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उकसा रोग लगने से चना, मसूर की फसलें पूरी तरह बर्बाद
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उकसा रोग लगने से चना, मसूर की फसलें हो रही बर्बाद
किसानों ने की फसलों का सर्वे कराने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। नाराहट क्षेत्र के आसपास के गांवों में रबी के मौसम की चना और मसूर की फसलों में उकसा रोग लगने लगा है, जिससे खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। किसानों का कहना है कि चना व मसूर को उकसा रोग ने अपनी चपेट में ले लिया है। जबकि पहले से ही किसान प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलते चले आ रहे हैं। किसान चना, मसूर की फसलों से अच्छी उपज की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अब जैसे ही फसलों में फलफूल आ रहा था। वैैसे ही उकसा नामक रोग ने फसलों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे खेतों में खड़ी फसल सूखने लगीं हैं। सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं होने की वजह से किसानों ने ट्यूबवेल से दो सौ रुपये प्रति घंटे के हिसाब से खेतों की सिंचाई कार्रवाई थी। किसानों की मानें तो यह रोग चना मसूर में लगता है और यह फलते फूलते समय पर लगता है, जिससे फसलें सूख जाती हैं एवं फलियों में दाना काला और छोटा पड़ जाता है, जिस कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उकसा रोग मिटाने के लिए कई प्रकार की कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया गया था, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला। अब किसानों को कोई उपाय समझ नहीं आ रहा, जिससे उनके चेहरों पर मायूसी छाने लगी। उन्हें लग रहा था कि वर्षों से चला आ रहा कर्ज इस बार चुकता हो जाएगा। इसीलिए चना मसूर की ज्यादा खेती की थी, लेकिन अब फसलों को उकसा रोग ने चपेट ले लिया। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बनती जा रही हैं। इस तरह नाराहट, डोंगरा खुर्द, दिगवार, तरावली, बरेजा, पटना, पारोल, गुरयाना, चांदोरा, गुढ़ा खिरिया आदि में देखा जा सकता है कि यह रोग चना मसूर के लिए काफी नुकसान दायक है। इसमें पौधे फूलते-फलते सूखने लगते हैं और किसानों ने फसलों का सर्वे कराने की शासन प्रशासन से मांग की है।
फोटो- 10
फसलों में रोग लगने से लागत निकालना भी मुश्किल
दो एकड़ में चना की बुवाई की थी, लेकिन उकसा रोग लगने से चना सूखता जा रहा है। लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। दो हजार रुपये की कीटनाशक दवाओं का प्रयोग भी किया था, लेकिन दवाओं का कोई फायदा नहीं मिला
- पूरन विश्वकर्मा, किसान, बरेजा।
फसलों की सर्वे होना चाहिए
इस बार किसानों को चना, मसूर की फसलों की अच्छी उपज की उम्मीद थी, लेकिन उकसा रोग लगने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। ऐसे में फसलों में हुए नुकसान का प्रशासन द्वारा सर्वे कराया जाना चाहिए।
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- सैंदपाल सिंह, ङोगरा खुर्द।
फोटो- 09
कर्ज की चिंता सता रही
तीन एकड़ के खेत में चना, मसूर की खेती किए थे, लेकिन रोग लगने से फसलें सूखती जा रही हैं। कर्ज करके बुवाई की थी, लेकिन अब कर्ज कैसे चुकाएं, इसकी चिंता सता रही है।
-गुलाब सिंह लोधी, किसान बरेजा।
फसलों में उकसा रोग लगने के संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को अवगत कराया जाएगा और किसान भी अपनी फसलों के नमूने कृषि विज्ञान केंद्र ले जाकर दिखा सकते हैं, ताकि फसलों में रोग के अनुसार कीटनाशक के छिड़काव की सलाह दी जा सकेगी।
- गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी।
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किसानों ने की फसलों का सर्वे कराने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। नाराहट क्षेत्र के आसपास के गांवों में रबी के मौसम की चना और मसूर की फसलों में उकसा रोग लगने लगा है, जिससे खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं। किसानों का कहना है कि चना व मसूर को उकसा रोग ने अपनी चपेट में ले लिया है। जबकि पहले से ही किसान प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलते चले आ रहे हैं। किसान चना, मसूर की फसलों से अच्छी उपज की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अब जैसे ही फसलों में फलफूल आ रहा था। वैैसे ही उकसा नामक रोग ने फसलों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे खेतों में खड़ी फसल सूखने लगीं हैं। सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं होने की वजह से किसानों ने ट्यूबवेल से दो सौ रुपये प्रति घंटे के हिसाब से खेतों की सिंचाई कार्रवाई थी। किसानों की मानें तो यह रोग चना मसूर में लगता है और यह फलते फूलते समय पर लगता है, जिससे फसलें सूख जाती हैं एवं फलियों में दाना काला और छोटा पड़ जाता है, जिस कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उकसा रोग मिटाने के लिए कई प्रकार की कीटनाशक दवाओं का प्रयोग किया गया था, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला। अब किसानों को कोई उपाय समझ नहीं आ रहा, जिससे उनके चेहरों पर मायूसी छाने लगी। उन्हें लग रहा था कि वर्षों से चला आ रहा कर्ज इस बार चुकता हो जाएगा। इसीलिए चना मसूर की ज्यादा खेती की थी, लेकिन अब फसलों को उकसा रोग ने चपेट ले लिया। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बनती जा रही हैं। इस तरह नाराहट, डोंगरा खुर्द, दिगवार, तरावली, बरेजा, पटना, पारोल, गुरयाना, चांदोरा, गुढ़ा खिरिया आदि में देखा जा सकता है कि यह रोग चना मसूर के लिए काफी नुकसान दायक है। इसमें पौधे फूलते-फलते सूखने लगते हैं और किसानों ने फसलों का सर्वे कराने की शासन प्रशासन से मांग की है।
फोटो- 10
फसलों में रोग लगने से लागत निकालना भी मुश्किल
दो एकड़ में चना की बुवाई की थी, लेकिन उकसा रोग लगने से चना सूखता जा रहा है। लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। दो हजार रुपये की कीटनाशक दवाओं का प्रयोग भी किया था, लेकिन दवाओं का कोई फायदा नहीं मिला
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- पूरन विश्वकर्मा, किसान, बरेजा।
फसलों की सर्वे होना चाहिए
इस बार किसानों को चना, मसूर की फसलों की अच्छी उपज की उम्मीद थी, लेकिन उकसा रोग लगने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। ऐसे में फसलों में हुए नुकसान का प्रशासन द्वारा सर्वे कराया जाना चाहिए।
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- सैंदपाल सिंह, ङोगरा खुर्द।
फोटो- 09
कर्ज की चिंता सता रही
तीन एकड़ के खेत में चना, मसूर की खेती किए थे, लेकिन रोग लगने से फसलें सूखती जा रही हैं। कर्ज करके बुवाई की थी, लेकिन अब कर्ज कैसे चुकाएं, इसकी चिंता सता रही है।
-गुलाब सिंह लोधी, किसान बरेजा।
फसलों में उकसा रोग लगने के संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को अवगत कराया जाएगा और किसान भी अपनी फसलों के नमूने कृषि विज्ञान केंद्र ले जाकर दिखा सकते हैं, ताकि फसलों में रोग के अनुसार कीटनाशक के छिड़काव की सलाह दी जा सकेगी।
- गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी।