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Lakhimpur Kheri News: रक्तदान की मुहिम में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे कमजोर
Thu, 01 Oct 2026 11:53 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 01 Oct 2026 11:53 PM IST
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लखीमपुर खीरी। जिले में रक्तदान को लेकर लगातार जागरूकता अभियान और शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन स्वैच्छिक रक्तदान में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में बेहद कम है।
एक जनवरी से 25 सितंबर तक जिले में 11 रक्तदान शिविर लगाए गए। इनमें 364 यूनिट रक्तदान हुआ। इसमें महिलाओं की भागीदारी महज दो से तीन प्रतिशत रही। पुरुष रक्तदान में आगे रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता बढ़ने से महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है।
एक जनवरी से 25 सितंबर तक संत निरंकारी भवन, अडानी फाउंडेशन, भारत विकास परिषद, एसएसबी, रोटरी क्लब, योग रंजन, जीएनआरएफ संपूर्णानगर, अग्रवाल नवयुवक संघ, पॉलीटेक्निक और बीजेपी युवा मोर्चा की ओर से 11 रक्तदान शिविर लगाए गए। इनमें कुल 364 यूनिट रक्तदान हुआ।
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बी और ओ पॉजीटिव की ज्यादा मांग
ब्लड बैंक में बी पॉजीटिव और ओ पॉजीटिव रक्त समूह की मांग सबसे अधिक रहती है। इनकी जरूरत को देखते हुए नियमित रक्तदान शिविर लगाने के साथ लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है। बृहस्पतिवार को वाईडी कॉलेज में लगे शिविर में शिक्षिका मेघा जैन और पुलिस लाइन में महिला आरक्षी क्षमा शर्मा ने रक्तदान किया। दोनों ने संदेश दिया कि रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती और महिलाओं को भी इससे नुकसान नहीं होता। जरूरत पड़ने पर महिलाएं सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं।
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जिला अस्पताल में मौजूद ब्लड का स्टॉक
ए पॉजिटिव :: 58
बी पॉजिटिव :: 128
एबी पॉजिटिव :: 11
ओ पॉजिटिव :: 109
ए निगेटिव :: 05
बी निगेटिव :: 00
एबी निगेटिव :: 00
ओ निगेटिव :: 03
(नोट : यह आंकड़ा जिला अस्पताल से लिया गया है, जो 29 सितंबर तक का है।)
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महिलाओं में अभी जागरूकता की कमी है। हालांकि शिविर लगाकर महिलाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि वे भी रक्तदान कर अपनी अहम भूमिका निभाएं।
-डॉ. एसके मिश्रा, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल
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एक जनवरी से 25 सितंबर तक जिले में 11 रक्तदान शिविर लगाए गए। इनमें 364 यूनिट रक्तदान हुआ। इसमें महिलाओं की भागीदारी महज दो से तीन प्रतिशत रही। पुरुष रक्तदान में आगे रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता बढ़ने से महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ सकती है।
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एक जनवरी से 25 सितंबर तक संत निरंकारी भवन, अडानी फाउंडेशन, भारत विकास परिषद, एसएसबी, रोटरी क्लब, योग रंजन, जीएनआरएफ संपूर्णानगर, अग्रवाल नवयुवक संघ, पॉलीटेक्निक और बीजेपी युवा मोर्चा की ओर से 11 रक्तदान शिविर लगाए गए। इनमें कुल 364 यूनिट रक्तदान हुआ।
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बी और ओ पॉजीटिव की ज्यादा मांग
ब्लड बैंक में बी पॉजीटिव और ओ पॉजीटिव रक्त समूह की मांग सबसे अधिक रहती है। इनकी जरूरत को देखते हुए नियमित रक्तदान शिविर लगाने के साथ लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है। बृहस्पतिवार को वाईडी कॉलेज में लगे शिविर में शिक्षिका मेघा जैन और पुलिस लाइन में महिला आरक्षी क्षमा शर्मा ने रक्तदान किया। दोनों ने संदेश दिया कि रक्तदान से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती और महिलाओं को भी इससे नुकसान नहीं होता। जरूरत पड़ने पर महिलाएं सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं।
जिला अस्पताल में मौजूद ब्लड का स्टॉक
ए पॉजिटिव :: 58
बी पॉजिटिव :: 128
एबी पॉजिटिव :: 11
ओ पॉजिटिव :: 109
ए निगेटिव :: 05
बी निगेटिव :: 00
एबी निगेटिव :: 00
ओ निगेटिव :: 03
(नोट : यह आंकड़ा जिला अस्पताल से लिया गया है, जो 29 सितंबर तक का है।)
महिलाओं में अभी जागरूकता की कमी है। हालांकि शिविर लगाकर महिलाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि वे भी रक्तदान कर अपनी अहम भूमिका निभाएं।
-डॉ. एसके मिश्रा, वरिष्ठ चिकित्सक, जिला अस्पताल