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खतौनी के साथ मिलेगा जमीन का नक्शा
Updated Sun, 13 Aug 2017 01:49 AM IST
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अब खतौनी के साथ मिलेगा जमीन का नक्शा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। भू-स्वामियों को अब अपनी जमीन का मानचित्र पाने के लिए राजस्व अधिकारियों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्व परिषद के निर्देश पर किसानों खतौनी के साथ नक्शों की कॉपी भी मिल सकेगी। जनपद में 754 गांवों खतौनी के साथ नक्शों उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरूकर दी गई है। जबकि, पहले चरण में 115 गांवों में इसके लिए अंश निर्धारण किया जा रहा है।
जनपद में कुल 754 गांव में किसानों को आए दिन तहसील व एनआईसी सेंटरों नकल व खतौनी तो आसानी से उपलब्ध हो जाती है, लेकिन अब शीघ्र ही किसानों को खतौनी के साथ उस जमीन का नक्शा भी प्राप्त हो सकेगा। इसके लिए भू-स्वामियों के लिए राजस्व अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राजस्व परिषद के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा किसानों की खतौनी के साथ जमीन का नक्शा भी अटैच कराया जा रहा है। यही नहीं रिकॉर्ड रुम से नक्शों की सर्टीफाईड कॉपी दिलाने की भी व्यवस्था शुरु हो रही है। ऐसे में अब भू-स्वामियों के लिए खतौनी पाने के लिए आवेदन करने पर स्कैन और डिजिटाज्ड नक्शों की कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। राजस्व परिषद के निर्देश पर इसका कार्य भी तेजी के साथ शुरु कर दिया गया है। तहसीलदार अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि जिला के सभी गांवों में राजस्व नक्शों के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। इस काम को क्रम पूर्वक कराया जा रहा है। इसके लिए लेखपालों और कानूनगो को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शासन की मंशानुरुप यह कार्य शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।
खातेदारों की स्थिति होगी साफ
राजस्व परिषद के निर्देश पर हर छठवें साल खतौनी का अंश निर्धारण यानि नई खतौनी तैयार की जाती है। इसमें गाटा संख्या, ग्राम पंचायत कोड और जमीन के मालिकाना हक की जानकारी अंकित होती है। लेकिन, अब नई खतौनी के साथ जहां उस जमीन का नक्शा उपलब्ध कराया जाएगा, वहीं हर एक खातेदार के हिस्से में कितनी जमीन है, यह भी अलग-अलग स्पष्ट रुप से दर्शाया जाएगा। इससे काफी हद तक विवाद की स्थिति से भी आसानी से निपटा जा सकेगा।
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किसानों को मिलेगा लाभ
राजस्व नक्शों के डिजिटलाइजेशन होने से पूरा डाटा जिले की और राजस्व परिषद की वेबसाइट से लिंक करा दिया जाएगा। ऐसा होने के बाद कोई भी व्यक्ति कलेक्ट्रेट स्थित रिकॉर्ड रुम में बाबुओं के चक्कर लगाए बिना ही ऑनलाइन नक्शा पा सकेगा। इसके लिए उन्हें कोई फीस भी नहीं देनी होगी और न ही दलालों के झांसे में फंसना पड़ेगा। सर्टिफाइड नक्शे की कॉपी की जरुरत होगी तो इसके लिए वह जिला स्तर पर बने सेंटर पर जाकर भी नक्शा प्राप्त कर सकेगा।
खतौनी के साथ प्रिंट होगा नक्शा
वर्तमान में खतौनी में सिर्फ गाटा संख्या, ग्राम पंचायत का कोड और जमीन के मालिकाना हक की जानकारी होती है। लेकिन, ये काम पूरा हो जाने के बाद खतौनी के साथ जमीन का नक्शा भी प्रिंट होगा। इसके अलावा व्यक्ति जिले की और राजस्व परिषद की वेबसाइट पर भी जाकर दिए गए कॉलम में खसरा संख्या डालकर जमीन की हकीकत भी जान सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। भू-स्वामियों को अब अपनी जमीन का मानचित्र पाने के लिए राजस्व अधिकारियों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्व परिषद के निर्देश पर किसानों खतौनी के साथ नक्शों की कॉपी भी मिल सकेगी। जनपद में 754 गांवों खतौनी के साथ नक्शों उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरूकर दी गई है। जबकि, पहले चरण में 115 गांवों में इसके लिए अंश निर्धारण किया जा रहा है।
जनपद में कुल 754 गांव में किसानों को आए दिन तहसील व एनआईसी सेंटरों नकल व खतौनी तो आसानी से उपलब्ध हो जाती है, लेकिन अब शीघ्र ही किसानों को खतौनी के साथ उस जमीन का नक्शा भी प्राप्त हो सकेगा। इसके लिए भू-स्वामियों के लिए राजस्व अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राजस्व परिषद के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा किसानों की खतौनी के साथ जमीन का नक्शा भी अटैच कराया जा रहा है। यही नहीं रिकॉर्ड रुम से नक्शों की सर्टीफाईड कॉपी दिलाने की भी व्यवस्था शुरु हो रही है। ऐसे में अब भू-स्वामियों के लिए खतौनी पाने के लिए आवेदन करने पर स्कैन और डिजिटाज्ड नक्शों की कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी। राजस्व परिषद के निर्देश पर इसका कार्य भी तेजी के साथ शुरु कर दिया गया है। तहसीलदार अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि जिला के सभी गांवों में राजस्व नक्शों के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। इस काम को क्रम पूर्वक कराया जा रहा है। इसके लिए लेखपालों और कानूनगो को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शासन की मंशानुरुप यह कार्य शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।
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खातेदारों की स्थिति होगी साफ
राजस्व परिषद के निर्देश पर हर छठवें साल खतौनी का अंश निर्धारण यानि नई खतौनी तैयार की जाती है। इसमें गाटा संख्या, ग्राम पंचायत कोड और जमीन के मालिकाना हक की जानकारी अंकित होती है। लेकिन, अब नई खतौनी के साथ जहां उस जमीन का नक्शा उपलब्ध कराया जाएगा, वहीं हर एक खातेदार के हिस्से में कितनी जमीन है, यह भी अलग-अलग स्पष्ट रुप से दर्शाया जाएगा। इससे काफी हद तक विवाद की स्थिति से भी आसानी से निपटा जा सकेगा।
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किसानों को मिलेगा लाभ
राजस्व नक्शों के डिजिटलाइजेशन होने से पूरा डाटा जिले की और राजस्व परिषद की वेबसाइट से लिंक करा दिया जाएगा। ऐसा होने के बाद कोई भी व्यक्ति कलेक्ट्रेट स्थित रिकॉर्ड रुम में बाबुओं के चक्कर लगाए बिना ही ऑनलाइन नक्शा पा सकेगा। इसके लिए उन्हें कोई फीस भी नहीं देनी होगी और न ही दलालों के झांसे में फंसना पड़ेगा। सर्टिफाइड नक्शे की कॉपी की जरुरत होगी तो इसके लिए वह जिला स्तर पर बने सेंटर पर जाकर भी नक्शा प्राप्त कर सकेगा।
खतौनी के साथ प्रिंट होगा नक्शा
वर्तमान में खतौनी में सिर्फ गाटा संख्या, ग्राम पंचायत का कोड और जमीन के मालिकाना हक की जानकारी होती है। लेकिन, ये काम पूरा हो जाने के बाद खतौनी के साथ जमीन का नक्शा भी प्रिंट होगा। इसके अलावा व्यक्ति जिले की और राजस्व परिषद की वेबसाइट पर भी जाकर दिए गए कॉलम में खसरा संख्या डालकर जमीन की हकीकत भी जान सकता है।