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स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करने की मांग
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स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त करने की मांग
ललितपुर। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कर बेहतर सेवाएं मुहैया कराने की मांग को लेकर जनहित स्वास्थ्य संघर्ष समिति ने जिला प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि जिला अस्पताल में बेहतर उपचार के लिए तमाम उपकरण मौजूद हो, लेकिन उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कई नौ जवानों की असमय मृत्यु हो रही है। इसके साथ ही बताया कि जिला अस्पताल में ह्रदयरोग विशेषज्ञ की कमी है। इको सुविधा चिकित्सालय में मौजूद नहीं है। इससे ह्रदयारोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में नेत्र ऑपरेशन के लिए फेको मशीन रखी धूल फांक रही है। डिजीटल एक्सरे व सीटी स्कैन को शुरू नहीं किया जा सका है। ऐसे में अधिकांश मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। जहां पर भोले-भाले मरीजों के साथ लूट खसोट की जा रही है। वहीं होम्योपैथिक अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। यहां आपातकालीन सेवाएं भी नहीं है। तो वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कमोवेश यही स्थिति आयुर्वेदिक अस्पतालों की है। इसकेे साथ ही समिति के सदस्यों ने कहा कि जिले में मेडीकल कॉलेज स्वीकृत होने के बावजूद आज तक कोई आधारशिला नहीं रखी गई है। ज्ञापन पर नवनीत किलेदार, देश प्रेमशंकर, अंकित यादव, नदीम शबनम, सुनील, जसपाल बंटी, कमल ताम्रकार, रुपम झा, जेपी दुबे, अनिल जैन, रामगोपाल अहिरवार, अखिलेश जैन आदि के हस्ताक्षर बने हैं।
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ललितपुर। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार कर बेहतर सेवाएं मुहैया कराने की मांग को लेकर जनहित स्वास्थ्य संघर्ष समिति ने जिला प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि जिला अस्पताल में बेहतर उपचार के लिए तमाम उपकरण मौजूद हो, लेकिन उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कई नौ जवानों की असमय मृत्यु हो रही है। इसके साथ ही बताया कि जिला अस्पताल में ह्रदयरोग विशेषज्ञ की कमी है। इको सुविधा चिकित्सालय में मौजूद नहीं है। इससे ह्रदयारोगियों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में नेत्र ऑपरेशन के लिए फेको मशीन रखी धूल फांक रही है। डिजीटल एक्सरे व सीटी स्कैन को शुरू नहीं किया जा सका है। ऐसे में अधिकांश मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। जहां पर भोले-भाले मरीजों के साथ लूट खसोट की जा रही है। वहीं होम्योपैथिक अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। यहां आपातकालीन सेवाएं भी नहीं है। तो वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। कमोवेश यही स्थिति आयुर्वेदिक अस्पतालों की है। इसकेे साथ ही समिति के सदस्यों ने कहा कि जिले में मेडीकल कॉलेज स्वीकृत होने के बावजूद आज तक कोई आधारशिला नहीं रखी गई है। ज्ञापन पर नवनीत किलेदार, देश प्रेमशंकर, अंकित यादव, नदीम शबनम, सुनील, जसपाल बंटी, कमल ताम्रकार, रुपम झा, जेपी दुबे, अनिल जैन, रामगोपाल अहिरवार, अखिलेश जैन आदि के हस्ताक्षर बने हैं।