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गोविंद सागर बांध पर सैलानियों के लिए सुविधाओं का टोटा
Updated Tue, 28 Aug 2018 01:25 AM IST
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गोविंद सागर बांध पर सैलानियों के लिए सुविधाओं का टोटा
- पर्यटकों के बैठने लिए सही व्यवस्था तक नहीं
- देखरेख के अभाव में तलहटी में बना पार्क हो गया तहस-नहस
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बांधों के जिले के नाम से मशहूर जनपद में बारिश के मौसम में गोविंद सागर बांध की सैर करने पहुंच रहे सैलानियों को सुविधाओं की कमी खल रही है। यहां उनके बैठने के लिए सही व्यवस्था तक नहीं है। बांध पर रोशनी के लिए खंभे तो लगाए गए हैं, लेकिन लाइट नहीं लगने से शाम होते ही यहां अंधेरा पसर जाता है। वहीं, तलहटी में बना पार्क भी देखरेख के अभाव में तहस-नहस हो गया है।
ललितपुर जिले में पुरातत्व एवं पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। यहां राजघाट बांध, माताटीला बांध, शहजाद बांध, जामनी बांध, सजनाम बांध, रोहिणी बांध, गोविंद सागर, उटारी बांध, बंडई बांध, भावनी बांध, कचनौंदा बांध हैं। बारिश के मौसम में इन बांधों पर सैलानियों की आवाजाही बढ़ जाती है। वर्तमान में सैलानियों को बांधों पर सुविधाओं की कमी खल रही है। विशेषकर गोविंद सागर बांध पर सैलानियों के लिए नाम मात्र की सुविधाएं नहीं हैं। यहां शाम के समय पर्याप्त रोशनी के लिए बिजली के खंभे लगाए गए हैं। जिन पर अभी तक बिजली के उपकरण नहीं लगाए जा सके हैं। बांध की तलहटी में वर्षों पहले एक पार्क बनाया गया था जो अब देखरेख के अभाव में पूरी तरह नष्ट हो गया है। एक दो रिसक पट्टी दिखाई देती हैं जो क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। यदि कोई बांध पर दो पल सुकून से गुजारना चाहे तो उनके लिए कोई छांव की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा प्रसाधन का भी इंतजाम नहीं है। सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। यहां सुरक्षा की दृष्टि से चौकी बनाई गई है। इसके बाद भी असामाजिक तत्व सक्रिय बने रहते हैं। जिससे किसी अनहोनी होने का अंदेशा बना रहता है। कोई भी व्यक्ति कहीं भी चला जाता है कुछ लोगों ने बांध के अंदर पानी के करीब जाने के लिए रास्ता बना लिया है। जिसे राजघाट निर्माण खंड के कर्मियों ने अभी तक बंद नहीं कराया है। बांध से भारी वाहनों की आवाजाही पर अंकुश लगाने के लिए गेट बनवाया गया था जो किसी ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। अब विभागीय कर्मचारी उसे दोबारा लगवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। वैसे तो सलूस के पास आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन लोग बेरोकटोक यहां चले जाते हैं। पानी के तेज बहाव के बाद भी कई युवा तो यहां से सेल्फी खींचते हैं। जबकि यहां के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में थोड़ी सी चूूक जिंदगी पर भारी सकती है। उधर राजघाट बांध की सड़क पर भी गड्ढों में तब्दील हो गई है। कचनौदा बांध की तलहटी में बने पार्क पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे सैलानियों को मायूसी हाथ लग रही है।
.....
सुविधाओं के लिए भेजा गया एस्टीमेट
बांध पर प्रसाधन की सुविधा मुहैया कराने के लिए एस्टीमेट भेज दिया गया है। वहीं, पार्क बनाने के लिए बारिश के बाद सर्वे कराया जाएगा।
विकास दीप भारती
अवर अभियंता
राजघाट निर्माण खंड
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- पर्यटकों के बैठने लिए सही व्यवस्था तक नहीं
- देखरेख के अभाव में तलहटी में बना पार्क हो गया तहस-नहस
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बांधों के जिले के नाम से मशहूर जनपद में बारिश के मौसम में गोविंद सागर बांध की सैर करने पहुंच रहे सैलानियों को सुविधाओं की कमी खल रही है। यहां उनके बैठने के लिए सही व्यवस्था तक नहीं है। बांध पर रोशनी के लिए खंभे तो लगाए गए हैं, लेकिन लाइट नहीं लगने से शाम होते ही यहां अंधेरा पसर जाता है। वहीं, तलहटी में बना पार्क भी देखरेख के अभाव में तहस-नहस हो गया है।
ललितपुर जिले में पुरातत्व एवं पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। यहां राजघाट बांध, माताटीला बांध, शहजाद बांध, जामनी बांध, सजनाम बांध, रोहिणी बांध, गोविंद सागर, उटारी बांध, बंडई बांध, भावनी बांध, कचनौंदा बांध हैं। बारिश के मौसम में इन बांधों पर सैलानियों की आवाजाही बढ़ जाती है। वर्तमान में सैलानियों को बांधों पर सुविधाओं की कमी खल रही है। विशेषकर गोविंद सागर बांध पर सैलानियों के लिए नाम मात्र की सुविधाएं नहीं हैं। यहां शाम के समय पर्याप्त रोशनी के लिए बिजली के खंभे लगाए गए हैं। जिन पर अभी तक बिजली के उपकरण नहीं लगाए जा सके हैं। बांध की तलहटी में वर्षों पहले एक पार्क बनाया गया था जो अब देखरेख के अभाव में पूरी तरह नष्ट हो गया है। एक दो रिसक पट्टी दिखाई देती हैं जो क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। यदि कोई बांध पर दो पल सुकून से गुजारना चाहे तो उनके लिए कोई छांव की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा प्रसाधन का भी इंतजाम नहीं है। सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। यहां सुरक्षा की दृष्टि से चौकी बनाई गई है। इसके बाद भी असामाजिक तत्व सक्रिय बने रहते हैं। जिससे किसी अनहोनी होने का अंदेशा बना रहता है। कोई भी व्यक्ति कहीं भी चला जाता है कुछ लोगों ने बांध के अंदर पानी के करीब जाने के लिए रास्ता बना लिया है। जिसे राजघाट निर्माण खंड के कर्मियों ने अभी तक बंद नहीं कराया है। बांध से भारी वाहनों की आवाजाही पर अंकुश लगाने के लिए गेट बनवाया गया था जो किसी ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। अब विभागीय कर्मचारी उसे दोबारा लगवाने में लापरवाही बरत रहे हैं। वैसे तो सलूस के पास आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन लोग बेरोकटोक यहां चले जाते हैं। पानी के तेज बहाव के बाद भी कई युवा तो यहां से सेल्फी खींचते हैं। जबकि यहां के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में थोड़ी सी चूूक जिंदगी पर भारी सकती है। उधर राजघाट बांध की सड़क पर भी गड्ढों में तब्दील हो गई है। कचनौदा बांध की तलहटी में बने पार्क पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिससे सैलानियों को मायूसी हाथ लग रही है।
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सुविधाओं के लिए भेजा गया एस्टीमेट
बांध पर प्रसाधन की सुविधा मुहैया कराने के लिए एस्टीमेट भेज दिया गया है। वहीं, पार्क बनाने के लिए बारिश के बाद सर्वे कराया जाएगा।
विकास दीप भारती
अवर अभियंता
राजघाट निर्माण खंड