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बार में 24 गांवों के किसान नहर के पानी से वंचित
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खस्ता हाल पड़ी नहर
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर/बार। गोविंद सागर बांध की दायी नहर से 52 किमी की जगह सिर्फ 32 किलोमीटर के एरिया में ही पानी पहुंच पा रहा है। इस कारण विकासखंड बार के करीब 24 गांवों के किसान नहर के पानी से वंचित हैं। किसानों का आरोप है कि हर साल सैकड़ों एकड़ भूमि पानी के अभाव में सूखी रह जाती है। वहीं, क्षेत्रीय किसानों ने एक प्रार्थना पत्र प्रधानमंत्री को भी भेजा है।
गोविंद सागर बांध से 52 किलोमीटर की सिंचाई का लक्ष्य रखकर दायीं नहर बनाई गई थी। उस दौरान दस हजार आठ सौ बीस हेक्टेयर क्षेत्र में नहर से सिंचाई होती थी। धीरे-धीरे किसानों का जुड़ाव नहर के जरिए सिंचाई से हुआ तो बंजर भूमि खेतों में बदल गई। इससे आसपास के क्षेत्रों में खेती का रकबा बढ़ गया। वर्तमान में करीब उन्नीस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नहर के पानी से सिंचाई हो रही है। इससे टेल के किसानों को पानी मिलना बंद हो गया। अब नहर का पानी बत्तीस किलोमीटर के दायरे में ही पहुंचता है। इससे क्षेत्र के बार, धमना, पुलवारा, ठाठखेरा, बस्तगुवां, हनुपुरा, हीरापुर, गड़िया, बम्होरीखडैत, मथुरा सेमरा, गेदौरा, तुरका, दसरारा, बछरावनी, भावनी, खेरा कठवर, धनगौल, लड़वारी,पारौन, संसुआ, बघोरा, ककरेला आदि गांव में सिंचाई की समस्या हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, अब नहर का भी पानी करीब दो दर्जन गांवों में नहीं पहुंचता है। जिस क्षेत्र में नहर में पानी नहीं पहुंचता है, वहां दबंगों ने कब्जा करना आरंभ कर दिया है। विभाग ने नहर पर पत्थर की पटिया से जो चुनाई की थी, उन्हें लोगों ने चोरी कर इमारती पत्थर के रूप में इस्तेमाल करना आरंभ कर दिया है। किसान निरंतर 25 वर्षों से सिंचाई के पानी की मांग करते चले आ रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने किसानों को झूठे आश्वासन देकर वोट हासिल किए। इसके बाद पलटकर नहीं देखा। क्षेत्रीय किसानों ने एक प्रार्थना पत्र प्रधानमंत्री को भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि इस क्षेत्र के किसानों को 2022 तक समृद्ध बनाना है तो क्षेत्र में सर्वप्रथम सिंचाई की व्यवस्था करनी होगी।
32 किलोमीटर के एरिया में ही पानी पहुंच पा रहा है। कृषि की सघनता से ऐसा हुआ है। जो नहरों का पानी लीकेज हो रहा है, उसे रोकने के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। लीकेज का पानी रुकते ही आगे तक पानी पहुंचने लगेगा।
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मनमोहन सिंह, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
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गोविंद सागर बांध से 52 किलोमीटर की सिंचाई का लक्ष्य रखकर दायीं नहर बनाई गई थी। उस दौरान दस हजार आठ सौ बीस हेक्टेयर क्षेत्र में नहर से सिंचाई होती थी। धीरे-धीरे किसानों का जुड़ाव नहर के जरिए सिंचाई से हुआ तो बंजर भूमि खेतों में बदल गई। इससे आसपास के क्षेत्रों में खेती का रकबा बढ़ गया। वर्तमान में करीब उन्नीस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नहर के पानी से सिंचाई हो रही है। इससे टेल के किसानों को पानी मिलना बंद हो गया। अब नहर का पानी बत्तीस किलोमीटर के दायरे में ही पहुंचता है। इससे क्षेत्र के बार, धमना, पुलवारा, ठाठखेरा, बस्तगुवां, हनुपुरा, हीरापुर, गड़िया, बम्होरीखडैत, मथुरा सेमरा, गेदौरा, तुरका, दसरारा, बछरावनी, भावनी, खेरा कठवर, धनगौल, लड़वारी,पारौन, संसुआ, बघोरा, ककरेला आदि गांव में सिंचाई की समस्या हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, अब नहर का भी पानी करीब दो दर्जन गांवों में नहीं पहुंचता है। जिस क्षेत्र में नहर में पानी नहीं पहुंचता है, वहां दबंगों ने कब्जा करना आरंभ कर दिया है। विभाग ने नहर पर पत्थर की पटिया से जो चुनाई की थी, उन्हें लोगों ने चोरी कर इमारती पत्थर के रूप में इस्तेमाल करना आरंभ कर दिया है। किसान निरंतर 25 वर्षों से सिंचाई के पानी की मांग करते चले आ रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने किसानों को झूठे आश्वासन देकर वोट हासिल किए। इसके बाद पलटकर नहीं देखा। क्षेत्रीय किसानों ने एक प्रार्थना पत्र प्रधानमंत्री को भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि इस क्षेत्र के किसानों को 2022 तक समृद्ध बनाना है तो क्षेत्र में सर्वप्रथम सिंचाई की व्यवस्था करनी होगी।
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32 किलोमीटर के एरिया में ही पानी पहुंच पा रहा है। कृषि की सघनता से ऐसा हुआ है। जो नहरों का पानी लीकेज हो रहा है, उसे रोकने के लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। लीकेज का पानी रुकते ही आगे तक पानी पहुंचने लगेगा।
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मनमोहन सिंह, अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड