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अब नेमवि में भी स्थापित हुआ 25 किलोवाट का ग्रिड टाई रुफ सोलर सिस्टम
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नेहरू कॉलेज में लगा रुफ सोलर सिस्टम
ललितपुर। जनपद में सौर ऊर्जा का महत्व लोगों को अब समझ में आने लगा है। इसके प्रति जागरूक होकर धीरे-धीरे इसके प्रयोग के प्रति रुझान बढ़ना शुरू हो गया है। जनपद के नेहरु महाविद्यालय में 25 किलोवाट का ग्रिड टाई रुफ सोलर सिस्टम लगवाकर बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। ऐसे में जहां महाविद्यालय को सौर ऊर्जा से सीधे बिजली मिल रही है, वहीं,उपयोग से अधिक बिजली उत्पादन होने पर उसे विद्युत विभाग को सीधे ग्रिड में भेजकर लाभ भी कमाया जा रहा है। बताया गया कि सौ यूनिट बिजली का उत्पादन कर ग्रिड में भेजने वाला नेहरू महाविद्यालय बुंदेलखंड का पहला संस्थान बन गया है।
केंद्र सरकार द्वारा घर-घर में बिजली पहुंचाने एवं बिजली की खपत रोकने के उद्देश्य से लोगों द्वारा घरों और विभिन्न संस्थानों में सौर ऊर्जा का प्लांट स्थापित कराए जा रहे हैं। नेहरू महाविद्यालय द्वारा भी ग्रिड टाई रूफ सोलर सिस्टम के माध्यम से 100 यूनिट बिजली का उत्पादन कर उसे विद्युत विभाग को दिया जा रहा है, जिससे महाविद्यालय में निर्बाध बिजली आपूर्ति होने के साथ ही विद्युत विभाग को बिजली देकर जनपद के अधिक से अधिक घरों में बिजली प्रदान करने का प्रयास किया गया है। नेमवि प्रबंधक प्रदीप चौबे ने कहा कि भाजपा की केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा अधिक से अधिक घरों तक बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए बिजली विभाग के साथ ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रूफ टॉप सोलर प्लांट लगाये जा रहे हैं। इस प्लांट को लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 30 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा प्रति किलोवाट की दर 15 से 30 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि नेहरू महाविद्यालय में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रबंध समिति के पदाधिकारियों एवं महाविद्यालय प्रशासन के सहयोग से गुजरात, हरियाणा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाली कंपनी ग्रीन फर्स्ट वैंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों से संपर्क किया गया। कंपनी के अधिकारियों को महाविद्यालय में बुलाकर उनसे परिचर्चा कर निरीक्षण कराया गया। इसके बाद महाविद्यालय की छत पर 25 किलोवाट का सौर ऊर्जा का प्लांट स्थापित गया, जिससे 100 यूनिट प्रतिदिन बिजली का उत्पादन हो रहा है। नेमवि प्राचार्य डा. अवधेश अग्रवाल ने बताया कि महाविद्यालय में 25 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट से विद्युत ऊर्जा का खुद उपयोग कर बिजली की खपत होने के बाद शेष बची हुई बिजली को ग्रिड में ट्रांसफर किया जाएगा, जिससे विद्युत विभाग को बिजली देने पर महाविद्यालय पर बिजली का बिल कम होगा। विद्युत विभाग द्वारा ली जा रही विद्युत का भुगतान कम करने के बाद बाकी बिजली का बिल महाविद्यालय को प्रेषित करेगा, जिससे महाविद्यालय को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि उक्त प्लांट पर 25 वर्ष तक की गारंटी है एवं समय पर प्लांट के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा निरीक्षण कर मेंटेनेंस किया जाएगा। नेमवि प्रबंध समिति अध्यक्ष प्रभात दीक्षित ने कहा कि जनपद का प्रतिष्ठित नेहरू महाविद्यालय संपूर्ण बुंदेलखंड में 100 यूनिट का विद्युत उत्पादन करने वाला प्रथम महाविद्यालय है। इससे उत्पन्न हो रही विद्युत से अनेक घरों को रोशनी प्रदान की जा सकेगी, जिससे छात्र/छात्राएं एवं उनके अभिभावक लाभान्वित होंगे और जनपद पर विद्युत उत्पादन का लोड भी कम होगा। इसके लिए उन्होंने प्रबंध समिति, महाविद्यालय परिवार, छात्र-छात्राएं, अभिभावकों एवं नगरवासियों को हार्दिक बधाई दी है। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि नेहरू महाविद्यालय सन 1968 में सुस्थापित महाविद्यालय है। महाविद्यालय में शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्र/छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के सहयोग से लगातार प्रगति कर रहा है। विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में भी नेहरु महाविद्यालय में उत्तरोत्तर प्रगति की एवं भविष्य में जनमानस के विकास हेतु कार्य करता रहेगा।
कोई भी लगवा सकेगा छतों पर प्लांट
विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता शैलेंद्र कटियार जानकारी देते हुए बताया कि महाविद्यालय में सोलर पावर प्लांट लगाने के बाद विद्युत विभाग द्वारा नैट मीटर लगाया गया है। इस मीटर में जो बिजली उपभोग की जा रही है और जो बिजली ग्रिड को दी जा रही उसकी रीडिंग अलग-अलग दर्शायी जाती है। जिसके हिसाब से बिजली विभाग उतनी राशि का बिल माइनस करके बिजली का बिल महाविद्यालय को प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उक्त सोलर प्लांट कोई भी महाविद्यालय, संस्था, व्यक्ति अपने भवनों या कार्यालयों की छतों पर लगवा सकता है और बिजली उत्पादन एवं बचत करने में सहयोग कर सकते हैं। केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा इस पर अनुदान भी मिलता है।
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ललितपुर। जनपद में सौर ऊर्जा का महत्व लोगों को अब समझ में आने लगा है। इसके प्रति जागरूक होकर धीरे-धीरे इसके प्रयोग के प्रति रुझान बढ़ना शुरू हो गया है। जनपद के नेहरु महाविद्यालय में 25 किलोवाट का ग्रिड टाई रुफ सोलर सिस्टम लगवाकर बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। ऐसे में जहां महाविद्यालय को सौर ऊर्जा से सीधे बिजली मिल रही है, वहीं,उपयोग से अधिक बिजली उत्पादन होने पर उसे विद्युत विभाग को सीधे ग्रिड में भेजकर लाभ भी कमाया जा रहा है। बताया गया कि सौ यूनिट बिजली का उत्पादन कर ग्रिड में भेजने वाला नेहरू महाविद्यालय बुंदेलखंड का पहला संस्थान बन गया है।
केंद्र सरकार द्वारा घर-घर में बिजली पहुंचाने एवं बिजली की खपत रोकने के उद्देश्य से लोगों द्वारा घरों और विभिन्न संस्थानों में सौर ऊर्जा का प्लांट स्थापित कराए जा रहे हैं। नेहरू महाविद्यालय द्वारा भी ग्रिड टाई रूफ सोलर सिस्टम के माध्यम से 100 यूनिट बिजली का उत्पादन कर उसे विद्युत विभाग को दिया जा रहा है, जिससे महाविद्यालय में निर्बाध बिजली आपूर्ति होने के साथ ही विद्युत विभाग को बिजली देकर जनपद के अधिक से अधिक घरों में बिजली प्रदान करने का प्रयास किया गया है। नेमवि प्रबंधक प्रदीप चौबे ने कहा कि भाजपा की केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा अधिक से अधिक घरों तक बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए बिजली विभाग के साथ ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रूफ टॉप सोलर प्लांट लगाये जा रहे हैं। इस प्लांट को लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 30 प्रतिशत एवं राज्य सरकार द्वारा प्रति किलोवाट की दर 15 से 30 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि नेहरू महाविद्यालय में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रबंध समिति के पदाधिकारियों एवं महाविद्यालय प्रशासन के सहयोग से गुजरात, हरियाणा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने वाली कंपनी ग्रीन फर्स्ट वैंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों से संपर्क किया गया। कंपनी के अधिकारियों को महाविद्यालय में बुलाकर उनसे परिचर्चा कर निरीक्षण कराया गया। इसके बाद महाविद्यालय की छत पर 25 किलोवाट का सौर ऊर्जा का प्लांट स्थापित गया, जिससे 100 यूनिट प्रतिदिन बिजली का उत्पादन हो रहा है। नेमवि प्राचार्य डा. अवधेश अग्रवाल ने बताया कि महाविद्यालय में 25 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट से विद्युत ऊर्जा का खुद उपयोग कर बिजली की खपत होने के बाद शेष बची हुई बिजली को ग्रिड में ट्रांसफर किया जाएगा, जिससे विद्युत विभाग को बिजली देने पर महाविद्यालय पर बिजली का बिल कम होगा। विद्युत विभाग द्वारा ली जा रही विद्युत का भुगतान कम करने के बाद बाकी बिजली का बिल महाविद्यालय को प्रेषित करेगा, जिससे महाविद्यालय को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि उक्त प्लांट पर 25 वर्ष तक की गारंटी है एवं समय पर प्लांट के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा निरीक्षण कर मेंटेनेंस किया जाएगा। नेमवि प्रबंध समिति अध्यक्ष प्रभात दीक्षित ने कहा कि जनपद का प्रतिष्ठित नेहरू महाविद्यालय संपूर्ण बुंदेलखंड में 100 यूनिट का विद्युत उत्पादन करने वाला प्रथम महाविद्यालय है। इससे उत्पन्न हो रही विद्युत से अनेक घरों को रोशनी प्रदान की जा सकेगी, जिससे छात्र/छात्राएं एवं उनके अभिभावक लाभान्वित होंगे और जनपद पर विद्युत उत्पादन का लोड भी कम होगा। इसके लिए उन्होंने प्रबंध समिति, महाविद्यालय परिवार, छात्र-छात्राएं, अभिभावकों एवं नगरवासियों को हार्दिक बधाई दी है। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि नेहरू महाविद्यालय सन 1968 में सुस्थापित महाविद्यालय है। महाविद्यालय में शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्र/छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के सहयोग से लगातार प्रगति कर रहा है। विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में भी नेहरु महाविद्यालय में उत्तरोत्तर प्रगति की एवं भविष्य में जनमानस के विकास हेतु कार्य करता रहेगा।
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कोई भी लगवा सकेगा छतों पर प्लांट
विद्युत विभाग के अधिशाषी अभियंता शैलेंद्र कटियार जानकारी देते हुए बताया कि महाविद्यालय में सोलर पावर प्लांट लगाने के बाद विद्युत विभाग द्वारा नैट मीटर लगाया गया है। इस मीटर में जो बिजली उपभोग की जा रही है और जो बिजली ग्रिड को दी जा रही उसकी रीडिंग अलग-अलग दर्शायी जाती है। जिसके हिसाब से बिजली विभाग उतनी राशि का बिल माइनस करके बिजली का बिल महाविद्यालय को प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उक्त सोलर प्लांट कोई भी महाविद्यालय, संस्था, व्यक्ति अपने भवनों या कार्यालयों की छतों पर लगवा सकता है और बिजली उत्पादन एवं बचत करने में सहयोग कर सकते हैं। केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा इस पर अनुदान भी मिलता है।
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