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नोटा को मिलें अधिक वोट तो छह साल चुनाव न लड़ें हारे प्रत्याशी

Thu, 11 Oct 2018 02:20 AM IST
Updated Thu, 11 Oct 2018 02:20 AM IST
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नोटा को मिलें अधिक वोट तो छह साल चुनाव न लड़ें हारे प्रत्याशी
‘नोटा को मिलें अधिक वोट तो छह साल चुनाव न लड़ें’
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विभिन्न संगठनों का संवाद कार्यक्रम का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
जाखलौन (ललितपुर)। एसोसिएशन और डेमोक्रेटिक रिफार्म (एडीआर), यूपी इलेक्शन वॉच तथा सामाजिक संस्था साई ज्योति की संयुक्त पहल पर चुनाव सुधार और सहरिया जन अधिकार मंच के साथ संवाद का कार्यक्रम जाखलौन स्थित नगर पंचायत सभागार में हुआ। इसमें सहमति से चार प्रस्ताव पारित किए गए। एडीआर यूपी इलेक्शन वॉच के प्रदेश समन्वयक अनिल शर्मा ने कहा कि पिछले तीन दशक से सभी राजनीतिक दलों में बाहुबली, दागी एवं धनवली प्रत्याशियों की बाढ़ आ गयी है जिसके कारण प्रत्येक राजनैतिक दल में कर्मठ और ईमानदार किन्तु गरीब टिकिट के दावेदार हाशिये पर चले गये हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को शपथ पत्र के जरिये अपने प्रत्याशियों से उनका आपराधिक इतिहास और उनके पास कितनी संपत्ति है इसके जानने का अधिकार एडीआर की याचिका पर सन 2000 में दे दिया था। इसी तरह सर्वोच्च न्यायालय वर्ष 2014 में महिला लिलीथामस की जनहित याचिका पर न पसंद प्रत्याशियों को ईबीएम मशीन मे एक बटन नोटा का लगवाकर चुनाव आयोग के माध्यम से एक बड़ा अधिकार दे दिया था। लेकिन संसद में पिछले 4 सालों में यह कानून जनप्रतिनिधियों ने नही बनाया कि नोटा सेे हारे सभी प्रत्याशी छह वर्षों के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेेंगे। जबकि दूसरी तरफ उप्र के विधायकों ने अपना वेतन और भत्ता तथा पेंशन सर्वसहमति प्रस्ताव से बढ़वा ली है। सांई ज्योति संस्था के प्रमुख अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सांसद को प्रतिवर्ष पांच करोड़ तथा विधायक को चार करोड़ प्रतिवर्ष निधि मिलती है। मतदाताओं को विधानसभा वार जनप्रतिनिधियों की सांसद और विधायक निधियों के लिए निगरानी समिति बनानी चाहिए। सहरिया जन अधिकार मंच की सचिव लच्छी सहरिया ने कहा कि जब 35 साल की नौकरी करने के बाद अधिकारी और कर्मचारियों को पेंशन नही मिलेगी तो फिर सांसद और विधायकों की पेंशन भी बंद होना चाहिये। लच्छी सहरिया ने समाज की महिलाओं से अपील की यदि उनका समाज चुनाव में दारू, मुर्गा और साड़ी में बिकता रहा तो फिर हम जनप्रतिनिधियों से अपने समाज की समस्यायें किस मुंह से हल करा पायेंगे। इसी तरह सर्व सहमति से जनप्रतिनिधियों की पेंशन को समाप्त करने, सांसद विधायकों की निधि की निगरानी समित बनाने तथा नोटा से हारने वाले सभी प्रत्याशियों का छह साल चुनाव लडने रोक लगे का प्रस्ताव रखा। जो सर्वसहमति से पास किया गया। इस मौके पर मीरावाई सहरिया, संजू, रमन शर्मा, शंकर शुक्ला, पंकज तिवारी, अजय मिश्रा, रोहित इन्होने भी विचार व्यक्त किये। इस कार्यक्रम का संचालन साई ज्योति संस्था के प्रमुख अजय श्रीवास्तव ने किया।
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