{"_id":"5cf2d6f7bdec22075e077cd2","slug":"155941866018-lalitpur-news123","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहरवासियों को दगा दे रही जलापूर्ति व हैंडपंप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहरवासियों को दगा दे रही जलापूर्ति व हैंडपंप
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहरवासियों को दगा दे रही जलापूर्ति व हैंडपंप
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जल संस्थान की जलापूर्ति और हैंडपंप शहरवासियों को दगा दे रहे हैं। शनिवार को विभागीय कर्मियों ने पाइप लाइन फटने के डर से सुबह एक घंटे पहले पानी की सप्लाई खोल दी। इससे तमाम लोगों को जलापूर्ति होने का पता ही नहीं चला और वे सोते रह गए। जब नींद खुली तो पाइप लाइन सूख चुकी थी। वहीं, कई जगहों पर हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। ऐसे में लोगों को पेयजल समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
जल संस्थान ने शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में 26 परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेवारी ले रखी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम ऊमरी, उदया व बरौदाबिजलौन योजनाएं बंद चल रही है। शहर की भी हालत ठीक नहीं है। यहां की जलापूर्ति आए दिन लोगों को दगा दे जाती है। आमतौर पर सुबह छह बजे से जलापूर्ति खोली जाती है, लेकिन शनिवार को अजीब सी स्थिति बन गई। सुबह पांच बजे टंकी में पानी पहुंच रहा था, उसी दौरान पाइप लाइन में पानी का अधिक दबाव बनने लगा। विभागीय कर्मियों को लगा कि पानी नहीं निकाला गया तो कभी भी पाइप लाइन फट सकती है। इस पर विभागीय कर्मियों ने सुबह छह बजे का इंतजार किए बिना एक घंटे पहले जलापूर्ति शुरू कर दी। इस दौरान लोग बेफिक्र होकर सो रहे थे। जब सुबह छह बजे जलापूर्ति की बारी आई तो नलों में पानी की जगह हवा निकल रही थी। जो लोग सुबह पांच बजे जाग गए थे, उनमें से किसी ने बताया कि आज एक घंटे पहले ही नल आ गए थे।
इस तरह कई लोग मन मसोस कर रह गए। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पाइप लाइन के लीकेज अब भी बने हुए हैं, जो सही नहीं हो पाए हैं। इनमें से एक लीकेज तुवन मंदिर के पास, राइफल क्लब के पास, गिरजाघर के पास, कचहरी चौराहे के पास लीकेज से रोज पानी यूं ही बर्बाद होता रहता है। इससे कई मोहल्लों में पेयजल की समस्या बनी हुई है।
विज्ञापन
उधर, हैंडपंपों की स्थिति ठीक नहीं है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो नगर पालिका परिषद के अंतर्गत 1586 हैंडपंप लगे हैं, इनमें से 24 हैंडपंप रीबोर की स्थिति में पहुंच गए हैं। नगर पंचायत तालबेहट में 3, नगर पंचायत महरौनी में 5 और नगर पंचायत पाली में 2 हैंडपंप रीबोर योग्य हैं। इसके अतिरिक्त कंट्रोल रूम में पंद्रह हैंडपंप खराब होने की सूचना है, जिसे जल संस्थान ने अभी तक सुधारा नहीं है। 20 मई से इन्हें सुधारने की बारी में दर्शाया जा रहा है। कई हैंडपंप तो ऐसे सुधारे जा रहे हैं, जिनकी जल संस्थान पुष्टि कर रहा है लेकिन शिकायतकर्ता सुधरने से इंकार कर रहे हैं। ऐसे कई मामले में कंट्रोल रूम में पहुंच रहे हैं।
डीपीआरओ ने बनाई दूरी
विकास भवन में रोज शाम चार बजे जल संस्थान, जल निगम और नगर पालिका के अधिकारियों को बैठक में पहुंचने के निर्देश हैं। लेकिन, बैठक में न तो जिला पंचायत राज अधिकारी और न ही कोई कर्मचारी पहुंच रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों का निस्तारण समय से नहीं हो पा रहा है।
पाइप लाइन में पानी का प्रेशर अधिक बन गया था, जिससे एक घंटे पहले आपूर्ति शुरू करनी पड़ी। उस दौरान तमाम लोगों को आपूर्ति आरंभ होने की सूचना भी दी गई।
- रामभुवन, अवर अभियंता, जल संस्थान
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जल संस्थान की जलापूर्ति और हैंडपंप शहरवासियों को दगा दे रहे हैं। शनिवार को विभागीय कर्मियों ने पाइप लाइन फटने के डर से सुबह एक घंटे पहले पानी की सप्लाई खोल दी। इससे तमाम लोगों को जलापूर्ति होने का पता ही नहीं चला और वे सोते रह गए। जब नींद खुली तो पाइप लाइन सूख चुकी थी। वहीं, कई जगहों पर हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। ऐसे में लोगों को पेयजल समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है।
जल संस्थान ने शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में 26 परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेवारी ले रखी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम ऊमरी, उदया व बरौदाबिजलौन योजनाएं बंद चल रही है। शहर की भी हालत ठीक नहीं है। यहां की जलापूर्ति आए दिन लोगों को दगा दे जाती है। आमतौर पर सुबह छह बजे से जलापूर्ति खोली जाती है, लेकिन शनिवार को अजीब सी स्थिति बन गई। सुबह पांच बजे टंकी में पानी पहुंच रहा था, उसी दौरान पाइप लाइन में पानी का अधिक दबाव बनने लगा। विभागीय कर्मियों को लगा कि पानी नहीं निकाला गया तो कभी भी पाइप लाइन फट सकती है। इस पर विभागीय कर्मियों ने सुबह छह बजे का इंतजार किए बिना एक घंटे पहले जलापूर्ति शुरू कर दी। इस दौरान लोग बेफिक्र होकर सो रहे थे। जब सुबह छह बजे जलापूर्ति की बारी आई तो नलों में पानी की जगह हवा निकल रही थी। जो लोग सुबह पांच बजे जाग गए थे, उनमें से किसी ने बताया कि आज एक घंटे पहले ही नल आ गए थे।
विज्ञापन
इस तरह कई लोग मन मसोस कर रह गए। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पाइप लाइन के लीकेज अब भी बने हुए हैं, जो सही नहीं हो पाए हैं। इनमें से एक लीकेज तुवन मंदिर के पास, राइफल क्लब के पास, गिरजाघर के पास, कचहरी चौराहे के पास लीकेज से रोज पानी यूं ही बर्बाद होता रहता है। इससे कई मोहल्लों में पेयजल की समस्या बनी हुई है।
विज्ञापन
उधर, हैंडपंपों की स्थिति ठीक नहीं है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो नगर पालिका परिषद के अंतर्गत 1586 हैंडपंप लगे हैं, इनमें से 24 हैंडपंप रीबोर की स्थिति में पहुंच गए हैं। नगर पंचायत तालबेहट में 3, नगर पंचायत महरौनी में 5 और नगर पंचायत पाली में 2 हैंडपंप रीबोर योग्य हैं। इसके अतिरिक्त कंट्रोल रूम में पंद्रह हैंडपंप खराब होने की सूचना है, जिसे जल संस्थान ने अभी तक सुधारा नहीं है। 20 मई से इन्हें सुधारने की बारी में दर्शाया जा रहा है। कई हैंडपंप तो ऐसे सुधारे जा रहे हैं, जिनकी जल संस्थान पुष्टि कर रहा है लेकिन शिकायतकर्ता सुधरने से इंकार कर रहे हैं। ऐसे कई मामले में कंट्रोल रूम में पहुंच रहे हैं।
डीपीआरओ ने बनाई दूरी
विकास भवन में रोज शाम चार बजे जल संस्थान, जल निगम और नगर पालिका के अधिकारियों को बैठक में पहुंचने के निर्देश हैं। लेकिन, बैठक में न तो जिला पंचायत राज अधिकारी और न ही कोई कर्मचारी पहुंच रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की शिकायतों का निस्तारण समय से नहीं हो पा रहा है।
पाइप लाइन में पानी का प्रेशर अधिक बन गया था, जिससे एक घंटे पहले आपूर्ति शुरू करनी पड़ी। उस दौरान तमाम लोगों को आपूर्ति आरंभ होने की सूचना भी दी गई।
- रामभुवन, अवर अभियंता, जल संस्थान