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चारित्रिक पतन से समाज में पनप रही विकृतियां : डा. राजेन्द्र दास

Sat, 21 Jul 2018 01:56 AM IST
Updated Sat, 21 Jul 2018 01:56 AM IST
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चारित्रिक पतन से समाज में पनप रही विकृतियां : डा. राजेन्द्र दास
चारित्रिक पतन से समाज में पनप रही विकृतियां : डा. राजेंद्र दास
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ललितपुर। श्रीनृसिंह मंदिर परिसर में जगदगुरू द्वाराचार्य मलूक पीठाधीश्वर महाराज डा. राजेंद्र दास देवाचार्य ने कहा कि आज समाज में लज्जाजनक कृत्य हो रहे हैं, यह भारत जैसे राष्ट्र के लिए अत्यंत शर्मनाक हैं। उनका निदान दंड से संभव नहीं है बल्कि उस पर रोक के लिएभारतीय सनातन की परंपराओं एवं आश्रम पद्धति व्यवस्था को अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि ब्राह्मणत्व के नष्ट होने से संपूर्ण वर्ण व्यवस्था छिन्न, भिन्न हो गई है, जिसका परिणाम है कि समाज में विकृतियां दिखाई पड़ने लगी हैं। ठीक उसी प्रकार आश्रम व्यवस्था में ब्रह्मचर आश्रम के बिगड़ने से बाकी तीन आश्रमों का पतन हो गया है। सनातन परंपरा में संतों का सर्वाधिक ध्यान श्रेष्ठ ब्रह्मचर्य आश्रम के पालन पर रहा है। प्रारंभ से 25 वर्ष की आयु को ब्रह्मचर्य आश्रम बताया गया है। इस आयु में योग, ध्यान, अध्ययन, पठन, पाठन संयमित जीवन की साधना कराई जाती है। इन्हीं श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त श्रेष्ठ ब्रह्मचर्य बाकी के आश्रमों को श्रेष्ठ बना देता है। ब्रह्मचर्य आश्रम को बिगाड़ने का षड्यंत्र लार्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा लागू कर की थी। अपने काल में बालपन से ही सह शिक्षा की व्यवस्था से आज के बालक किशोर अवस्था में ही साथ-साथ पढ़ते रहने से वह अपने मूल उद्देश्यों से भटक कर दिशा हीन हो रहे हैं। बालिकाओं की शिक्षा अनिवार्य है, लेकिन वह केवल कन्या विद्यालयों में ही होना चाहिए, साथ ही बच्चों में श्रेष्ठ संस्कार देने की महती जिम्मेदारी उनकी माताओं की है। माताओं को अपने बालक-बालिकाओं को इन अमर्यादित टीवी, धारावाहिकों एवं संस्कार क्षीण करने वाले साधनों से दूर रख अपनी संतानों में भारतीय सनातन परंपराओं के सद्ग्रंथो एवं विदुषी माताओं का चरित्र सुनाकर उन्हें श्रेष्ठ भारतीय परंपरा अनुसार नागरिक बनाने की होनी चाहिए। जब ब्रह्मचर्य सुधर जाएगा तो श्रेष्ठ आश्रम स्वत: ही सुधर जाएंगे। समाज में घट रही घटनाओं का निदान इस विकृत मानसिकता को परिवर्तित कर ही किया जा सकता है। दण्ड से समस्या का निदान नहीं है। आज के सत्र में विभिन्न स्थानों के पूज्य संतों के साथ सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, अजय तिवारी नीलू, प्रभात दीक्षित, प्रदीप चौबे, नपाध्यक्ष रजनी साहू, रामेश्वर सड़ैया, उमाशंकर विदुआ, भगवत नारायण अग्रवाल, जुगल किशोर रावत, भगवत वाजपेई, कमलापत रिछारिया, सुनील चौबे, संजय डयोडिया, सीताराम सोनी, चंद्रेश साहू, भवानी सिंह यादव, रावराजा, धर्मेन्द्र रावत, सरदार वीके, सोनू पाठक, प्रेस क्लब अध्यक्ष राजीव बबेले, अनूप मोदी, दुर्गा प्रसाद पाठक, मानू शर्मा, नीरज शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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