दलीय प्रत्याशियों को मिले मतों की तुलना में अवैध मतपत्रों की संख्या कहीं अधिक रही। कुल 9,596 मतपत्र अवैध घोषित किए गए, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों में कोई भी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। हालांकि, अवैध मतों को किसी प्रत्याशी के पक्ष में माना नहीं जा सकता, क्योंकि इनसे मतदाताओं की वास्तविक पसंद का पता नहीं चलता।
सपा प्रत्याशी के नाम वाले निर्दलीय को 829 वोट
चुनाव में नाम की समानता भी चर्चा में रही। सपा प्रत्याशी डॉ. मान सिंह यादव के नाम से मिलते-जुलते नाम वाले निर्दलीय प्रत्याशी मान सिंह यादव को केवल 829 मत मिले। चुनाव से पहले सपा प्रत्याशी ने आरोप लगाया था कि भाजपा ने उनके वोट काटने के उद्देश्य से समान नाम वाले प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
समर्थन के बाद भी निर्दलीय को सिर्फ 66 मत
मतदान से ठीक पहले भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने वाले निर्दलीय प्रत्याशी राहुल कनकने को महज 66 मत मिले। चुनावी नतीजों में उनका प्रदर्शन चर्चा का विषय रहा।
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किसी ने वरीयता के अंक लिखने के बजाय हस्ताक्षर कर दिए तो किसी ने टिक का निशान लगा दिया। कुछ मतपत्र खाली भी छोड़ दिए गए। दिलचस्प यह कि कुछ मतपत्रों पर ‘यूजीसी रोलबैक’ जैसे संदेश भी लिखे मिले। इस तरह कुछ मतदाताओं ने अपनी नाराजगी या मुद्दे को दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन उनके मत चुनावी गणना में शामिल नहीं हो सके।
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हर 100 में नौ मतपत्र खारिज
स्नातक एमएलसी चुनाव में मतदान की प्रक्रिया सामान्य चुनाव से अलग होती है। इसमें मतदाता को उम्मीदवारों के सामने निर्धारित तरीके से अंकों में अपनी वरीयता दर्ज करनी होती है। नियमों के अनुरूप वरीयता अंकित नहीं करने पर मतपत्र अवैध हो सकता है। मतगणना के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, हर 100 में करीब नौ मतपत्र अवैध रहे। यानी हजारों मतदाताओं की पसंद वैध मतों के रूप में दर्ज ही नहीं हो सकी। इनमें नियमों के विपरीत निशान लगाने, हस्ताक्षर करने और मतपत्र खाली छोड़ने जैसे मामले शामिल रहे।
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अवैध मतों से भी कम वोट पाए 11 निर्दलीय
चुनाव में सपा और भाजपा के प्रत्याशियों के अलावा 11 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। परिणाम में इन सभी निर्दलीय प्रत्याशियों को मिले मतों की तुलना में अवैध मतपत्रों की संख्या कहीं अधिक रही। कुल 9,596 मतपत्र अवैध घोषित किए गए, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों में कोई भी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सका। हालांकि, अवैध मतों को किसी प्रत्याशी के पक्ष में माना नहीं जा सकता, क्योंकि इनसे मतदाताओं की वास्तविक पसंद का पता नहीं चलता।
सपा प्रत्याशी के नाम वाले निर्दलीय को 829 वोट
चुनाव में नाम की समानता भी चर्चा में रही। सपा प्रत्याशी डॉ. मान सिंह यादव के नाम से मिलते-जुलते नाम वाले निर्दलीय प्रत्याशी मान सिंह यादव को केवल 829 मत मिले। चुनाव से पहले सपा प्रत्याशी ने आरोप लगाया था कि भाजपा ने उनके वोट काटने के उद्देश्य से समान नाम वाले प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
समर्थन के बाद भी निर्दलीय को सिर्फ 66 मत
मतदान से ठीक पहले भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देने वाले निर्दलीय प्रत्याशी राहुल कनकने को महज 66 मत मिले। चुनावी नतीजों में उनका प्रदर्शन चर्चा का विषय रहा।