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1984 से ही ललितपुर में आंदोलन की पड़ गई थी नींव
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ललितपुर। श्रीराम मंदिर आंदोलन सात अक्तूबर 1984 से शुरू हुआ था, उस दिन अयोध्या में सरयू तट पर विश्व हिंदू परिषद द्वारा संकल्प लिया था कि जब तक श्रीराम जन्म भूमि को मुक्त नहीं करा लेते, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। इस अवसर पर प्रदेश और देश के दो लाख राम भक्त पहुंचे थे। इसमें ललितपुर से 15 राम भक्त पहुंचे थे।
इन रामभक्तों में केहर सिंह बुंदेला जिला संगठन मंत्री, छक्कीलाल साहू, रघुवीर सोनी के पिता महेंद्र सोनी, नाराहट, देवीदास साहू तालाबपुरा शामिल थे। एकात्मकता यात्रा से पहले विश्व हिंदू परिषद ललितपुर के अध्यक्ष रमाकांत मालवीय, रामदास गुप्ता और अयोध्या प्रसाद कुशवाहा थे। इसके बाद जिला कार्यकारिणी सदाशिव शुक्ल, महंत अमावस गिरि महाराज, रामविलास हुंडैत, प्रेमनारायण सोनी, किशोरी शरण लिटौरिया, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, डॉ. अरविंद कुमार जैन, जगदीश नारायण चौबे एडवोकेट, रमेशचंद्र राठौर, हरिशंकर दुबे, रघुवीर शरण सोनी आदि को शामिल किया गया। जिले में आंदोलन का माहौल बनने लगा। इसमें मुख्य भूमिका वीरेंद्र सिंह जिला प्रचारक, पूर्व विधायक रणवीर सिंह यादव, केएल मालवीय निभा रहे थे।
केहर सिंह बुंदेला ने बताया कि आठ अक्तूबर से रथ यात्रा अयोध्या से लखनऊ के लिए चली, इसका संचालन अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, परमहंस रामचंद्र दास, महंत नृत्य गोपाल दास, परमानंद, ऋतंभरा, जगतगुरु शंकराचार्य गण सैकड़ों साधु संत चल रहे थे। गांव-गांव में नर- नारी स्वागत कर रहे थे, एक दिन में 25 किलोमीटर चलते थे। रथ यात्रा का दृश्य ऐसा प्रतीत होता था, जैसे श्रीरामजी ही साथ चल रहे हों। गांव- गांव में कीर्तन, गीत, सभाएं होती थीं और जयकारे लगाए जाते थे। इस दौरान ललितपुर के श्रीराम भक्तों में आंदोलन के प्रति जोश देखते ही बनता था।
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इन रामभक्तों में केहर सिंह बुंदेला जिला संगठन मंत्री, छक्कीलाल साहू, रघुवीर सोनी के पिता महेंद्र सोनी, नाराहट, देवीदास साहू तालाबपुरा शामिल थे। एकात्मकता यात्रा से पहले विश्व हिंदू परिषद ललितपुर के अध्यक्ष रमाकांत मालवीय, रामदास गुप्ता और अयोध्या प्रसाद कुशवाहा थे। इसके बाद जिला कार्यकारिणी सदाशिव शुक्ल, महंत अमावस गिरि महाराज, रामविलास हुंडैत, प्रेमनारायण सोनी, किशोरी शरण लिटौरिया, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, डॉ. अरविंद कुमार जैन, जगदीश नारायण चौबे एडवोकेट, रमेशचंद्र राठौर, हरिशंकर दुबे, रघुवीर शरण सोनी आदि को शामिल किया गया। जिले में आंदोलन का माहौल बनने लगा। इसमें मुख्य भूमिका वीरेंद्र सिंह जिला प्रचारक, पूर्व विधायक रणवीर सिंह यादव, केएल मालवीय निभा रहे थे।
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केहर सिंह बुंदेला ने बताया कि आठ अक्तूबर से रथ यात्रा अयोध्या से लखनऊ के लिए चली, इसका संचालन अशोक सिंघल, महंत अवैद्यनाथ, परमहंस रामचंद्र दास, महंत नृत्य गोपाल दास, परमानंद, ऋतंभरा, जगतगुरु शंकराचार्य गण सैकड़ों साधु संत चल रहे थे। गांव-गांव में नर- नारी स्वागत कर रहे थे, एक दिन में 25 किलोमीटर चलते थे। रथ यात्रा का दृश्य ऐसा प्रतीत होता था, जैसे श्रीरामजी ही साथ चल रहे हों। गांव- गांव में कीर्तन, गीत, सभाएं होती थीं और जयकारे लगाए जाते थे। इस दौरान ललितपुर के श्रीराम भक्तों में आंदोलन के प्रति जोश देखते ही बनता था।
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