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सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहीं अनफिट बसें

Tue, 14 May 2019 01:51 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 14 May 2019 01:51 AM IST
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सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहीं अनफिट बसें
सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहीं अनफिट बसें
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ललितपुर। मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्र व कस्बा के लिए जा रहीं अधिकांश बसें नियमों को धता बता कर संचालित हो रहीं है। जहां इनके शीशे टूटे तो कुछ बसों में शीशा नहीं हैं। सीटें भी फटी हुईं हैं। इतना ही नहीं कुछ बसें विभागीय कागजों में तो फिट दिखाईं जा रहीं हैं, जबकि सड़कों पर अनफिट स्थिति में हैं।
परिवहन विभाग में पंजीकृत बसों के फिटनिस के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। इनमें नई बस के लिए आठ वर्ष तक दो वर्ष में एक बार फिटनेस कराना होती है। आठ वर्ष से अधिक पुरानी बसों को प्रत्येक वर्ष फिटनिस प्रमाण पत्र लेने का प्रावधान है। बस की स्थिति की जांच की जाती है। साथ ही वाहन के इंजन व प्रदूषण न फैले इसके लिए धुआं की जांच विशेष तौर पर की जाती है। लेकिन, बस संचालक नियमों को ताक पर रखकर इन्हें फिटनिस में पास करा लेते हैं। वाहन स्वामी फिटनिस के दौरान बसों पर नया कलर डलवा देते हैं। इसके साथ ही बाहर से वाहन की वास्तविक स्थिति पर रंग रोगन करा कर दुरुस्त कर देते हैं। जबकि बस की अंदर की स्थिति कुछ और ही होती है।
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बस के अंदर जांच की जाए तो बस की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन विभागीय कर्मचारी वाहनों को फिटनिस जांच में फिट दर्शा दिया जाता है और बसों को फिटनिस प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाता है। सड़क पर वाहनों की स्थिति कुछ और ही बनी है। जिसका नजारा मुख्यालय से ग्रामीण अंचलों की ओर सड़कों दौड़ रहीं बसों को देखने से मिलता है। यहां पर चलने वाली कुछ बसों में खिड़कियों के कांच टूटे हैं तो कुछ खिड़कियों में कांच नहीं लगे हैं। ऐसे में इन बसों में खिड़की के किनारे बच्चों को लेकर बैठने में सवारियों को भय बना रहता है। इनकी सीटें भी दुरुस्त नहीं हैं। बैठने पर कपड़े चद्दर में फंसकर तो सीटों में चपकर फट जाते हैं। वाहनों के पास गेट पर खड़ी सवारियों को पकड़ने के लिए पाइप तक नहीं लगे हैं। जबकि सवारियों को ठूंस-ठूंस कर बस में बैठाया जाता है, जब बस के अंदर सवारियां पूरी हो जाएं और बस की गैलरी भी खड़ी सवारियां परेशान होने लगे तो आने वाले यात्रियों को बस की छत पर बैठा लिया जाता है।
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ऐसे में यात्रियों का तो यात्रा करते समय भगवान ही मालिक है। इतना ही नहीं यह बसें धुआं देकर प्रदूषण फैला रहीं है। इनमें अधिकतर बसें कैरोसिन तेल से चलाई जा रहीं हैं, जिससे अधिक धुआं दे रहीं है। इन वाहनों को ओवरटेक करते समय दो पहिया वाहनों को धुआं के चलते आगे दिखाई नहीं देता है। जबकि इन बसों से कई दुर्घटनांए हो चुकीं है। इसके बावजूद इन पर लगाम नहीं लग पा रही है।


मुख्यालय से ग्रामीण अंचल को जाने वाली बसों में कुछ बसें अनफिट स्थिति में चलने की जानकारी मिली है। इसकी रुट पर जाकर जांच की जाएगी। वाहन अनफिट पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र कुमार
सहायक परिवहन अधिकारी
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