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प्राथमिक शिक्षा ही बालकों के भविष्य की नींव
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प्राथमिक शिक्षा ही बालकों के भविष्य की नींव
ललितपुर। पहलवान गुरुदीन ग्रुप ऑफ कालेज के सभागार में शिक्षक की समाज में भूमिका और कॅरियर की संभावनाएं विषय पर संगोष्ठी में अलका यादव ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा ही बालकों के भविष्य की नींव होती है। शिक्षा को संस्कृतियुक्त और समाजोपयोगी बनाने के लिए शिक्षकों को बाल मनोपयोगी प्रशिक्षण प्राप्त करके, उन्हें बालकों को प्रेरित करने में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए एनसीटीई ने शिक्षा नीति के अंतर्गत प्राइमरी स्तर के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने हेतु (बीटीसी) डीएलएड पाठ्यक्रम को संचालित कर रहा है। डीएलएड के विशेष प्रशिक्षण से प्रशिक्षित शिक्षक बालकों के अनुकूल शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। किसी भी पाठ्यक्रम से स्नातक पूर्ण करने के बाद दो वर्षीय ‘डिप्लोमा इन इलीमेंट्री एजुकेशन‘ का कोर्स करके शिक्षक बन सकते है। डीएलएड कोर्स करने के बाद शिक्षा के सरकारी/गैर सरकारी क्षेत्र में कॅरियर की अपार संभावनाएं हैं। यूपी टीईटी और सीटीईटी उत्तीर्ण करके केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय में कैरियर बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षा का विकास, सभ्यता के विकास के साथ हुआ। शिक्षा के विकास के साथ शिक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई। उत्तरोत्तर शिक्षा के विकास और तकनीकियों ने शिक्षक की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। शिक्षकों के संबंध में महर्षि अरविंद ने कहा था कि शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते है और अपने श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में निर्मित करते हैं।
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प्राचार्य डॉ. महेश कुमार झा ने आभार प्रकट किया। साथ ही बताया कि पहलवान कालेज में वर्ष 2014 से इस क्षेत्र में प्रशिक्षण की सुविधा है। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक सौरभ यादव, डॉ. पूजा यादव, महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सूफिया, डॉ. वंदना याज्ञिक, प्रीति शुक्ला, दीपिका जैन, आकांक्षा दुबे, रजनी यादव, पूजा झा, संध्या राजपूत, दिव्या मेहरा मौजूद रहीं। संचालन प्रो. रमेश चंद्र पटेल ने किया।
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ललितपुर। पहलवान गुरुदीन ग्रुप ऑफ कालेज के सभागार में शिक्षक की समाज में भूमिका और कॅरियर की संभावनाएं विषय पर संगोष्ठी में अलका यादव ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा ही बालकों के भविष्य की नींव होती है। शिक्षा को संस्कृतियुक्त और समाजोपयोगी बनाने के लिए शिक्षकों को बाल मनोपयोगी प्रशिक्षण प्राप्त करके, उन्हें बालकों को प्रेरित करने में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए एनसीटीई ने शिक्षा नीति के अंतर्गत प्राइमरी स्तर के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने हेतु (बीटीसी) डीएलएड पाठ्यक्रम को संचालित कर रहा है। डीएलएड के विशेष प्रशिक्षण से प्रशिक्षित शिक्षक बालकों के अनुकूल शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। किसी भी पाठ्यक्रम से स्नातक पूर्ण करने के बाद दो वर्षीय ‘डिप्लोमा इन इलीमेंट्री एजुकेशन‘ का कोर्स करके शिक्षक बन सकते है। डीएलएड कोर्स करने के बाद शिक्षा के सरकारी/गैर सरकारी क्षेत्र में कॅरियर की अपार संभावनाएं हैं। यूपी टीईटी और सीटीईटी उत्तीर्ण करके केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय में कैरियर बना सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि समाज में शिक्षा का विकास, सभ्यता के विकास के साथ हुआ। शिक्षा के विकास के साथ शिक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई। उत्तरोत्तर शिक्षा के विकास और तकनीकियों ने शिक्षक की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। शिक्षकों के संबंध में महर्षि अरविंद ने कहा था कि शिक्षक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते है और अपने श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में निर्मित करते हैं।
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प्राचार्य डॉ. महेश कुमार झा ने आभार प्रकट किया। साथ ही बताया कि पहलवान कालेज में वर्ष 2014 से इस क्षेत्र में प्रशिक्षण की सुविधा है। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक सौरभ यादव, डॉ. पूजा यादव, महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सूफिया, डॉ. वंदना याज्ञिक, प्रीति शुक्ला, दीपिका जैन, आकांक्षा दुबे, रजनी यादव, पूजा झा, संध्या राजपूत, दिव्या मेहरा मौजूद रहीं। संचालन प्रो. रमेश चंद्र पटेल ने किया।