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अपने इतन के नेता संसद में केवल मेजे थपथपावे जात

Sun, 14 Apr 2019 02:11 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2019 02:11 AM IST
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अपने इतन के नेता संसद में केवल मेजे थपथपावे जात
अपने इतन के नेता संसद में केवल मेजें थपथपावे जात
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ललितपुर। लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में उतरे उम्मीदवारों के कार्यालय गली-मोहल्लों में खुल गए हैं। इससे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। वहीं, दोपहर के समय में ग्राहकी कम होने के दौरान दुकानों पर लोग सियासी चर्चा कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा नगर पालिका स्टोर के पास खाद की दुकान का रहा।
मोहल्ला तालाबपुरा निवासी महेश जैन कहते हैं कि पिछले दिन में जब टिकट की घोषणा होनें ती, तब तमाशौ देखतई बन रओतो। सब नेतन कों टिकट पावे को बुखार चढ़ आओ तो। सबखों लग रओ तो कि उनै कबे टिकट मिल पाऊत। अपने इतनके नेतन को मछली की आंख की तरा संसद की कुर्सी दिखा रइती। ई क्षेत्र के लोगन ने जिन खों भी नेता बनाकें संसद पोंचाओ, उनमें से अधिकांश ने कुर्सी पै बैठकें केवल मेजें थपथपाईं। ऐई सें क्षेत्र कौ आज तक विकास नहीं हो पाओ। मोहल्ला तालाबपुरा निवासी राजीव जैन कहते हैं कि गरीबन के बच्चन के लाजें कक्षा आठ तक की शिक्षा तौ मुफ्त करा दई, लेकिन जैसई इंटर की पढ़ाई की बारी आऊत, सोई वे बच्चा पढ़ाई छोड़त दिखात। उनके मताई, बाप के पास फीस भरवे तक को इंतजाम नहीं हो पाऊत। नई शिक्षा नीति बनावे की कइती। खूब पढ़े लिखे लोगन ने ईपे माथापच्ची करी, लेकिन हासिल कछु नहीं भओ। सरकार नई शिक्षा नीति लागू नहीं कर पाई, ईको खामियाजा बच्चन के मताई, बाप को उठाने पड़ रओ।
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मोहल्ला तालाबपुरा निवासी हरगोविंद सोनी कहते हैं कि प्राइवेट स्कूलन ने तो हद कर दई। वे तो फीस लेवे के नाम पे ऐसी चमड़ी निकार रये, जैसें उनें कोनऊ को भय नइयां। मोहल्ला तालाबपुरा निवासी सुरेश चंद्र जैन कहते हैं कि गरीबन के बच्चन को वजीफा मिल जात, लेकिन जो मध्यम वर्ग में आऊत, बेई ज्यादा पिस रहे। पीसी की पढ़ाई के लाजें आठ हजार रुपया खर्च करने पर रये। सरकारें नियम कायदे तो बनाऊतीं, लेकिन उनको पालन नहीं करा पाऊतीं। ईसें प्राइवेट स्कूल मनमानी करन लगत। प्रबंधकन ने स्कूल के नाम पै दुकानें खोल दई। वे टाई, बेल्ट, किताबें, ड्रेस सबई बिकवा रये और अधिकारी हाथ पे हाथ रखे बैठे रे जात। मताई, बाप भी का करें, वे भी बेमन से मौं मांगी फीस भर आऊत। कायके उनें तो अपने बच्चन कों शिक्षित बनाने। जा बात कोनऊ छुपी नही रई, स्वास्थ्य और शिक्षा में लूट मची है। कछुन नेतन ने नारो दओ तो कि दवाई, पढ़ाई मुफ्त हो लेकिन ऐसे नारे चुनावन में ही रे जात। इसी दौरान कानपुर से आए उमेश सिंह ट्रेन का समय नजदीक होते देख दुकान से उठ जाते हैं, जिससे चर्चा का क्रम टूट जाता है।
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