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शिक्षा के मंदिर नहीं पहुंच सके 188 बच्चे

Wed, 02 Nov 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 02 Nov 2016 01:19 AM IST
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188 children of the temple could not education
education, lalitpur news - फोटो : demo
 रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 188 बच्चे अभी भी स्कूल से दूर हैं, जिन्हें नामांकित कराने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
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परिषदीय शिक्षा के प्रति बच्चों को लुभाने के लिए तमाम कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें मिड-डे मील, नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें व यूनिफार्म शामिल हैं। शैक्षिक सत्र के शुभारंभ पर स्कूल चलो अभियान को जोरशोर से चलाया गया था। इस दौरान रैली, गोष्ठी एवं घर-घर संपर्क स्थापित कर बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराया गया। इसकी हकीकत तक पहुंचने के लिए डोर टू डोर सर्वे कराया गया। इसमें पाया कि 188 बच्चों को शिक्षा के मंदिर से नहीं जोड़ा जा सका है। सबसे ज्यादा 60 बच्चे घर से कार्यों में लगे हुए हैं। इसके अलावा 24 बच्चे अपने भाई, बहनों की देखभाल कर रहे हैं। सभी चिह्नित बच्चों को स्कूलों में नामांकित कराने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। नामांकन के पश्चात कक्षा पाठ्यक्रम से पिछड़े बच्चों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस तरह शत प्रतिशत बच्चों को स्कूलों में नामांकित कराने की विभागीय मंशा पूरी हो जाएगी।


सर्वेयर को नजर नहीं आते कबाड़ बीनने वाले बच्चे
परिवार सर्वेक्षण में 188 बच्चों को चिह्नित कर भले ही सर्वेयर अपनी पीठ थपथपा रहे हो, पर सर्वे के आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खा रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट में सर्वेयर को एक भी बच्चा कबाड़ बीनते हुए नहीं मिला है। इसी तरह घरेलू नौकर, ईट भट्ठा, खदान, छोटे होटल, गैराज व पुश्तैनी दश्तकारी का काम करते नहीं दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह है कि जब भी विद्यालयों में बच्चों की कम उपस्थिति की बात आती है तो अध्यापक व अधिकारी तपाक से कृषि कार्य में बच्चों के लगे की बात कहकर इस समस्या से पल्ला झाड़ लेते हैँ। लेकिन, हाल ही में कराए गए परिवार सर्वेक्षण में सर्वेयरों को एक भी बच्चा कृषि व्यवसाय में कार्य करते हुए नहीं मिला। इससे स्पष्ट है कि या तो सर्वे रिपोर्ट बोगस है या फिर बच्चों की कम उपस्थिति के मामले में अध्यापक व अधिकारी झूठी बयानबाजी करते हैं। यह विभाग में चर्चा का विषय बन गया है।
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