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समरसता छलकाते कलश के धारक थे संत गाडगे
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समरसता छलकाते कलश के धारक थे संत गाडगे
ललितपुर। श्री दीपचंद्र चौधरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में संत गाडगे की जयंती मनाई गई। संस्थापक कमलेश चौधरी ने उनके चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन करते हुए कहा कि स्वयं अशिक्षित होते हुए बाबा गाडगे ने जन-जन तक अनिवार्य और नि:शुल्क शिक्षा के द्वार खोले। प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि आजादी के संग्राम के महानायक गांधी का संघर्ष सिर्फ राजनीतिक आजादी तक ही सीमित नहीं था। गांधीजी के इस महा-यज्ञ में अपनी आहुति में स्वच्छता और शिक्षा के प्रसार करने में गाडगेजी का योगदान याद करने के लायक है। वे साफ-साफ कहते थे कि ‘पैसा नही है तो खाने की थाली तोड़ दो । हाथ पर रोटी-चटनी रखकर खाओ । कम कीमत का कपड़ा पहनो पर पढ़ने जरूर जाओ। अपने इसी विचार दर्शन का अमृत वे अपने माटी की गागर में करूणा के सागर के रूप में आजीवन छलकाते रहे और मानव एकता और भाईचारे की संजीवनी पिलाते रहे। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर ने उन्हें निष्काम कर्म योगी कहा। प्रो. जीदासने कहा कि उनके भजन और कीर्तन महाराष्ट्र की जनता के कंठहार हैं। प्रो. राकेश राजन ने गोष्ठी का संचालन किया। इस दौरान प्रबंध निदेशक प्रदीप चौधरी, प्रवीण चौधरी, आदित्य मिश्रा, केपी कोरी, अभिषेक रावत, राकेश राजन, प्रणय तिवारी, पुष्पेन्द्र वर्मा, सुरेन्द्र साहू, अंशुल जैन, महेन्द्र झां, कामिनी जैन, प्रज्ञा सिसौदिया, मयूरी शर्मा, यासमीन जहां, सुमिता पाण्डेय, अन्नू जैन, यशिका जैन, राखी वर्मा, दीपिका वर्मा, रजनी, सम्पूर्णा जैन, सुनील कुमार, शुभम नामदेव, नीलेश नामदेव मौजूद रहे।
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ललितपुर। श्री दीपचंद्र चौधरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार में संत गाडगे की जयंती मनाई गई। संस्थापक कमलेश चौधरी ने उनके चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन करते हुए कहा कि स्वयं अशिक्षित होते हुए बाबा गाडगे ने जन-जन तक अनिवार्य और नि:शुल्क शिक्षा के द्वार खोले। प्रोफेसर भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि आजादी के संग्राम के महानायक गांधी का संघर्ष सिर्फ राजनीतिक आजादी तक ही सीमित नहीं था। गांधीजी के इस महा-यज्ञ में अपनी आहुति में स्वच्छता और शिक्षा के प्रसार करने में गाडगेजी का योगदान याद करने के लायक है। वे साफ-साफ कहते थे कि ‘पैसा नही है तो खाने की थाली तोड़ दो । हाथ पर रोटी-चटनी रखकर खाओ । कम कीमत का कपड़ा पहनो पर पढ़ने जरूर जाओ। अपने इसी विचार दर्शन का अमृत वे अपने माटी की गागर में करूणा के सागर के रूप में आजीवन छलकाते रहे और मानव एकता और भाईचारे की संजीवनी पिलाते रहे। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर ने उन्हें निष्काम कर्म योगी कहा। प्रो. जीदासने कहा कि उनके भजन और कीर्तन महाराष्ट्र की जनता के कंठहार हैं। प्रो. राकेश राजन ने गोष्ठी का संचालन किया। इस दौरान प्रबंध निदेशक प्रदीप चौधरी, प्रवीण चौधरी, आदित्य मिश्रा, केपी कोरी, अभिषेक रावत, राकेश राजन, प्रणय तिवारी, पुष्पेन्द्र वर्मा, सुरेन्द्र साहू, अंशुल जैन, महेन्द्र झां, कामिनी जैन, प्रज्ञा सिसौदिया, मयूरी शर्मा, यासमीन जहां, सुमिता पाण्डेय, अन्नू जैन, यशिका जैन, राखी वर्मा, दीपिका वर्मा, रजनी, सम्पूर्णा जैन, सुनील कुमार, शुभम नामदेव, नीलेश नामदेव मौजूद रहे।