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विद्युत बिलों के संशोधन में मिला करोड़ों का अंतर

Jhansi Bureau Updated Sat, 03 Jun 2017 07:43 PM IST
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बिजली बिलों में मिला करोड़ों का अंतर
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जनपद में आए दिन बिजली के बिलों में गड़बड़ी की शिकायतें उपभोक्ताओं द्वारा की जाती रही हैं। विभाग द्वारा अक्सर उपभोक्ताओं की गलती बताकर मामले से पल्ला झाड़ लिया जाता है। लेकिन, इस बार एमनेस्टी योजना के तहत पंजीकरण कराने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिल संशोधन का विकल्प भी रखा गया, जिसके चलते उपभोक्ताओं द्वारा यह कॉलम भरने के बाद बिलों का संशोधन कराया गया। बिल संशोधन में डेढ़ माह के बकाए के बिलों में करीब चार करोड़ रुपये से अधिक का अंतर पाया गया है।
बिजली के बिलों में गड़बड़ी होती है साहब, बिल सुधरवा दो। रीडिंग अधिक आ रही बाबूजी, पिछली बार से इस बार बिल बहुत ज्यादा आ रहा है। कुछ राहत दिला दो, अब की बार से पूरा बिल भरेंगे। यह शब्द आए दिन बिजली विभाग में सुनने को मिलते है। कई बार रीडिंग के मामले में बिल काफी अधिक आता है, जो उपभोक्ताओं के होश उड़ा देते हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर हर माह सैकड़ों बिलों के संशोधन किए जाते हैं। इसके बाद भी जनपद में बिलों की गड़बड़ी में कमी नहीं हो सकी है। ऐसे में बिल संशोधन के बिना जिला में करोड़ों रुपये का भुगतान उपभोक्ताओं द्वारा जमा नही किया गया है। लेकिन इस बार शासन द्वारा एमनेस्टी योजना में जहां बिजली के बिलों में उपभोक्ताओं को सरचार्ज में शत-प्रतिशत छूट दी गई है। वहीं, एमनेस्टी में पंजीकरण फार्म में बिलों में संशोधन यानि वर्तमान बिल से सहमति या असहमति का विकल्प दिया गया है। बिलों से सहमति नहीं दर्शाने पर बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के प्रार्थना पत्र पर बिलों में संशोधन किया जा रहा है। एमनेस्टी में जहां संशोधन के पूर्व उपभोक्ताओं पर 14 करोड़ 26 लाख 69 हजार रुपये का बकाया दर्शाया जा रहा था, जो संशोधन होने के बाद 10 करोड़ 24 लाख 58 हजार रुपये बकाया बचा है। यह स्थिति पूरे जनपद की है। वहीं यदि शहरी क्षेत्र की बात करें तो संशोधन के पहले जो बकाया राशि पांच करोड़ 43 लाख 19 हजार दर्शायी जा रही थी, वह अब संशोधन के बाद तीन करोड़ 82 लाख 48 हजार रुपये शेष रह गई है। यही हाल ग्रामीण क्षेत्र के बिजली के बिलों का भी है। ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत संशोधन के पूर्व बिलों की बकाया राशि आठ करोड़ 67 लाख 69 हजार थी। जो अब संशोधन के बाद 6 करोड़ 29 लाख 70 हजार शेष रह गई है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि जब उपभोक्ताओं द्वारा विभाग के कर्मचारियों पर बढ़े हुए बिजली बिल भेजने की शिकायत की जाती है। तो विभागीय अधिकारी उस समय उनकी बातों पर विश्वास क्यों नहीं करते है।

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