विश्व डाक दिवस: गोला के महेश पटवारी ने बनाया अनूठा संग्रह, कई देशों के डाक टिकटों को सहेजा
गोला के महेश पटवारी ने डाक टिकटों का अनूठा संग्रह बनाया है। उनके पास देश-विदेश के हजारों टिकट हैं।
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तकनीक और आधुनिकता के चलते चिट्ठी-पत्रियों का चलन अब भले ही नहीं रहा, लेकिन अब भी ऐसे लोग हैं, जो संचार के पुराने माध्यम डाक से जुड़ी चीजें सहेजकर रखे हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं गोला के महेश पटवारी, जिनके पास देश-विदेश के बड़ी संख्या में डाक टिकटों का अनूठा संग्रह है।
डाक सेवाओं के सुनहरे अतीत से लेकर इसके वर्तमान तक के सफर की उपलब्धियों को संजोने के लिए हर वर्ष नौ अक्तूबर को देश में विश्व डाक दिवस मनाया जाता है। विश्व डाक दिवस को लेकर गोला गोकर्णनाथ के सामाजिक कार्यकर्ता महेश कुमार पटवारी की चर्चा इसलिए कि उन्होंने भारतीय ही नहीं बल्कि विश्व के अन्य कई देशों के नए-पुराने डाक टिकटों को सहेज कर रखा है।
गोला के मोहल्ला कुम्हरन टोला निवासी महेश ने बताया कि 1970 के दशक में देश-विदेश से आने वाले पत्रों में लगे डाक टिकट खेल-खेल में एकत्र करते हुए यह कब शौक में बदल गया पता ही नहीं चला। इसके बाद तो वह झारखंड, बिहार, कोलकाता आदि रिश्तेदारी में जाने पर वहां भी हर समय डाक टिकट ही तलाशते रहते थे। डाक टिकटों के संग्रह के कारण वह लखनऊ के प्रमुख डाकघर जीपीओ में फिलेटली क्लब के भी सदस्य बन चुके हैं।
कई देशों के हैं डाक टिकट
महेश पटवारी बताते हैं कि उनके पास मनामा स्टेट के तीन टिकट ऐसे हैं जो जरा सा हिलाने पर अपना रंग बदलते हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, एंटीगुआ, पाकिस्तान, अमेरिका, बुल्गारिया, बर्मा, श्रीलंका, वियतनाम, दुबई, फ्रांस, अल्जीरिया, जर्मनी, नीदरलैंड, इंडोनेशिया, ईरान, इटली, केन्या, मलेशिया, स्पेन, जॉर्डन, साउथ अफ्रीका, मंगोलिया, मैक्सिको, नेपाल आदि देशों के भी तमाम डाक टिकट मौजूद हैं।
महेश पटवारी के पास डाक टिकट संग्रह में महात्मा गांधी की दांडी यात्रा, भरतनाट्यम, नेहरू गांधी वार्ता, पहला विश्व कृषि मेला, विश्व टेबल टेनिस, आर्य समाज, तात्या टोपे, टीपू सुल्तान, रानी लक्ष्मीबाई, बाल गंगाधर तिलक, आचार्य विनोबा भावे, बेगम हजरत महल, एनी बेसेंट, होमी जागीर भाभा, तुलसीदास, कबीर, मीरा, डॉ. अब्दुल कलाम आजाद समेत तमाम महापुरुषों- स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के, वैज्ञानिकों के डाक टिकट संग्रहीत हैं।