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स्कूली वाहनों पर सख्त हुआ प्रशासन, ऑटो चालकों ने की हड़ताल
Updated Thu, 03 May 2018 05:44 AM IST
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स्कूली वाहनों पर सख्त हुआ प्रशासन
विरोध में ऑटो चालकों ने की हड़ताल
अभिभावकों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना
ललितपुर।
विगत रोज कुशीनगर में स्कूली बस के साथ हुई दुर्घटना के बाद शासन व प्रशासन स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर होने लगा है। इसी क्रम में बच्चों की सुरक्षा के मानकों पूरा नहीं करने वाले स्कूली वाहनों के चालान किए जा रहा है। इसी कार्रवाई के विरोध में शहर के सभी ऑटो चालकों ने एआरटीओ व यातायात पुलिस पर मनमानी करने के आरोप लगाते हुए हड़ताल पर चले गए हैं। इस हड़ताल से अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं कई बच्चे अपने स्कूल भी नहीं पहुंच सके।
गौरतलब है कि विगत रोज प्रदेश के कुशीनगर में स्कूली बस के ट्रेन की चपेट में आने से हुई बड़ी दुर्घटना के मद्देनजर शासन के निर्देशन पर बच्चों की सुरक्षा के मानक पूरा नहीं करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ एआरटीओ सत्येंद्र कुमार व यातायात पुलिस द्वारा संयुक्त रुप से कार्रवाई की जा रही है। शहर के ऑटो चालक एआरटीओ व यातायात पुलिस पर कार्रवाई नाम पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए बुधवार की सुबह से हड़ताल पर चले गए हैं। यह हड़ताल केवल स्कूली बच्चों के लिए रही। स्कूली ऑटो चालकों के हड़ताल पर चले जाने से अभिभावकों व बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर क्षेत्र में हिंदी व अंग्रेजी दोनों माध्यम के एक सैंकड़ा से अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। सभी विद्यालय में पढ़ने वाले 80 प्रतिशत बच्चे अपने घरों से स्कूल तक जाने के लिए ऑटो का इस्तेमाल करते हैं। ऑटो के हड़ताल पर जाने की बजह से सुबह-सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने में अभिभावकों को काफी उठानी पड़ी इसके साथ ही दोपहर वापस लाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं कई बच्चे तो स्कूल ही नहीं पहुंच पाए और उनका पढ़ाई का नुक्सान हुआ। हड़ताल पर गए ऑटो चालकों का आरोप है कि अफसर कार्रवाई के नाम पर केवल मनमानी कर रहे हैं। यदि ऑटो में दो-तीन बच्चे भी बैठे हुए हैं तो उनके भी चालन किए जा रहे हैं। चालन भी दस हजार रुप से लेकर बीस हजार रुपए तक किए जा रहे हैं, इतनी तो ऑटो चालकों की कमाई ही नहीं है।
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अभिभावकों की जेब पर डलेगा डाका
यदि एक ऑटो में मानक के अनुसार केवल चार ही बच्चे जाते हैं जो इससे सबसे ज्यादा नुक्सान अभिभावकों को पढ़ता है। ऑटो चालक तक अपना किराया अभिभावक से ही बसूलेगें। विगत चार वर्ष पूर्व तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी व एआरटीओ सोमलता यादव ने ऑटो चालकों व अभिभावकों की परिस्थितियों को देखते हुए एक ऑटो में आठ स्कूली बच्चों की अनुमति दे दी थी। लेकिन ऑटो में बच्चों की सुरक्षा के लिए जाली लगाने, बैग रखने का स्टैंड आदि मानक पूरे करने के निर्णय दिए थे। इसके बावजूद भी शहर के अधिकाश ऑटो चालक अपनी अधिक कमाई के लालच में बच्चों की सुरक्षा को दरकिनार करते हुए आठ की जगह एक दर्जन तक बच्चों को ऑटो में भूसे की तरह भरे रहते हैं।
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मनमानी के खिलाफ कर रहे हड़ताल
कार्रवाई के नाम पर एआरटीओ व या तायात पुलिस द्वारा मनमानी की जा रही है। ऐसी ऑटो के भी चालन किए गए हैं जिसमें दो-तीन बच्चे बैठे होने पर भी 10-10 हजार के चालन कर दिए गए हैं। एक ऑटो में केवल तीन-चार बच्चे ही छोड़ना संभव नहीं है, इससे अभिभावकों को भी अधिक किराया अदा करना होगा। उनकी मांगे हैं कि एक ऑटो में 08 बच्चों की अनुमति दी जाए और अनावश्यक ऑटो चालकों को परेशान नहीं किया जाए। सुरक्षा को लेकर तय मानकों को पूरा करने के लिए सभी ऑटो चालक सहमत हैं।
-गौतम रानू यादव
अध्यक्ष, टैक्सी यूनियन ललितपुर।
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यह है मानक
एआरटीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शासन द्वारा स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए मानक तय किए गए हैं। इन मानकों को पूरा नहीं करने वाले ऑटो चालकों के चालन किए जा रहे हैं।
-स्कूल ऑटो का संबंधित स्कूल से अनुबंध होना चाहिए।
-ऑटो में छह से अधिक बच्चे नहीं बैठे होना चाहिए।
-ऑटो का रंग स्कूली वाहनों की तरह पीला होना चाहिए।
-आटो में दोनों ओर बच्चों की सुरक्षा के लिए जाली लगी होनी चाहिए।
-आटो में स्कूल का नाम भी लिखा होना चाहिए, जिससे उसका अनुबंध है।
-जिस विद्यालय का अनुबंध है, उसी विद्यालय के बच्चे होने चाहिए।
-ऑटो चालकों का बर्दी में होना अनिवार्य है।
-ऑटो चालक के पास अपना ड्राइविंग लाइसेंस समेत समस्त दस्तोवज होने चाहिए।
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विरोध में ऑटो चालकों ने की हड़ताल
अभिभावकों को करना पड़ रहा परेशानी का सामना
ललितपुर।
विगत रोज कुशीनगर में स्कूली बस के साथ हुई दुर्घटना के बाद शासन व प्रशासन स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर होने लगा है। इसी क्रम में बच्चों की सुरक्षा के मानकों पूरा नहीं करने वाले स्कूली वाहनों के चालान किए जा रहा है। इसी कार्रवाई के विरोध में शहर के सभी ऑटो चालकों ने एआरटीओ व यातायात पुलिस पर मनमानी करने के आरोप लगाते हुए हड़ताल पर चले गए हैं। इस हड़ताल से अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, वहीं कई बच्चे अपने स्कूल भी नहीं पहुंच सके।
गौरतलब है कि विगत रोज प्रदेश के कुशीनगर में स्कूली बस के ट्रेन की चपेट में आने से हुई बड़ी दुर्घटना के मद्देनजर शासन के निर्देशन पर बच्चों की सुरक्षा के मानक पूरा नहीं करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ एआरटीओ सत्येंद्र कुमार व यातायात पुलिस द्वारा संयुक्त रुप से कार्रवाई की जा रही है। शहर के ऑटो चालक एआरटीओ व यातायात पुलिस पर कार्रवाई नाम पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए बुधवार की सुबह से हड़ताल पर चले गए हैं। यह हड़ताल केवल स्कूली बच्चों के लिए रही। स्कूली ऑटो चालकों के हड़ताल पर चले जाने से अभिभावकों व बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर क्षेत्र में हिंदी व अंग्रेजी दोनों माध्यम के एक सैंकड़ा से अधिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। सभी विद्यालय में पढ़ने वाले 80 प्रतिशत बच्चे अपने घरों से स्कूल तक जाने के लिए ऑटो का इस्तेमाल करते हैं। ऑटो के हड़ताल पर जाने की बजह से सुबह-सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने में अभिभावकों को काफी उठानी पड़ी इसके साथ ही दोपहर वापस लाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं कई बच्चे तो स्कूल ही नहीं पहुंच पाए और उनका पढ़ाई का नुक्सान हुआ। हड़ताल पर गए ऑटो चालकों का आरोप है कि अफसर कार्रवाई के नाम पर केवल मनमानी कर रहे हैं। यदि ऑटो में दो-तीन बच्चे भी बैठे हुए हैं तो उनके भी चालन किए जा रहे हैं। चालन भी दस हजार रुप से लेकर बीस हजार रुपए तक किए जा रहे हैं, इतनी तो ऑटो चालकों की कमाई ही नहीं है।
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अभिभावकों की जेब पर डलेगा डाका
यदि एक ऑटो में मानक के अनुसार केवल चार ही बच्चे जाते हैं जो इससे सबसे ज्यादा नुक्सान अभिभावकों को पढ़ता है। ऑटो चालक तक अपना किराया अभिभावक से ही बसूलेगें। विगत चार वर्ष पूर्व तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी व एआरटीओ सोमलता यादव ने ऑटो चालकों व अभिभावकों की परिस्थितियों को देखते हुए एक ऑटो में आठ स्कूली बच्चों की अनुमति दे दी थी। लेकिन ऑटो में बच्चों की सुरक्षा के लिए जाली लगाने, बैग रखने का स्टैंड आदि मानक पूरे करने के निर्णय दिए थे। इसके बावजूद भी शहर के अधिकाश ऑटो चालक अपनी अधिक कमाई के लालच में बच्चों की सुरक्षा को दरकिनार करते हुए आठ की जगह एक दर्जन तक बच्चों को ऑटो में भूसे की तरह भरे रहते हैं।
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मनमानी के खिलाफ कर रहे हड़ताल
कार्रवाई के नाम पर एआरटीओ व या तायात पुलिस द्वारा मनमानी की जा रही है। ऐसी ऑटो के भी चालन किए गए हैं जिसमें दो-तीन बच्चे बैठे होने पर भी 10-10 हजार के चालन कर दिए गए हैं। एक ऑटो में केवल तीन-चार बच्चे ही छोड़ना संभव नहीं है, इससे अभिभावकों को भी अधिक किराया अदा करना होगा। उनकी मांगे हैं कि एक ऑटो में 08 बच्चों की अनुमति दी जाए और अनावश्यक ऑटो चालकों को परेशान नहीं किया जाए। सुरक्षा को लेकर तय मानकों को पूरा करने के लिए सभी ऑटो चालक सहमत हैं।
-गौतम रानू यादव
अध्यक्ष, टैक्सी यूनियन ललितपुर।
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यह है मानक
एआरटीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शासन द्वारा स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा के लिए मानक तय किए गए हैं। इन मानकों को पूरा नहीं करने वाले ऑटो चालकों के चालन किए जा रहे हैं।
-स्कूल ऑटो का संबंधित स्कूल से अनुबंध होना चाहिए।
-ऑटो में छह से अधिक बच्चे नहीं बैठे होना चाहिए।
-ऑटो का रंग स्कूली वाहनों की तरह पीला होना चाहिए।
-आटो में दोनों ओर बच्चों की सुरक्षा के लिए जाली लगी होनी चाहिए।
-आटो में स्कूल का नाम भी लिखा होना चाहिए, जिससे उसका अनुबंध है।
-जिस विद्यालय का अनुबंध है, उसी विद्यालय के बच्चे होने चाहिए।
-ऑटो चालकों का बर्दी में होना अनिवार्य है।
-ऑटो चालक के पास अपना ड्राइविंग लाइसेंस समेत समस्त दस्तोवज होने चाहिए।