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शहर के तीनों छात्रावासों ने नहीं है नल कनेक्शन
Updated Tue, 07 Aug 2018 03:32 AM IST
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शहर के तीनों छात्रावासों ने नहीं है नल कनेक्शन
राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास के मरम्मत कार्यों के लिए भेजा 22.33 लाख का प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गांव से शहर में आकर पढ़ने वाले दलित परिवार के बच्चों के लिए जिला मुख्यालय पर दो बालिका और एक बालक छात्रावास बना हुआ है। तीनों छात्रावासों का संचालन समाज कल्याण विभाग से किया जाता है। इन तीनों छात्रावासों में से किसी में भी पेयजल के लिए नल की सुविधा नहीं है। जलापूर्ति पूरी तरह से बोर पर निर्भर है, जो गर्मियों में समस्या बन जाती है।
जिला मुख्यालय पर केवल तीन ही सरकारी छात्रावास बने हुए हैं। यह तीनों छात्रावास समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित करते हैं। इनमें प्रवेश के लिए डीएम की अध्यक्षता में गठित द्वारा छात्र-छात्राओं का चयन किया जाता है। बालिकाओं के लिए दो छात्रावास बने हुए हैं, एक छात्रावास राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के परिसर में है, जिसका नाम राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास है। इस छात्रावास में कुल 48 छात्राओं के रहने की क्षमता है, वर्तमान में केवल 08 छात्राएं निवास कर रहीं है तो पिछले वर्ष की हैं। इस छात्रावास की दीवारों से शौचालय का पानी बहता है और कुछ जगहों से फर्श भी उखड़ने लगा है। इसके अलावा भवन की बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई का भी अभाव है। छात्रावास में तैनात वार्डेन वंदना पाल बताती हैं कि छात्रावास के मरम्मत कार्य व रंगाई-पुताई के लिए विभाग द्वारा करीब 22.33 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार कराकर वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। पेयजल के लिए यहां पर केवल एक बोर हैं, नल कनेक्शन की कोई व्यवस्था नहीं है। दूसरा बालिका छात्रावास वर्णी जैन चौराहे पर डीपीआरओ कार्यालय के पास बना हुआ है, जिसका नाम बाबू जगजीवन छात्रावास है। इस छात्रावास में भी कुल 48 बालिकाओं के सापेक्ष वर्तमान में पुरानी आठ छात्राएं रह रहीं है। इस छात्रावास में भी पेयजल के लिए केवल एक बोर है, नल कनेक्शन की कोई सुविधा नहीं है। इसके अलावा छात्रावास के पानी की निकासी के लिए कोई सुविधा नहीं है। इस कारण जलभराव की स्थिति बनी रहती है। वार्डेन अनुपमा गुप्ता ने बताया कि पानी की निकासी के लिए नगर पालिका के पिछले कई महिनों से बार-बार लिखित में शिकायत की जा रही है, लेकिन कोई निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा बालकों का एक छात्रावास है वह भी वर्णी जैन चौराहे के पास ही डेम मार्ग पर संचालित है, इसका नाम डॉ. अंबेडकर छात्रावास है। इसमें कुछ 48 के सापेक्ष 30 छात्रा रह रहे हैं। यहां पर भी पेयजल के लिए नल कनेक्शन नहीं है और रंगाई-पुताई का अभाव है। इसके अलावा महरौनी क्षेत्र के ग्राम गुढ़ा में भी समाज कल्याण विभाग का एक छात्रावास बना हुआ है, हाल ही में इसका पुनर्निर्माण हुआ है। लेकिन अभी इसका संचालन शुरू नहीं हुआ है।
तीन ब्लॉकों के छात्रावास हुए चालू, एक निमार्णधीन
गांव के गरीब परिवार की छात्राओं की सुविधा के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत ब्लॉक स्तर पर बालिका छात्रावासों का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना के तहत जनपद के तीन ब्लॉकों महरौनी, तालबेहट और जखौरा में बालिका छात्रावास का निर्माण पूर्ण हो चुका है और इसी सत्र से इनका संचालन भी शुरू हो गया है। इसके अलावा ब्लॉक बिरधा क्षेत्र का छात्रावास ग्राम कल्यानपुरा में बनाया जा रहा है। यहां का बालिका छात्रावास भी लगभग पूर्ण होने की ओर ही है। संभवता अगले सत्र से इसका संचालन भी शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि इसमें कक्षा 09 से 12वीं तक की छात्राओं के लिए सुविधा है। कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों से कक्षा 08 पास करने वाले छात्राओं को बरीयता दी जाएगी। इसके बाद दलित व गरीब परिवार और फिर अन्य वर्ग की छात्राओं को इसमें प्रवेश की व्यवस्था है।
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कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में नहीं चारदीवारी
जनपद के सभी छह ब्लॉक स्तर पर कक्षा 06 से 08वीं तक बालिकाओं की पढ़ाने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बने इन विद्यालयों का निर्माण हुए करीब एक दशक बीत गया है। बेसिक शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार लगभग इन सभी विद्यालयों में छात्राओं की ठहरने की सभी सुविधा है। केवल विकासखंड बार के कस्बा बानपुर में बने आवासीय विद्यालय की चारदीवारी नहीं है। इसके अलावा विकासखंड मड़ावार के ग्राम गौना में बने कस्तूरबा विद्यालय की छत क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी स्थानीय जिला पंचायत सदस्य की निधि से मरम्मत करा दी गई है।
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राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास के मरम्मत कार्यों के लिए भेजा 22.33 लाख का प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गांव से शहर में आकर पढ़ने वाले दलित परिवार के बच्चों के लिए जिला मुख्यालय पर दो बालिका और एक बालक छात्रावास बना हुआ है। तीनों छात्रावासों का संचालन समाज कल्याण विभाग से किया जाता है। इन तीनों छात्रावासों में से किसी में भी पेयजल के लिए नल की सुविधा नहीं है। जलापूर्ति पूरी तरह से बोर पर निर्भर है, जो गर्मियों में समस्या बन जाती है।
जिला मुख्यालय पर केवल तीन ही सरकारी छात्रावास बने हुए हैं। यह तीनों छात्रावास समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित करते हैं। इनमें प्रवेश के लिए डीएम की अध्यक्षता में गठित द्वारा छात्र-छात्राओं का चयन किया जाता है। बालिकाओं के लिए दो छात्रावास बने हुए हैं, एक छात्रावास राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के परिसर में है, जिसका नाम राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास है। इस छात्रावास में कुल 48 छात्राओं के रहने की क्षमता है, वर्तमान में केवल 08 छात्राएं निवास कर रहीं है तो पिछले वर्ष की हैं। इस छात्रावास की दीवारों से शौचालय का पानी बहता है और कुछ जगहों से फर्श भी उखड़ने लगा है। इसके अलावा भवन की बाहरी दीवारों पर रंगाई-पुताई का भी अभाव है। छात्रावास में तैनात वार्डेन वंदना पाल बताती हैं कि छात्रावास के मरम्मत कार्य व रंगाई-पुताई के लिए विभाग द्वारा करीब 22.33 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार कराकर वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। पेयजल के लिए यहां पर केवल एक बोर हैं, नल कनेक्शन की कोई व्यवस्था नहीं है। दूसरा बालिका छात्रावास वर्णी जैन चौराहे पर डीपीआरओ कार्यालय के पास बना हुआ है, जिसका नाम बाबू जगजीवन छात्रावास है। इस छात्रावास में भी कुल 48 बालिकाओं के सापेक्ष वर्तमान में पुरानी आठ छात्राएं रह रहीं है। इस छात्रावास में भी पेयजल के लिए केवल एक बोर है, नल कनेक्शन की कोई सुविधा नहीं है। इसके अलावा छात्रावास के पानी की निकासी के लिए कोई सुविधा नहीं है। इस कारण जलभराव की स्थिति बनी रहती है। वार्डेन अनुपमा गुप्ता ने बताया कि पानी की निकासी के लिए नगर पालिका के पिछले कई महिनों से बार-बार लिखित में शिकायत की जा रही है, लेकिन कोई निस्तारण नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा बालकों का एक छात्रावास है वह भी वर्णी जैन चौराहे के पास ही डेम मार्ग पर संचालित है, इसका नाम डॉ. अंबेडकर छात्रावास है। इसमें कुछ 48 के सापेक्ष 30 छात्रा रह रहे हैं। यहां पर भी पेयजल के लिए नल कनेक्शन नहीं है और रंगाई-पुताई का अभाव है। इसके अलावा महरौनी क्षेत्र के ग्राम गुढ़ा में भी समाज कल्याण विभाग का एक छात्रावास बना हुआ है, हाल ही में इसका पुनर्निर्माण हुआ है। लेकिन अभी इसका संचालन शुरू नहीं हुआ है।
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तीन ब्लॉकों के छात्रावास हुए चालू, एक निमार्णधीन
गांव के गरीब परिवार की छात्राओं की सुविधा के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत ब्लॉक स्तर पर बालिका छात्रावासों का निर्माण किया जा रहा है। इस योजना के तहत जनपद के तीन ब्लॉकों महरौनी, तालबेहट और जखौरा में बालिका छात्रावास का निर्माण पूर्ण हो चुका है और इसी सत्र से इनका संचालन भी शुरू हो गया है। इसके अलावा ब्लॉक बिरधा क्षेत्र का छात्रावास ग्राम कल्यानपुरा में बनाया जा रहा है। यहां का बालिका छात्रावास भी लगभग पूर्ण होने की ओर ही है। संभवता अगले सत्र से इसका संचालन भी शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि इसमें कक्षा 09 से 12वीं तक की छात्राओं के लिए सुविधा है। कस्तूरबा आवासीय विद्यालयों से कक्षा 08 पास करने वाले छात्राओं को बरीयता दी जाएगी। इसके बाद दलित व गरीब परिवार और फिर अन्य वर्ग की छात्राओं को इसमें प्रवेश की व्यवस्था है।
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कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में नहीं चारदीवारी
जनपद के सभी छह ब्लॉक स्तर पर कक्षा 06 से 08वीं तक बालिकाओं की पढ़ाने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बने इन विद्यालयों का निर्माण हुए करीब एक दशक बीत गया है। बेसिक शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार लगभग इन सभी विद्यालयों में छात्राओं की ठहरने की सभी सुविधा है। केवल विकासखंड बार के कस्बा बानपुर में बने आवासीय विद्यालय की चारदीवारी नहीं है। इसके अलावा विकासखंड मड़ावार के ग्राम गौना में बने कस्तूरबा विद्यालय की छत क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसकी स्थानीय जिला पंचायत सदस्य की निधि से मरम्मत करा दी गई है।