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डेढ़ दशक बीतने के बाद भी नहीं बन सके मतदाता
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15 साल बाद भी नहीं बन सके मतदाता
ललितपुर। आम चुनाव में जहां मतदाताओं को मतदान करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं शहर में गल्ला मंडी के पास स्थित झुग्गी - झोपड़ी के निवासियों को 15 वर्ष से जिले में निवास करने के बाद भी मतदाता बनने का अधिकार नहीं मिल सका है।
चुनाव में शत प्रतिशत मतदान करने के लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन, गल्ला मंडी के पास झुग्गी- झोपड़ी निवासी लोगों को अब तक मतदाता नहीं बनाया जा सका है। यह लोग इमारती पत्थरों से सिलबट्टा बनाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। यहां रोजी रोटी की तलाश में 12 से अधिक परिवार आकर यहीं पर बस गए। लेकिन, मतदाता नहीं बन सके। इतना ही नहीं, शासन की लाभकारी योजनाओं का लाभ भी इन्हें नहीं मिल पाया है। झोपड़ी में रहने वाली कम्मोबाई का कहना है कि जहां पर भी योजनाओं व मतदाता बनने के लिए जाते हैं, वहां आधार कार्ड की मांग की जाती है। लेकिन, आधार कार्ड अब तक जारी नहीं हो पाया है। सड़क किनारे झुग्गियों में रह रहे लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बनाए गए शौचालयों व आवासीय कॉलोनी में भी रहने के लिए आसरा नहीं मिल सका है। मजबूर होकर सड़क किनारे रह रहे हैं। साथ ही खुले में शौच को जाने के लिए मजबूर हैं।
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ललितपुर। आम चुनाव में जहां मतदाताओं को मतदान करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं शहर में गल्ला मंडी के पास स्थित झुग्गी - झोपड़ी के निवासियों को 15 वर्ष से जिले में निवास करने के बाद भी मतदाता बनने का अधिकार नहीं मिल सका है।
चुनाव में शत प्रतिशत मतदान करने के लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन, गल्ला मंडी के पास झुग्गी- झोपड़ी निवासी लोगों को अब तक मतदाता नहीं बनाया जा सका है। यह लोग इमारती पत्थरों से सिलबट्टा बनाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं। यहां रोजी रोटी की तलाश में 12 से अधिक परिवार आकर यहीं पर बस गए। लेकिन, मतदाता नहीं बन सके। इतना ही नहीं, शासन की लाभकारी योजनाओं का लाभ भी इन्हें नहीं मिल पाया है। झोपड़ी में रहने वाली कम्मोबाई का कहना है कि जहां पर भी योजनाओं व मतदाता बनने के लिए जाते हैं, वहां आधार कार्ड की मांग की जाती है। लेकिन, आधार कार्ड अब तक जारी नहीं हो पाया है। सड़क किनारे झुग्गियों में रह रहे लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी, स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बनाए गए शौचालयों व आवासीय कॉलोनी में भी रहने के लिए आसरा नहीं मिल सका है। मजबूर होकर सड़क किनारे रह रहे हैं। साथ ही खुले में शौच को जाने के लिए मजबूर हैं।
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