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दस सालों से ठंडे बस्ते में पड़ा शहजाद नदी पुल का प्रस्ताव
Updated Thu, 27 Sep 2018 01:16 AM IST
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शहजाद नदी पुल का प्रस्ताव दस सालों से ठंडे बस्ते में
गोविंद सागर बांध खुलने से पुल हो जाता है जलमग्न
राज्य सेतु निगम कर चुका है सर्वे, नहीं मिली है मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर के बीच से निकली शहजाद नदी के पुल को ऊंचा नहीं किया जा रहा है। जब भी गोविंद सागर बांध के गेट खुलते हैं, तब नदी का पुल जल मग्न हो जाता है। इससे वाहनों का आवागमन प्रभावित हो जाता है। राज्य सेतु निगम ने इस ओर ध्यान देते हुए इसका सर्वे का किया था लेकिन प्रस्ताव को आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी।
एक छोर पर स्थापित गोविंद सागर बांध से शहजाद नदी निकली हुई है जो शहर के बीच से होकर गुजरती है। जिस पर तीन पुल बने हुए हैं, इनमें से दो पुल काफी पुराने हो गए हैं। पंचमुखी मंदिर के पास बना पुल तो हाल ही में बांध से छोड़े गए पानी में बह गया। इसके कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। वहीं, नदीपुरा स्थित पुल काफी नीचा है। जब गोविंद सागर बांध से अतिरिक्त पानी की निकासी की जाती है तो पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है। बीते दिनों ऐसा ही हुआ जब बांध से पानी छोड़ा गया तो नदी पुल के ऊपर से पानी बहने लगा। अब जब बांध के गेट बंद हो गए हैं तो पुल के आसपास कचरा जमा हो गया है। पुल की अधिकांश द्वारी कचरा से चोक हो गई हैं। इससे पुल के बहने का खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि फिर जोरदार बारिश होती है तो बांध के गेट खुल जाएंगे। ऐसे में नदी पुल की द्वारियों से पानी निकलना मुश्किल हो जाएगा और दबाव की स्थिति बनने पर पुल के ढहने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इससे थोड़े से आगे एक और पुल बना हुआ है जिसकी ऊंचाई भी कम है। बारिश के सीजन में जब बांध के गेट खुलते हैं तो यह पुल भी डूब जाता है। स्थानीय लोगों को इस पुल का ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा है। उधर, श्री गुरु सिंह महासभा के पूर्व महामंत्री गुरवचन सिंह ने बताया कि वर्ष 2008 में राज्य सेतु निगम ने शहजाद नदी के पुल को ऊंचा करने के लिए उद्देश्य से सर्वे कराया था। इस दौरान डा. आरसी साहू के मकान से लेकर नागपुर बांबे ट्रांसपोर्ट तक पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार हुआ था, लेकिन बजट के अभाव में प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद इस पुल की किसी ने सुध नहीं ली है। पुल लगातार कमजोर होता जा रहा है। यदि पुल के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया तो पंचमुखी मंदिर के पास बने पुल की तरह यह पुल भी ढह जाएगा।
नदी में छोड़ा जा रहा गंदा पानी
शहर के बीच से शहजाद नदी निकली हुई है। इसके आसपास घनी बस्ती हो गई है, जिसका गंदा पानी नाले के माध्यम से नदी में पहुंच रहा है। इससे नदी साफ सुथरी नहीं रह पा रही है।
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हरविंदर सलूजा, समाजसेवी
.....
एक ओर स्वच्छता का शोर देश भर में है। वहीं, शहजाद नदी की साफ-सफाई पर किसी का ध्यान नहीं है। बीते महीनों में इसकी सफाई कराई गई थी लेकिन बांध के खुलने के बाद एक बार फिर गंदगी इकट्ठी हो गई है। कुछ लोगों ने इसमें कचरा डालना भी शुरू कर दिया है।
लतीफ बाबा
चोक द्वारियों को कराया जाए साफ
शहजाद नदी की कई द्वारियां कचरे से चोक हो गई हैं। इसके बाद भी द्वारियों में फंसे कचरे को नहीं हटाया जा रहा है। यही नहीं, नदी किनारे खड़े झाड़ झकड़ के पास भी कचरा एकत्रित हो गया है।
संतोष जैन
नदी किनारे ही बना दिया शौचालय
शहजाद नदी की कई द्वारियां चोक हो गई हैं। वहीं, नदी किनारे शौचालय का निर्माण करा दिया गया है। एक समय था जब बांध के गेट खुलते थे तो नदी पुल पर कम ही पानी रहता था लेकिन अब नदी का पानी काफी आगे जाने लगा है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई हैं।
जगजीत सिंह
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गोविंद सागर बांध खुलने से पुल हो जाता है जलमग्न
राज्य सेतु निगम कर चुका है सर्वे, नहीं मिली है मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर के बीच से निकली शहजाद नदी के पुल को ऊंचा नहीं किया जा रहा है। जब भी गोविंद सागर बांध के गेट खुलते हैं, तब नदी का पुल जल मग्न हो जाता है। इससे वाहनों का आवागमन प्रभावित हो जाता है। राज्य सेतु निगम ने इस ओर ध्यान देते हुए इसका सर्वे का किया था लेकिन प्रस्ताव को आज तक मंजूरी नहीं मिल सकी।
एक छोर पर स्थापित गोविंद सागर बांध से शहजाद नदी निकली हुई है जो शहर के बीच से होकर गुजरती है। जिस पर तीन पुल बने हुए हैं, इनमें से दो पुल काफी पुराने हो गए हैं। पंचमुखी मंदिर के पास बना पुल तो हाल ही में बांध से छोड़े गए पानी में बह गया। इसके कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया। वहीं, नदीपुरा स्थित पुल काफी नीचा है। जब गोविंद सागर बांध से अतिरिक्त पानी की निकासी की जाती है तो पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है। बीते दिनों ऐसा ही हुआ जब बांध से पानी छोड़ा गया तो नदी पुल के ऊपर से पानी बहने लगा। अब जब बांध के गेट बंद हो गए हैं तो पुल के आसपास कचरा जमा हो गया है। पुल की अधिकांश द्वारी कचरा से चोक हो गई हैं। इससे पुल के बहने का खतरा उत्पन्न हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि फिर जोरदार बारिश होती है तो बांध के गेट खुल जाएंगे। ऐसे में नदी पुल की द्वारियों से पानी निकलना मुश्किल हो जाएगा और दबाव की स्थिति बनने पर पुल के ढहने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। इससे थोड़े से आगे एक और पुल बना हुआ है जिसकी ऊंचाई भी कम है। बारिश के सीजन में जब बांध के गेट खुलते हैं तो यह पुल भी डूब जाता है। स्थानीय लोगों को इस पुल का ज्यादा फायदा नहीं मिल पा रहा है। उधर, श्री गुरु सिंह महासभा के पूर्व महामंत्री गुरवचन सिंह ने बताया कि वर्ष 2008 में राज्य सेतु निगम ने शहजाद नदी के पुल को ऊंचा करने के लिए उद्देश्य से सर्वे कराया था। इस दौरान डा. आरसी साहू के मकान से लेकर नागपुर बांबे ट्रांसपोर्ट तक पुल बनाने का प्रस्ताव तैयार हुआ था, लेकिन बजट के अभाव में प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद इस पुल की किसी ने सुध नहीं ली है। पुल लगातार कमजोर होता जा रहा है। यदि पुल के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया तो पंचमुखी मंदिर के पास बने पुल की तरह यह पुल भी ढह जाएगा।
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नदी में छोड़ा जा रहा गंदा पानी
शहर के बीच से शहजाद नदी निकली हुई है। इसके आसपास घनी बस्ती हो गई है, जिसका गंदा पानी नाले के माध्यम से नदी में पहुंच रहा है। इससे नदी साफ सुथरी नहीं रह पा रही है।
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हरविंदर सलूजा, समाजसेवी
.....
एक ओर स्वच्छता का शोर देश भर में है। वहीं, शहजाद नदी की साफ-सफाई पर किसी का ध्यान नहीं है। बीते महीनों में इसकी सफाई कराई गई थी लेकिन बांध के खुलने के बाद एक बार फिर गंदगी इकट्ठी हो गई है। कुछ लोगों ने इसमें कचरा डालना भी शुरू कर दिया है।
लतीफ बाबा
चोक द्वारियों को कराया जाए साफ
शहजाद नदी की कई द्वारियां कचरे से चोक हो गई हैं। इसके बाद भी द्वारियों में फंसे कचरे को नहीं हटाया जा रहा है। यही नहीं, नदी किनारे खड़े झाड़ झकड़ के पास भी कचरा एकत्रित हो गया है।
संतोष जैन
नदी किनारे ही बना दिया शौचालय
शहजाद नदी की कई द्वारियां चोक हो गई हैं। वहीं, नदी किनारे शौचालय का निर्माण करा दिया गया है। एक समय था जब बांध के गेट खुलते थे तो नदी पुल पर कम ही पानी रहता था लेकिन अब नदी का पानी काफी आगे जाने लगा है। इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई हैं।
जगजीत सिंह