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योग सही तरह से जीने का विज्ञान है, इसे दैनिक जीवन में करें शामिल
Updated Sun, 11 Feb 2018 04:12 AM IST
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योग को दैनिक जीवन में करें शामिल
ललितपुर।
पहलवान गुरुदीन स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय पनारी में राष्ट्रीय सेवा योजन कार्यक्रम के तहत चल रहें सात दिवसीय विशेष शिविर के पांचवें दिन छात्राओं को योग के बारे में बताया गया और योगाभ्यास कराया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए महाविद्यालय के संस्थापक पारसनाथ यादव ने छात्राओं को योग और उसके लाभों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि महार्षि पतंजलि ने योग को आठ अंगों में बांटा है। पतंजली को अष्टांगयोग को तीसरे स्थान पर रखा गया है और उन्होंने आसन को बहुत ही सरल तरीके से प्रभासित किया है। कोई भी शरीर मुद्रा जो लंबे समय तक बनाए रखा जा सके। योग के विभिन्न योगग्रंथों में 32 आसनों का जिक्र किया है। सिद्धासन, पद्मासन, भद्रासन, मुक्तानसन, वज्रासन, गोमुखासन, वीरासन, धनुरासन, संकटासन, मयूरासन, कुक्कुाटासन, कूर्मासन, उत्तनमंडूकासन आदि आसनो के बारे में और प्रत्येक आसन से होने वाले लाभों के बारे में बताया। प्राचार्या डॉ. सूफिया ने बताया कि योग कोई धर्म नहीं है यह जीने की एक कला है, जिसका लक्ष्य स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मन शरीर में स्वस्थ मन। मनुष्य का अस्तित्व शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक है, योेग इन तीनों के संतुलित विकास में मदद करता है। व्यायाम के अन्य रुप जैसे एरोबिक्स, शारीरिक, तंदरुस्ती को ही सुनिश्चित करतें है। उन्होंने कहा कि योग सही तरह से जीने का विज्ञान है, इसे सभी को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। यह व्यक्तियों के सभी पहलुओं पर काम करता है, भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक योग का अर्थ बताते हए कहा कि योग एकता का बांधना है। योग अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, पाचन विकार और बीमारियो में चिकित्सा के एक सफल विकल्प है। योग करने के 30 मिनट बाद तक कुछ ना खाए एक घंटे तक स्नान न करें। योगासन के अंत में हमेशा श्वासन करें। इस मौके पर महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. सूर्यनाथ यादव, डा. वंदना याज्ञिक, अलका यादव, अनिष्का नायक, दीपिका जैन, प्रवेश यादव, रजनी यादव, प्रीति शुक्ला, नसीम खान, पंकज सेन उपस्थित रहें।
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ललितपुर।
पहलवान गुरुदीन स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय पनारी में राष्ट्रीय सेवा योजन कार्यक्रम के तहत चल रहें सात दिवसीय विशेष शिविर के पांचवें दिन छात्राओं को योग के बारे में बताया गया और योगाभ्यास कराया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए महाविद्यालय के संस्थापक पारसनाथ यादव ने छात्राओं को योग और उसके लाभों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि महार्षि पतंजलि ने योग को आठ अंगों में बांटा है। पतंजली को अष्टांगयोग को तीसरे स्थान पर रखा गया है और उन्होंने आसन को बहुत ही सरल तरीके से प्रभासित किया है। कोई भी शरीर मुद्रा जो लंबे समय तक बनाए रखा जा सके। योग के विभिन्न योगग्रंथों में 32 आसनों का जिक्र किया है। सिद्धासन, पद्मासन, भद्रासन, मुक्तानसन, वज्रासन, गोमुखासन, वीरासन, धनुरासन, संकटासन, मयूरासन, कुक्कुाटासन, कूर्मासन, उत्तनमंडूकासन आदि आसनो के बारे में और प्रत्येक आसन से होने वाले लाभों के बारे में बताया। प्राचार्या डॉ. सूफिया ने बताया कि योग कोई धर्म नहीं है यह जीने की एक कला है, जिसका लक्ष्य स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मन शरीर में स्वस्थ मन। मनुष्य का अस्तित्व शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक है, योेग इन तीनों के संतुलित विकास में मदद करता है। व्यायाम के अन्य रुप जैसे एरोबिक्स, शारीरिक, तंदरुस्ती को ही सुनिश्चित करतें है। उन्होंने कहा कि योग सही तरह से जीने का विज्ञान है, इसे सभी को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। यह व्यक्तियों के सभी पहलुओं पर काम करता है, भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक योग का अर्थ बताते हए कहा कि योग एकता का बांधना है। योग अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, पाचन विकार और बीमारियो में चिकित्सा के एक सफल विकल्प है। योग करने के 30 मिनट बाद तक कुछ ना खाए एक घंटे तक स्नान न करें। योगासन के अंत में हमेशा श्वासन करें। इस मौके पर महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. सूर्यनाथ यादव, डा. वंदना याज्ञिक, अलका यादव, अनिष्का नायक, दीपिका जैन, प्रवेश यादव, रजनी यादव, प्रीति शुक्ला, नसीम खान, पंकज सेन उपस्थित रहें।
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