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सताइस वर्ष में महिला अस्पताल को मिले केवल चार सीएमएस
Updated Mon, 03 Sep 2018 12:55 AM IST
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कर्मचारियों की कमी से जूझता महिला अस्पताल
- सत्ताइस साल में अस्पताल को मिले केवल चार सीएमएस
- वर्तमान में इंचार्ज के सहारे चल रहा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले के इकलौते महिला अस्पताल को सत्ताइस वर्ष में केवल चार सीएमएस ही मिल पाए हैं। वर्तमान में भी अस्पताल इंचार्ज के सहारे संचालित हो रहा है। अन्य कर्मचारियों की भी भारी कमी बनी है। जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं।
ललितपुर क्षेत्र में अच्छे नर्सिंग होम के अभाव में क्षेत्रवासियों को जिला महिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके बाद भी अस्पताल में रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है। सत्ताइस वर्ष में महिला अस्पताल को चार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ही मिले हैं। वर्तमान में भी इंचार्ज अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कमोवेश यही स्थिति स्टाफ की भी है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग छह वर्षों से चिकित्सालय में अधीक्षिका का पद रिक्त बना हुआ है। इसके अलावा सृजित 54 में से 26 पद ही भरे हैं, वहीं 28 पद रिक्त चल रहे हैं। वरिष्ठ परामर्शदाता विशेषज्ञ के सृजित दो पदों के सापेक्ष एक पद भरा हुआ है। वहीं, रेडियोलोजिस्ट, पैथोलोजिस्ट व निश्चेतना विशेषज्ञ के पद रिक्त चल रहे हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के तीन में से दो पद रिक्त है। ईएमओ के चार पदों में से दो पद रिक्त हैं। सिस्टर के पांच पदों में से चार पद रिक्त हैं। उपचारिका के नौ पदों के मुकाबले छह पद रिक्त बने हुए हैं। चीफ फार्मेसिस्ट के दोनों ही पद रिक्त चल रहे हैं। सफाई कर्मचारी के दो पदों में से एक पद रिक्त है। धोबी का इकलौता पद रिक्त है। वहीं, प्रसवोत्तर केंद्र में 10 पदों में से छह भरे हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी का एक पद रिक्त चल रहा है। स्टाफ नर्स के दो पदों में से एक पद रिक्त है। कनिष्ठ सहायक व वार्ड आया का पद रिक्त पड़े हुए हैं। भले की जिला महिला अस्पताल ने कायाकल्प में प्रथम स्थान प्राप्त किया हो। लेकिन अस्पताल में कर्मचारियों व अधिकारियों के कई पद रिक्त है। जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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ये रहे चार सीएमएस
डा. नीलम गौड़ का कार्यकाल दो वर्ष तक, डा. ऊषा वर्थवाल एक वर्ष तक, डा. अनामिका रिछारिया दो वर्ष तक व डा. सुमन आस्थाना का लगभग चार वर्ष तक का कार्यकाल रहा है।
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अस्पताल में कर्मचारियों की कमी के साथ ही अधिकारियों के पद लंबे समय से खाली चल रहे है। जिसको लेकर कई बार शासन को पत्राचार किया गया है।
- डॉ. हरेंद्र सिंह चौहान
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
जिला महिला अस्पताल
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- सत्ताइस साल में अस्पताल को मिले केवल चार सीएमएस
- वर्तमान में इंचार्ज के सहारे चल रहा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिले के इकलौते महिला अस्पताल को सत्ताइस वर्ष में केवल चार सीएमएस ही मिल पाए हैं। वर्तमान में भी अस्पताल इंचार्ज के सहारे संचालित हो रहा है। अन्य कर्मचारियों की भी भारी कमी बनी है। जिससे अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं।
ललितपुर क्षेत्र में अच्छे नर्सिंग होम के अभाव में क्षेत्रवासियों को जिला महिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके बाद भी अस्पताल में रिक्त पदों को नहीं भरा जा रहा है। सत्ताइस वर्ष में महिला अस्पताल को चार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ही मिले हैं। वर्तमान में भी इंचार्ज अस्पताल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कमोवेश यही स्थिति स्टाफ की भी है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो लगभग छह वर्षों से चिकित्सालय में अधीक्षिका का पद रिक्त बना हुआ है। इसके अलावा सृजित 54 में से 26 पद ही भरे हैं, वहीं 28 पद रिक्त चल रहे हैं। वरिष्ठ परामर्शदाता विशेषज्ञ के सृजित दो पदों के सापेक्ष एक पद भरा हुआ है। वहीं, रेडियोलोजिस्ट, पैथोलोजिस्ट व निश्चेतना विशेषज्ञ के पद रिक्त चल रहे हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ के तीन में से दो पद रिक्त है। ईएमओ के चार पदों में से दो पद रिक्त हैं। सिस्टर के पांच पदों में से चार पद रिक्त हैं। उपचारिका के नौ पदों के मुकाबले छह पद रिक्त बने हुए हैं। चीफ फार्मेसिस्ट के दोनों ही पद रिक्त चल रहे हैं। सफाई कर्मचारी के दो पदों में से एक पद रिक्त है। धोबी का इकलौता पद रिक्त है। वहीं, प्रसवोत्तर केंद्र में 10 पदों में से छह भरे हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी का एक पद रिक्त चल रहा है। स्टाफ नर्स के दो पदों में से एक पद रिक्त है। कनिष्ठ सहायक व वार्ड आया का पद रिक्त पड़े हुए हैं। भले की जिला महिला अस्पताल ने कायाकल्प में प्रथम स्थान प्राप्त किया हो। लेकिन अस्पताल में कर्मचारियों व अधिकारियों के कई पद रिक्त है। जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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ये रहे चार सीएमएस
डा. नीलम गौड़ का कार्यकाल दो वर्ष तक, डा. ऊषा वर्थवाल एक वर्ष तक, डा. अनामिका रिछारिया दो वर्ष तक व डा. सुमन आस्थाना का लगभग चार वर्ष तक का कार्यकाल रहा है।
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अस्पताल में कर्मचारियों की कमी के साथ ही अधिकारियों के पद लंबे समय से खाली चल रहे है। जिसको लेकर कई बार शासन को पत्राचार किया गया है।
- डॉ. हरेंद्र सिंह चौहान
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
जिला महिला अस्पताल