{"_id":"5eceb9818ebc3e902b0f8005","slug":"36-crors-fund-uncleared-in-wheat-trading-lalitpur-news-jhs1676884146","type":"story","status":"publish","title_hn":"गेहूं खरीद की 36 करोड़ रुपये की देनदारी निभागों पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गेहूं खरीद की 36 करोड़ रुपये की देनदारी निभागों पर
विज्ञापन
ललितपुर। जिले में गेहूं खरीद में भुगतान की समस्या दिनोंदिन गहराती जा रही है। इस समय किसानों का 3639.195 लाख रुपये बकाया है। इससे किसानों का गेहूं खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने का मोहभंग होता जा रहा है।
जिला प्रशासन ने करीब एक सैकड़ा गेहूं क्रय केंद्रों की स्थापना की है। इन पर 1925 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीदा जा रहा है। नियमत: सात दिन में किसानों की खरीदी उपज का भुगतान होना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में यह संभव नहीं हो पा रहा है। किसानों को उपज बेचने के बाद भुगतान के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे अब किसानों ने गल्ला मंडी व मिलों पर गेहूं बेचना आरंभ कर दिया है।
अकेले पीसीएफ ने 56 केंद्रों पर 3842 किसानों से 23715.546 मीट्रिक टन गेहूं पैंतालीस करोड़ पैंसठ लाख रुपये में खरीदा है। इसमें से बाइस करोड़ पैंतीस लाख रुपये का ही भुगतान किसानों को किया जा सका। वर्तमान में 23 करोड़ रुपये का बकाया बना हुआ है। अन्य संस्थाओं का कुल मिलाकर 3639.195 लाख (36 करोड़ रुपये से अधिक) का किसानों का बकाया हो गया है। इस कारण किसानों अब गेहूं बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
विज्ञापन
इतना है लक्ष्य
जिले में 92,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद की जानी है, जिसके सापेक्ष 45,294.89 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। जबकि पिछले वर्ष 57.920.20 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हो चुकी थी। इस तरह पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार की गेहूं खरीद पिछड़ती दिख रही है। वर्तमान में खरीद का प्रतिशत 48.97 है।
बारदाना व तौल में फंसा किसान
कई केंद्रों पर किसानों को बारदाना और तुलाई की समस्या से जूझना पड़ रहा है। टोकन नंबर लगने के बाद भी कई किसानों की उपज की तौल नहीं हो पा रही है। इससे उन्हें क्रय केंद्रों पर कई दिन व रातें गुजारनी पड़ रही हैं।
पंद्रह करोड़ रुपये के बिल एफसीआई में लगा दिए गए हैं। उन्होंने शीघ्र ही बकाया भुगतान होने की बात कही है।
- रमेश कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक सहकारिता
विज्ञापन
जिला प्रशासन ने करीब एक सैकड़ा गेहूं क्रय केंद्रों की स्थापना की है। इन पर 1925 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीदा जा रहा है। नियमत: सात दिन में किसानों की खरीदी उपज का भुगतान होना चाहिए, लेकिन मौजूदा समय में यह संभव नहीं हो पा रहा है। किसानों को उपज बेचने के बाद भुगतान के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे अब किसानों ने गल्ला मंडी व मिलों पर गेहूं बेचना आरंभ कर दिया है।
विज्ञापन
अकेले पीसीएफ ने 56 केंद्रों पर 3842 किसानों से 23715.546 मीट्रिक टन गेहूं पैंतालीस करोड़ पैंसठ लाख रुपये में खरीदा है। इसमें से बाइस करोड़ पैंतीस लाख रुपये का ही भुगतान किसानों को किया जा सका। वर्तमान में 23 करोड़ रुपये का बकाया बना हुआ है। अन्य संस्थाओं का कुल मिलाकर 3639.195 लाख (36 करोड़ रुपये से अधिक) का किसानों का बकाया हो गया है। इस कारण किसानों अब गेहूं बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
विज्ञापन
इतना है लक्ष्य
जिले में 92,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद की जानी है, जिसके सापेक्ष 45,294.89 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है। जबकि पिछले वर्ष 57.920.20 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हो चुकी थी। इस तरह पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार की गेहूं खरीद पिछड़ती दिख रही है। वर्तमान में खरीद का प्रतिशत 48.97 है।
बारदाना व तौल में फंसा किसान
कई केंद्रों पर किसानों को बारदाना और तुलाई की समस्या से जूझना पड़ रहा है। टोकन नंबर लगने के बाद भी कई किसानों की उपज की तौल नहीं हो पा रही है। इससे उन्हें क्रय केंद्रों पर कई दिन व रातें गुजारनी पड़ रही हैं।
पंद्रह करोड़ रुपये के बिल एफसीआई में लगा दिए गए हैं। उन्होंने शीघ्र ही बकाया भुगतान होने की बात कही है।
- रमेश कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक सहकारिता