फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   नालों में बहकर हर रोज बर्बाद हो रहा दो करोड़ लीटर पानी

नालों में बहकर हर रोज बर्बाद हो रहा दो करोड़ लीटर पानी

Sun, 03 Jun 2018 04:27 AM IST
Updated Sun, 03 Jun 2018 04:27 AM IST
विज्ञापन
नालों में बहकर हर रोज बर्बाद हो रहा दो करोड़ लीटर पानी
नालों में बहकर हर रोज बर्बाद हो रहा दो करोड़ लीटर पानी
विज्ञापन

पानी को संचय करने व दोबारा उपयोग लायक बनाने नहीं है ट्रीटमेंट प्लांट की सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
शहर की बढ़ रही आबादी व जरूरतों की वजह से पेयजल समस्या काफी विकराल रूप लेती जा रही है। शहर की पेयजल व्यवस्था व दैनिक कार्यों में उपयोग के लिए के गोविंद सागर बांध से हर रोज लगभग ढाई करोड़ लीटर पानी लिया जा रहा है। दैनिक कार्यों में उपयोग होने वाला हर रोज का करोड़ों लीटर पानी और बरसात के दिनों का पूरा पानी नालियों में बहकर बर्बाद हो जाता है। यदि इस पानी को संचय कर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करवाकर इसको शुद्ध कर लिया जाए तो उसका उपयोग दैनिक कार्यों, वाहनों धुलाई व अन्य कार्यों में किया जा सकता है और आगामी दिनों में होने वाले पानी की विकराल समस्या पर कुछ हद तक काबूू किया जा सकता है।
भूगर्भ जलस्तर गिरता चला जा रही है और आबादी व पानी की जरूरतों का ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है, जबकि जलापूर्ति के संसाधन भी सीमित होकर ही रह गए हैं। हमारे पूरे शहर की जलापूर्ति के लिए गोविंद सागर बांध एक मात्र विकल्प है, इस बांध से दर्जनों गाव की सिंचाई की इसी बांध के भरोसे पर है। सिंचाई के अलावा इस बांध से हर रोज लगभग ढाई करोड़ लीटर पानी शहर की जलापूर्ति के लिए लिया जा रहा है। यहां हमारे नगर पालिका, जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों और एनजीओ को अपनी सक्रीयता दिखाने की आवश्कता है। गौरतलब है कि शहर की पेयजल व दैनिक कार्यों के लिए हर रोज ढाई करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है, इसमें से ज्याद से ज्यादा 50 लाख लीटर पानी का उपयोग ही पीने के लिए होता है, बाकी दो करोड़ लीटर पानी घरों में दैनिक कार्यों, वाहन शोरूम व गैराजों पर वाहन धोने समेत अन्य कार्यों में किया जाता है। शहर की नालियों में बर्बाद होने वाले इस करोड़ों लीटर पानी को और बरसात के पानी को संचय करने के लिए और उस पानी को फिल्टर कर दोबारा दैनिक कार्यों में उपयोग में लाने के लिए शहर में कोई व्यवस्था नहीं है। यदि शहर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर दिया जाता है, तो नालियों में बहकर बर्बाद हो रहे पानी को वाहन धुलने समेत अन्य दैनिक कार्यों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है, जैसा कि बड़े शहरों में किया जाता है।
विज्ञापन


अमृत योजना के तहत नहीं भेजा गया प्रस्ताव
शहरी क्षेत्रों की कायाकल्प करने के लिए वर्ष 2015-16 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई अमृत योजना के तहत सभी प्रदेशों के नगरीय व शहरी क्षेत्रों में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना कराई जा रही है। इस योजना के तहत शासन ने शुरुआत में ही नगर पालिका से भी शहर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना कराने के लिए प्रस्ताव मांगे थे, लेकिन नगर पालिका द्वारा इसके लिए अभी तक कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। शहर में दिन व दिन बढ़ती जा रही पानी की समस्या और लगातार गोविंद सागर बांध की कम होती जा रही भराव की क्षमता से आने वाले दिनों में होने वाली विकराल समस्या को नगर पालिका व जिला प्रशासन गंभीरता से नहीं ले रहा है। वहीं जनप्रतिनिधि भी इस ओर उदासीन बने हुए हैं, यदि अब भी पानी को संचय करने व संसाधन बढ़ाने पर विचार नहीं किया गया है, तो अंजाम आने वाले दिनों में बहुत बुरा हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed