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दो चिकित्सकों के सहारे दो दर्जन होम्योपैथी अस्पताल
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ललितपुर। जनपद में 24 होम्योपैथिक अस्पतालों में केवल दो चिकित्सक तैनात है। 11 अस्पतालों पर ताला जड़ा रहता है। मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन चिकित्सकों की संख्या घट रही है। इससे अस्पतालों में आने वाले मरीजों को इलाज मुहैया नहीं हो पा रहा है।
लोगों में होम्योपैथी चिकित्सा की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है इससे इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन जनपद में शासन द्वारा पर्याप्त स्टाफ व सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने से जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को होम्योपैथिक सेवाएं नसीब नहीं हो पा रही हैं। स्थिति यह है कि जनपद के केवल दो ही स्थाई चिकित्सक तैनात है। इनमें एक चिकित्सक जिला होम्योपैथी अधिकारी के सेवानिवृत्त होने से अस्पताल के साथ ही अधिकारी का चार्ज भी संभाल रहे हैं।
केवल एक ही चिकित्सक द्वारा दो अस्पतालों में उपचार दिया जा रहा है। दो संविदा पर चिकित्सक हैं, जो दो-दो अस्पतालों को तीन- तीन दिन के अंतराल पर खोल कर संचालित कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिला मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल में भी चिकित्सक नियुक्त नहीं है। यहां पर मरीजों का उपचार फार्मासिस्टों के सहारे चल रहा है। जबकि यहां पर दो चिकित्सकों के पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक महिला व एक पुुरुष चिकित्सक का पद है। इस अस्पताल में प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक मरीज उपचार कराने लिए आते हैं, जिन्हें फार्मासिस्ट के सहारे ही उपचार दिया जा रहा है। जब शहर की स्थिति यह है तो ग्रामीण क्षेत्रों में होम्योपैथिक चिकित्सालयों से मिलने वाले इलाज का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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फार्मासिस्ट दे रहे उपचार
जिले में 24 अस्पतालों के सापेक्ष 24 फार्मासिस्टों की आवश्यकता है। लेकिन, जिले में केवल नौ फार्मासिस्ट नियुक्त हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण फार्मासिस्ट ही तीन-तीन दिन अलग-अलग अस्पतालों को संचालित कर रहे हैं। यही फार्मासिस्ट उपचार को आने वाले मरीजों को दवाइयों का वितरण भी कर रहे हैं।
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यहां हैं अस्पताल
जनपद के ग्राम खितवांस, समोगर, महरौनी, साढ़ूमल, भीकमपुर, सोजना, भौड़ी, बंट, बालाबेहट, थनवारा, बुढ़वार, जखौरा, ननौरा, बिजरौठा, तालबेहट, भुचेरा, गेवरा, पूराबिरधा, गदयाना, बुरागांव, भावनी, देवरान व कारीटोरन में होम्योपैथिक अस्पताल हैं, लेकिन इन चिकित्सालयों का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। शासन के मानकों के अनुसार प्रत्येक चिकित्सालय पर एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, वार्डब्वॉय और एक चौकीदार होना चाहिए।
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जनपद में चिकित्सकों व फार्मासिस्टों की भारी कमी है। इससे अस्पताल नियमित संचालित नहीं हो पा रहे हैं। चिकित्सकों की भर्ती हुई है, चिकित्सक मिलने पर नियुक्ति की जाएगी।
- डा. नीरज कुमार चतुर्वेदी, जिला होम्योपैथिक अधिकारी
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लोगों में होम्योपैथी चिकित्सा की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है इससे इन अस्पतालों में मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन जनपद में शासन द्वारा पर्याप्त स्टाफ व सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने से जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को होम्योपैथिक सेवाएं नसीब नहीं हो पा रही हैं। स्थिति यह है कि जनपद के केवल दो ही स्थाई चिकित्सक तैनात है। इनमें एक चिकित्सक जिला होम्योपैथी अधिकारी के सेवानिवृत्त होने से अस्पताल के साथ ही अधिकारी का चार्ज भी संभाल रहे हैं।
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केवल एक ही चिकित्सक द्वारा दो अस्पतालों में उपचार दिया जा रहा है। दो संविदा पर चिकित्सक हैं, जो दो-दो अस्पतालों को तीन- तीन दिन के अंतराल पर खोल कर संचालित कर रहे हैं। खास बात यह है कि जिला मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल में भी चिकित्सक नियुक्त नहीं है। यहां पर मरीजों का उपचार फार्मासिस्टों के सहारे चल रहा है। जबकि यहां पर दो चिकित्सकों के पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक महिला व एक पुुरुष चिकित्सक का पद है। इस अस्पताल में प्रतिदिन एक सैकड़ा से अधिक मरीज उपचार कराने लिए आते हैं, जिन्हें फार्मासिस्ट के सहारे ही उपचार दिया जा रहा है। जब शहर की स्थिति यह है तो ग्रामीण क्षेत्रों में होम्योपैथिक चिकित्सालयों से मिलने वाले इलाज का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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फार्मासिस्ट दे रहे उपचार
जिले में 24 अस्पतालों के सापेक्ष 24 फार्मासिस्टों की आवश्यकता है। लेकिन, जिले में केवल नौ फार्मासिस्ट नियुक्त हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण फार्मासिस्ट ही तीन-तीन दिन अलग-अलग अस्पतालों को संचालित कर रहे हैं। यही फार्मासिस्ट उपचार को आने वाले मरीजों को दवाइयों का वितरण भी कर रहे हैं।
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यहां हैं अस्पताल
जनपद के ग्राम खितवांस, समोगर, महरौनी, साढ़ूमल, भीकमपुर, सोजना, भौड़ी, बंट, बालाबेहट, थनवारा, बुढ़वार, जखौरा, ननौरा, बिजरौठा, तालबेहट, भुचेरा, गेवरा, पूराबिरधा, गदयाना, बुरागांव, भावनी, देवरान व कारीटोरन में होम्योपैथिक अस्पताल हैं, लेकिन इन चिकित्सालयों का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। शासन के मानकों के अनुसार प्रत्येक चिकित्सालय पर एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, वार्डब्वॉय और एक चौकीदार होना चाहिए।
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जनपद में चिकित्सकों व फार्मासिस्टों की भारी कमी है। इससे अस्पताल नियमित संचालित नहीं हो पा रहे हैं। चिकित्सकों की भर्ती हुई है, चिकित्सक मिलने पर नियुक्ति की जाएगी।
- डा. नीरज कुमार चतुर्वेदी, जिला होम्योपैथिक अधिकारी