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धरना प्रदर्शन तक सीमित रहा कांग्रेस का बंद, सपा ने की ज्ञापन देकर कर ली इतिश्री
Updated Tue, 11 Sep 2018 02:17 AM IST
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धरना प्रदर्शन तक सीमित रहा कांग्रेस का बंद, सपा ने भी दिया ज्ञापन
सभी दलों ने अलग रहकर किया बंद का समर्थन, विपक्ष में दिखी दूरी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। पेट्रोल डीजल की कीमतों में वृद्घि, रुपए में भारी गिरावट एवं बढ़ती महंगाई के विरोध में भारत बंद का आह्वान शहर में बेअसर रहा है। कांग्रेस पार्टी का बंद धरना प्रदर्शन तक सीमित रहा। वहीं समाजवादी पार्टी ने बिगड़ती कानूून और बेरोजगारी सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन दिया। अन्य राजनैतिक दल भी ज्ञापन तक सीमित रहे। इस दौरान विपक्षी दलों में बिखराव नजर आया।
कांग्रेस पार्टी द्वारा देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी, बढ़ती महंगाई को लेकर दस सितंबर दिन सोमवार को भारत बंद बुलाया गया था। इसमें अन्य विपक्षी दलों का कांग्रेस को साथ मिला था। इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने भी सोमवार को शहर में आकर प्रेस कांफ्रेंस करके भारत बंद के लिए शहरवासियों से बंद की अपील की थी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जरुरी निर्देश भी दिए थे और हर हाल में बंद को सफल बनाने की रणनीति तैयार की थी। जिसके चलते सोमवार को सुबह करीब दस बजे से ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घंटाघर के मैदान में एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया था और पेट्रोल डीजल की मूल्य वृद्घि पर भाजपा की केंद्र सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में घूम-घूमकर केंद्र सरकार की नीतियों और महंगाई का विरोध करते हुए बाजार बंद कराने का प्रयास किया लेकिन व्यापारियों ने कांग्रेसियों का साथ नहीं दिया। घंटाघर से सावरकर चौक तक कुछ दुकानदारों ने दुकानें किसी आशंका के चलते अपनी दुकानें बंद रखीं तो पुलिस प्रशासन ने यहां बाजार खुलवाकर सुरक्षा का आश्वासन दिया, तो दुकानदारों ने भी दुकानें खोलने में देरी नहीं की। कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान शहर में पुलिस प्रशासन द्वारा शहर में तो रेलवे स्टेशन पर जीआरपी व आरपीएफ ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी, ताकि कहीं कोई ट्रेन रोकने या फिर अन्य प्रकार से कार्य बाधित न हो सके। वैसे तो भारत बंद में कांग्रेस को अन्य सभी विपक्षियों का साथ मिला है, लेकिन शहर में बंद के प्रदर्शन के लिए अधिकांश सक्रिय पार्टियों ने अलग-अलग रहकर अपने तरीके से विरोध जताया। कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कुशवाहा, नगर अध्यक्ष हरीबाबू शर्मा, अजय तोमर, उवेश खान, आसिफ, नवनीत किलेदार, पूरन सिंह पटेल, मोन्टी शुक्ला आदि शामिल रहे।
- समाजवादी पार्टी ने भी राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा। जिसमें बताया गया है कि आरएसएस का एजेंडा जातिवाद एवं सांप्रदायिकता के कारण समाज को तोड़ने वाली उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के शासन में आपातकाल जैसा माहौल पैदा हो गया है। बाबा साहब के संविधान के साथ प्रतिदिन हमले हो रहे हैं। गरीब, कमजोरी, मजदूर, दलित, पिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों के साथ घोर अन्याय व अत्याचार हो रहे हैं। प्रदेश में महिलाओं के साथ दुष्कर्म व हत्याओं की जघन्य घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देकर भी सरकार इन घटनाओं को रोकने में विफल है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया की स्वतंत्र आवाज को भी कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। सपा सरकार के समय जिन बेरोजगारों को नौजवानों को रोजगार मिला था, उनसे वह रोजगार भी छीना जा रहा है। रोजगार की मांग पर लाठी गोली का शिकार होना पड़ रहा है और उन बेकसूरों पर फर्जी मुकदमें लगाकर जेल भेजा जा रहा है। किसानों को उनकी फसल का मूलय मांगने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर भी लाठियां खाना पड़ रही हैं और उन्हें अपमानित किया जा रहा है। समाजवादी पार्ट ने प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था, किसानों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, बच्चियों, छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित कर समस्याओं के निराकरण की मांग की है। ज्ञापन देने के दौरान जिलाध्यक्ष ज्योति सिंह लोधी, राजेश यादव, पूर्व जिपं सदस्य शिशुपाल सिंह यादव, गिरधारी यादव, रोहित, शिवम मिश्रा, गिन्नी राजा, रमेश खटीक, महेंद्र प्रताप सिंह बुंदेला, नेपाल सिंह यादव, रमेश यादव, रामदास श्रोतीय, प्रभुदयाल, फूलसिंह, अजीज कुरैशी, राघवेंद्र भौंड़ेले, अजय सिंह यादव, तिलक सिंह पटेल, प्रिंस यादव, नरेंद्रसिंह राजपूत आदि शामिल रहे।
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-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कौंसिल ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन देकर समान विचारक अन्य विपक्षी राजनैतिक दलों के आह्वान पर पूरे देश में दस सितंबर को भारत बंद का समर्थन किया। ज्ञापन में कहा गया क िकेंद्र सरकार ने न तो भ्रष्टाचार पर रोक लगाई और न ही बेरोजगारी को खत्म किया है और न ही रिश्वतखोरी बंद हो सकी है। बल्कि यह सब पहले से अधिक बढ़ी है, जिसे रोका जाना बहुत आवश्यक है। प्रदेश में अधिकारियोंव कर्मचारियों के द्वारा भ्रष्टाचार खुलेआम चल रहा है, जिसमें लेखपाल के माध्यम से पूरे प्रदेश में भूमाफिया बढ़ रहे हैं एवं गरीबों की जमीन पर अवैध रुप से कब्जा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति भूमाफिया पर निगाह रखकर किसानों की जमीन हड़प करने से बचाया जाए। गरीब किसानों एवं मजदूरों को निशुल्क आवास की व्यवस्था ग्राम व शहरों में की जाए। डीजल पेट्रोल की कीमतें दिनों दिन आसमान छू रही हैं और चार वर्ष से प्रतिदिन पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, जबकि कच्चे तेल के दाम कम हो रहे हैं, फिर भी पूरे देश में डीजल व पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं। डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने से कुटीर उद्योग, मध्यम वर्ग पर काफी प्रभाव पड़ रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रधानमंत्री से डीजल पेट्रोल के दाम कम किए जाकर बेरोजगारों व भुखमरी को रोका जाए और घरेलू गैस के दाम जो वर्तमान में बढ़ाए गए हैं, उसे शीघ्र ही कम किया जाकर लोगों को राहत प्रदान करने की मांग की। ज्ञापन पर भाकपा महामंत्री जमील अहमद, सभासदस्य गोपाल सिंह, कृष्णपाल, किशनलाल, प्यारेलाल, छक्कीलाल, भईयन, नाथूरामसाहू आदि के हस्ताक्षर हैं।
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सभी दलों ने अलग रहकर किया बंद का समर्थन, विपक्ष में दिखी दूरी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। पेट्रोल डीजल की कीमतों में वृद्घि, रुपए में भारी गिरावट एवं बढ़ती महंगाई के विरोध में भारत बंद का आह्वान शहर में बेअसर रहा है। कांग्रेस पार्टी का बंद धरना प्रदर्शन तक सीमित रहा। वहीं समाजवादी पार्टी ने बिगड़ती कानूून और बेरोजगारी सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन दिया। अन्य राजनैतिक दल भी ज्ञापन तक सीमित रहे। इस दौरान विपक्षी दलों में बिखराव नजर आया।
कांग्रेस पार्टी द्वारा देश में पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी, बढ़ती महंगाई को लेकर दस सितंबर दिन सोमवार को भारत बंद बुलाया गया था। इसमें अन्य विपक्षी दलों का कांग्रेस को साथ मिला था। इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने भी सोमवार को शहर में आकर प्रेस कांफ्रेंस करके भारत बंद के लिए शहरवासियों से बंद की अपील की थी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जरुरी निर्देश भी दिए थे और हर हाल में बंद को सफल बनाने की रणनीति तैयार की थी। जिसके चलते सोमवार को सुबह करीब दस बजे से ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घंटाघर के मैदान में एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया था और पेट्रोल डीजल की मूल्य वृद्घि पर भाजपा की केंद्र सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में घूम-घूमकर केंद्र सरकार की नीतियों और महंगाई का विरोध करते हुए बाजार बंद कराने का प्रयास किया लेकिन व्यापारियों ने कांग्रेसियों का साथ नहीं दिया। घंटाघर से सावरकर चौक तक कुछ दुकानदारों ने दुकानें किसी आशंका के चलते अपनी दुकानें बंद रखीं तो पुलिस प्रशासन ने यहां बाजार खुलवाकर सुरक्षा का आश्वासन दिया, तो दुकानदारों ने भी दुकानें खोलने में देरी नहीं की। कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान शहर में पुलिस प्रशासन द्वारा शहर में तो रेलवे स्टेशन पर जीआरपी व आरपीएफ ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी, ताकि कहीं कोई ट्रेन रोकने या फिर अन्य प्रकार से कार्य बाधित न हो सके। वैसे तो भारत बंद में कांग्रेस को अन्य सभी विपक्षियों का साथ मिला है, लेकिन शहर में बंद के प्रदर्शन के लिए अधिकांश सक्रिय पार्टियों ने अलग-अलग रहकर अपने तरीके से विरोध जताया। कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद कुशवाहा, नगर अध्यक्ष हरीबाबू शर्मा, अजय तोमर, उवेश खान, आसिफ, नवनीत किलेदार, पूरन सिंह पटेल, मोन्टी शुक्ला आदि शामिल रहे।
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- समाजवादी पार्टी ने भी राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा। जिसमें बताया गया है कि आरएसएस का एजेंडा जातिवाद एवं सांप्रदायिकता के कारण समाज को तोड़ने वाली उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के शासन में आपातकाल जैसा माहौल पैदा हो गया है। बाबा साहब के संविधान के साथ प्रतिदिन हमले हो रहे हैं। गरीब, कमजोरी, मजदूर, दलित, पिछड़ों एवं अल्पसंख्यकों के साथ घोर अन्याय व अत्याचार हो रहे हैं। प्रदेश में महिलाओं के साथ दुष्कर्म व हत्याओं की जघन्य घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देकर भी सरकार इन घटनाओं को रोकने में विफल है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया की स्वतंत्र आवाज को भी कुचलने का प्रयास किया जा रहा है। सपा सरकार के समय जिन बेरोजगारों को नौजवानों को रोजगार मिला था, उनसे वह रोजगार भी छीना जा रहा है। रोजगार की मांग पर लाठी गोली का शिकार होना पड़ रहा है और उन बेकसूरों पर फर्जी मुकदमें लगाकर जेल भेजा जा रहा है। किसानों को उनकी फसल का मूलय मांगने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर भी लाठियां खाना पड़ रही हैं और उन्हें अपमानित किया जा रहा है। समाजवादी पार्ट ने प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था, किसानों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, बच्चियों, छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित कर समस्याओं के निराकरण की मांग की है। ज्ञापन देने के दौरान जिलाध्यक्ष ज्योति सिंह लोधी, राजेश यादव, पूर्व जिपं सदस्य शिशुपाल सिंह यादव, गिरधारी यादव, रोहित, शिवम मिश्रा, गिन्नी राजा, रमेश खटीक, महेंद्र प्रताप सिंह बुंदेला, नेपाल सिंह यादव, रमेश यादव, रामदास श्रोतीय, प्रभुदयाल, फूलसिंह, अजीज कुरैशी, राघवेंद्र भौंड़ेले, अजय सिंह यादव, तिलक सिंह पटेल, प्रिंस यादव, नरेंद्रसिंह राजपूत आदि शामिल रहे।
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-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कौंसिल ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन देकर समान विचारक अन्य विपक्षी राजनैतिक दलों के आह्वान पर पूरे देश में दस सितंबर को भारत बंद का समर्थन किया। ज्ञापन में कहा गया क िकेंद्र सरकार ने न तो भ्रष्टाचार पर रोक लगाई और न ही बेरोजगारी को खत्म किया है और न ही रिश्वतखोरी बंद हो सकी है। बल्कि यह सब पहले से अधिक बढ़ी है, जिसे रोका जाना बहुत आवश्यक है। प्रदेश में अधिकारियोंव कर्मचारियों के द्वारा भ्रष्टाचार खुलेआम चल रहा है, जिसमें लेखपाल के माध्यम से पूरे प्रदेश में भूमाफिया बढ़ रहे हैं एवं गरीबों की जमीन पर अवैध रुप से कब्जा कर रहे हैं। ऐसी स्थिति भूमाफिया पर निगाह रखकर किसानों की जमीन हड़प करने से बचाया जाए। गरीब किसानों एवं मजदूरों को निशुल्क आवास की व्यवस्था ग्राम व शहरों में की जाए। डीजल पेट्रोल की कीमतें दिनों दिन आसमान छू रही हैं और चार वर्ष से प्रतिदिन पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं, जबकि कच्चे तेल के दाम कम हो रहे हैं, फिर भी पूरे देश में डीजल व पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं। डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने से कुटीर उद्योग, मध्यम वर्ग पर काफी प्रभाव पड़ रहा है। कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रधानमंत्री से डीजल पेट्रोल के दाम कम किए जाकर बेरोजगारों व भुखमरी को रोका जाए और घरेलू गैस के दाम जो वर्तमान में बढ़ाए गए हैं, उसे शीघ्र ही कम किया जाकर लोगों को राहत प्रदान करने की मांग की। ज्ञापन पर भाकपा महामंत्री जमील अहमद, सभासदस्य गोपाल सिंह, कृष्णपाल, किशनलाल, प्यारेलाल, छक्कीलाल, भईयन, नाथूरामसाहू आदि के हस्ताक्षर हैं।