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दुधवा में दोपहर बाद खत्म हो गई हड़ताल
पलियाकलां
Updated Thu, 17 Dec 2015 10:30 PM IST
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डीएम किंजल सिंह और दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक पीपी सिंह के बीच चल रही जंग पर गुरुवार को फेडरेशन पदाधिकारियों और तीन तहसीलों के एसडीएम के बीच लिखे गए समझौता पत्र के साथ फिलहाल वीराम लग गया। समझौता पत्र में जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी की तरफ से आश्वस्त किया गया है कि प्रशासन की तरफ से वन विभाग के किसी भी कर्मचारी का किसी भी प्रकार से उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। समझौता पत्र पर एसडीएम पलिया, गोला और मोहम्मदी तथा फेडरेशन ऑफ फारेस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि फेडरेशन पदाधिकारियों ने कहा है कि शासन ने अपर प्रमुख वन संरक्षक को जांच सौंप दी है, जिससे ये हड़ताल खत्म की जा रही है। इसके बाद दोपहर में पर्यटन द्वार के ताले खोल दिए गए।
बुधवार से डीएम के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन के तहत बंद पर्यटन द्वार को वन विभाग के विभिन्न संगठनों के प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारियों से वार्ता के बाद खोल दिया गया, लेकिन एक भी सैलानी यहां नहीं दिखाई दिया, जिससे पर्यटन परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। उधर प्रदेश और जिला स्तरीय पदाकारियों ने दुधवा मुख्यालय पर डीडी पीपी सिंह से गुप्त वार्ता की और उनके साथ कर्मियों ने धरनास्थल पर पहुंच कर उन्हें संबोधित किया। पदाधिकारियों ने कहा कि शासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इस प्रकरण की जांच अपर प्रमुख वन संरक्षक दिवाकर कुमार को सौंप दी है। इस पर फैसला किया गया कि जांच होने तक आंदोलन को स्थगित कर दिया जाए। इसके बाद इस पर अमल शुरू कर दिया गया। उधर डीडी कार्यालय में डीडी के साथ प्रदेश से आए फेडरेशन ऑफ फारेस्ट संघ के प्रांतीय संरक्षक उमेश तिवारी, प्रांतीय महामंत्री शैलेेंद्र प्रताप सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष रामप्रसाद और जिले से आए संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की, जिसमें एसडीएम पलिया पीके सिंह, एसडीएम मोहम्मदी नागेंद्र कुमार, एसडीएम गोला वीके गुप्ता मौजूद रहे और यहां एक लिखित करार हुआ कि दुधवा के कर्मियों का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।
तो वन कर्मचारियों का हो रहा था उत्पीड़न!
वन कर्मचारियों का किसी भी प्रकार का उत्पीड़न न करने की बाबत लिखे गए समझौता से प्रशासन खुद कटघरे में खड़ा हो गया है। जिले के पलिया, गोला और मोहम्मदी के एसडीएम ने इस पर डीएम की ओर से हस्ताक्षर किए है। इससे यह बात साफ हो रही है कि वन कर्मचारियों का प्रशासन कहीं न कहीं उत्पीड़न कर रहा था।
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बुधवार से डीएम के खिलाफ शुरू किए गए आंदोलन के तहत बंद पर्यटन द्वार को वन विभाग के विभिन्न संगठनों के प्रदेश और जिला स्तरीय पदाधिकारियों से वार्ता के बाद खोल दिया गया, लेकिन एक भी सैलानी यहां नहीं दिखाई दिया, जिससे पर्यटन परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। उधर प्रदेश और जिला स्तरीय पदाकारियों ने दुधवा मुख्यालय पर डीडी पीपी सिंह से गुप्त वार्ता की और उनके साथ कर्मियों ने धरनास्थल पर पहुंच कर उन्हें संबोधित किया। पदाधिकारियों ने कहा कि शासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इस प्रकरण की जांच अपर प्रमुख वन संरक्षक दिवाकर कुमार को सौंप दी है। इस पर फैसला किया गया कि जांच होने तक आंदोलन को स्थगित कर दिया जाए। इसके बाद इस पर अमल शुरू कर दिया गया। उधर डीडी कार्यालय में डीडी के साथ प्रदेश से आए फेडरेशन ऑफ फारेस्ट संघ के प्रांतीय संरक्षक उमेश तिवारी, प्रांतीय महामंत्री शैलेेंद्र प्रताप सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष रामप्रसाद और जिले से आए संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक बैठक भी की, जिसमें एसडीएम पलिया पीके सिंह, एसडीएम मोहम्मदी नागेंद्र कुमार, एसडीएम गोला वीके गुप्ता मौजूद रहे और यहां एक लिखित करार हुआ कि दुधवा के कर्मियों का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।
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तो वन कर्मचारियों का हो रहा था उत्पीड़न!
वन कर्मचारियों का किसी भी प्रकार का उत्पीड़न न करने की बाबत लिखे गए समझौता से प्रशासन खुद कटघरे में खड़ा हो गया है। जिले के पलिया, गोला और मोहम्मदी के एसडीएम ने इस पर डीएम की ओर से हस्ताक्षर किए है। इससे यह बात साफ हो रही है कि वन कर्मचारियों का प्रशासन कहीं न कहीं उत्पीड़न कर रहा था।
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