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गेहूं खरीद में किसानों को 20 करोड़ का भुगतान अटका
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ललितपुर। जिले में गेहूं खरीद परवान नहीं चढ़ रही है। कहीं बारदानें की समस्या है तो कहीं भुगतान अटका हुआ है। पीसीएफ पर किसानों का बीस करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, मल्टीस्टेट कंपनियों के भुगतान में समस्या आ रही है। इससे किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।
जनपद में एक सैकड़ा से अधिक गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं, लेकिन इन केंद्रों पर बारदानें की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। वहीं, खरीदे गए गेहूं के उठान की समस्या बनी हुई है। कई केंद्रों पर गोदाम गेहूं से भर गए हैं। जिससे गेहूं खरीद गति नहीं पकड़ पा रही है। इसके अलावा पीसीएफ अधिकारियों की लापरवाही से किसानों का भुगतान अटककर रह गया है। किसानों का करीब बीस करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। यदि इसमें मल्टीस्टेट कंपनियों के भुगतान को जोड़ लिया जाए तो धनराशि बढ़कर करीब अट्ठाइस करोड़ पहुंच रही है।
खरीद पर नजर डालें तो पीसीएफ को साठ हजार पांच सौ मीट्रिक टन गेहूं खरीदना है, इसके सापेक्ष लगभग पंद्रह हजार मीट्रिक टन गेहूं 2197 किसानों से खरीदा जा सका हैं। उधर, शासन ने पीसीएफ के जिला प्रबंधक की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए निलंबित कर दिया है। उनके स्थान पर क्षेत्रीय प्रबंधक को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सहकारी समितियों को सौ गांठें बारदानें की उपलब्ध कराई गई हैं। इससे खरीद बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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समितियों ने लक्ष्य के सापेक्ष पच्चीस प्रतिशत खरीद कर ली है। सौ गांठें वारदाने की भी प्राप्त हो गई हैं। वर्तमान में पीसीएफ का बीस करोड़ रुपये का भुगतान अवशेष है।
- रमेश कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक, सहकारिता
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जनपद में एक सैकड़ा से अधिक गेहूं खरीद केंद्र खोले गए हैं, लेकिन इन केंद्रों पर बारदानें की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। वहीं, खरीदे गए गेहूं के उठान की समस्या बनी हुई है। कई केंद्रों पर गोदाम गेहूं से भर गए हैं। जिससे गेहूं खरीद गति नहीं पकड़ पा रही है। इसके अलावा पीसीएफ अधिकारियों की लापरवाही से किसानों का भुगतान अटककर रह गया है। किसानों का करीब बीस करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। यदि इसमें मल्टीस्टेट कंपनियों के भुगतान को जोड़ लिया जाए तो धनराशि बढ़कर करीब अट्ठाइस करोड़ पहुंच रही है।
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खरीद पर नजर डालें तो पीसीएफ को साठ हजार पांच सौ मीट्रिक टन गेहूं खरीदना है, इसके सापेक्ष लगभग पंद्रह हजार मीट्रिक टन गेहूं 2197 किसानों से खरीदा जा सका हैं। उधर, शासन ने पीसीएफ के जिला प्रबंधक की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए निलंबित कर दिया है। उनके स्थान पर क्षेत्रीय प्रबंधक को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। सहकारी समितियों को सौ गांठें बारदानें की उपलब्ध कराई गई हैं। इससे खरीद बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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समितियों ने लक्ष्य के सापेक्ष पच्चीस प्रतिशत खरीद कर ली है। सौ गांठें वारदाने की भी प्राप्त हो गई हैं। वर्तमान में पीसीएफ का बीस करोड़ रुपये का भुगतान अवशेष है।
- रमेश कुमार गुप्ता, सहायक निबंधक, सहकारिता