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विद्यालयों में नहीं हो रही फर्नीचर की आपूर्ति, अफसर सुस्त
Updated Thu, 09 Aug 2018 05:48 AM IST
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विद्यालयों में नहीं हो रही फर्नीचर की आपूर्ति
- जून तक पूरा किया जाना था काम, लेकिन नहीं को सकी शुरुआत
- नमूना पास होने के बाद भी नहीं की जा रही आपूर्ति, अफसर बेपरवाह
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गर्मियों का अवकाश समाप्त होने से पहले जनपद के कुल 95 परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराना था। आपूर्ति किए जाने वाले फर्नीचर का नमूना पास होने के बाद अभी तक आपूर्ति की शुरुआत भी नहीं हो सकी है। बच्चों को अभी भी जमीन पर बैठना पड़ रहा है। इस सबके बावजूद जिला बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस ओर सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को जमीन पर बैठकर न पढ़ाना पढ़े इसके लिए प्रदेश सरकार इस सत्र में जनपद के 95 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को फर्नीचर उपलब्ध करा रही है। शासन की मंशा थी कि 1 जुलाई को ग्रीष्म कालीन अवकाश समाप्त होने के बाद जब बच्चे विद्यालय पहुंचे तो उनको फर्नीचर उपहार में मिलें और वह फर्नीचर पर बैठक कर नए जोश के साथ पढ़ाई कर सके। लेकिन जनपद में विभाग के अफसरों की उदासीनता की वजह से शासन की मंशा पूरी नहीं हो सकी है। मजबूरन बच्चों को जमीन पर बैठना कर ही पढ़ाना पड़ रहा है। निर्धारित समय गुजरने के बाद भी इस ओर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व जिला शिक्षा समिति के आलाधिकारी उदासीन बने हुए हैं। फर्नीचर की आपूर्ति के लिए जनपद स्तर पर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया आयोजित कर झांसी की एक फर्म को विद्यालयों में फर्नीचर आपूर्ति के लिए अप्रैल माह में आदेश जारी कर दिए गए थे। मई माह में आपूर्ति किए जाने वाले फर्नीचर का नमूना भी शिक्षा विभाग की समिति द्वारा पास कर दिया गया था। जून माह के अंत तक चयनित विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति की जानी थी, लेकिन किसी भी विद्यालय में फर्नीचर आपूर्ति की शुरुआत भी नहीं हो सकी है। इसके खिलाफ संबंधित अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है। अभी तक विभागीय अधिकारियों द्वारा अपूर्ति करने वाली फर्म को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है।
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चयनित विद्यालयों में भेजेे जाएंगी 35-35 कुर्सी-टेबिल
योजना के तहत जनपद के कुल 95 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए शासन से करीब 1.48 करोड़ धनराशि की स्वीकृति मिली थी। आपूर्ति के लिए फर्म का ठेका 1.44 करोड़ में हुआ था। चयनित प्रत्येक विद्यालय में 35-35 फर्नीचर (कुर्सी-टेबिल) उपलब्ध कराए जाने हैं। इस हिसाब से सभी 95 विद्यालयों में कुल 3,325 फर्नीचर उपलब्ध कराया जाना है। इसमें बार क्षेत्र के 13, बिरधा क्षेत्र के 14, महरौनी क्षेत्र के 15, मड़ावरा क्षेत्र के 15, तालबेहट क्षेत्र के 20, जखौरा क्षेत्र 15 और नगर क्षेत्र 03 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति की जानी है।
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टेंडर हो सकता है निरस्त
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर यदि फर्म आपूर्ति नहीं करती है, तो उसका टेंडर निरस्त किया जा सकता है। यहां तक समय सीमा को बीते हुए एक माह से अधिक समय बीत गया है और फर्नीचर आपूर्ति की शुरुआत भी नहीं की गई है। समिति चाहे तो यह टेंडर निरस्त करके नई टेंडर प्रक्रिया अपना सकती है, या फिर नियमानुसार दूसरी कम बोली वाली फर्म को आपूर्ति के आदेश दे सकती है।
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बीएसए बोले, देंगे नोटिस
इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मायाराम का कहना है कि अब नोटिस जारी करेंगे। जबकि समय सीमा को बीते हुए करीब डेढ़ माह होने वाला है और अभी तक आपूर्ति की शुरुआत नहीं हुई है। नोटिस देने की कार्रवाई तो विभागीय अधिकारियों को पहले ही कर देनी थी। अधिकारियों की इस उदासीनता का खामियाजा बच्चों को भुगताना पड़ रहा है।
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- जून तक पूरा किया जाना था काम, लेकिन नहीं को सकी शुरुआत
- नमूना पास होने के बाद भी नहीं की जा रही आपूर्ति, अफसर बेपरवाह
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गर्मियों का अवकाश समाप्त होने से पहले जनपद के कुल 95 परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराना था। आपूर्ति किए जाने वाले फर्नीचर का नमूना पास होने के बाद अभी तक आपूर्ति की शुरुआत भी नहीं हो सकी है। बच्चों को अभी भी जमीन पर बैठना पड़ रहा है। इस सबके बावजूद जिला बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस ओर सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को जमीन पर बैठकर न पढ़ाना पढ़े इसके लिए प्रदेश सरकार इस सत्र में जनपद के 95 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को फर्नीचर उपलब्ध करा रही है। शासन की मंशा थी कि 1 जुलाई को ग्रीष्म कालीन अवकाश समाप्त होने के बाद जब बच्चे विद्यालय पहुंचे तो उनको फर्नीचर उपहार में मिलें और वह फर्नीचर पर बैठक कर नए जोश के साथ पढ़ाई कर सके। लेकिन जनपद में विभाग के अफसरों की उदासीनता की वजह से शासन की मंशा पूरी नहीं हो सकी है। मजबूरन बच्चों को जमीन पर बैठना कर ही पढ़ाना पड़ रहा है। निर्धारित समय गुजरने के बाद भी इस ओर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व जिला शिक्षा समिति के आलाधिकारी उदासीन बने हुए हैं। फर्नीचर की आपूर्ति के लिए जनपद स्तर पर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया आयोजित कर झांसी की एक फर्म को विद्यालयों में फर्नीचर आपूर्ति के लिए अप्रैल माह में आदेश जारी कर दिए गए थे। मई माह में आपूर्ति किए जाने वाले फर्नीचर का नमूना भी शिक्षा विभाग की समिति द्वारा पास कर दिया गया था। जून माह के अंत तक चयनित विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति की जानी थी, लेकिन किसी भी विद्यालय में फर्नीचर आपूर्ति की शुरुआत भी नहीं हो सकी है। इसके खिलाफ संबंधित अधिकारियों द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है। अभी तक विभागीय अधिकारियों द्वारा अपूर्ति करने वाली फर्म को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है।
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चयनित विद्यालयों में भेजेे जाएंगी 35-35 कुर्सी-टेबिल
योजना के तहत जनपद के कुल 95 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए शासन से करीब 1.48 करोड़ धनराशि की स्वीकृति मिली थी। आपूर्ति के लिए फर्म का ठेका 1.44 करोड़ में हुआ था। चयनित प्रत्येक विद्यालय में 35-35 फर्नीचर (कुर्सी-टेबिल) उपलब्ध कराए जाने हैं। इस हिसाब से सभी 95 विद्यालयों में कुल 3,325 फर्नीचर उपलब्ध कराया जाना है। इसमें बार क्षेत्र के 13, बिरधा क्षेत्र के 14, महरौनी क्षेत्र के 15, मड़ावरा क्षेत्र के 15, तालबेहट क्षेत्र के 20, जखौरा क्षेत्र 15 और नगर क्षेत्र 03 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर की आपूर्ति की जानी है।
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टेंडर हो सकता है निरस्त
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर यदि फर्म आपूर्ति नहीं करती है, तो उसका टेंडर निरस्त किया जा सकता है। यहां तक समय सीमा को बीते हुए एक माह से अधिक समय बीत गया है और फर्नीचर आपूर्ति की शुरुआत भी नहीं की गई है। समिति चाहे तो यह टेंडर निरस्त करके नई टेंडर प्रक्रिया अपना सकती है, या फिर नियमानुसार दूसरी कम बोली वाली फर्म को आपूर्ति के आदेश दे सकती है।
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बीएसए बोले, देंगे नोटिस
इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मायाराम का कहना है कि अब नोटिस जारी करेंगे। जबकि समय सीमा को बीते हुए करीब डेढ़ माह होने वाला है और अभी तक आपूर्ति की शुरुआत नहीं हुई है। नोटिस देने की कार्रवाई तो विभागीय अधिकारियों को पहले ही कर देनी थी। अधिकारियों की इस उदासीनता का खामियाजा बच्चों को भुगताना पड़ रहा है।