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Lakhimpur Kheri News: भड़की महिलाएं, प्रभारी मंत्री को घेरने की कोशिश
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समूह की महिलाओं से बात करतीं डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल। संवाद
- फोटो : :सैफई में चाचा राजपाल यादव को श्रद्धांजलि देते सपा के साष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव प्रो.रामगोपाल यादव व जिप.अध्यक्ष अंशुल यादव।
लखीमपुर खीरी। कलक्ट्रेट सभागार में बृहस्पतिवार को प्रभारी मंत्री नितिन अग्रवाल जिला योजना की बैठक ले रहे थे। तभी बड़ी संख्या में समूह की महिलाएं कलक्ट्रेट पहुंचीं और बकाया भुगतान, बीएमएम की मनमानी सहित कई समस्याओं को लेकर हंगामा करने लगीं। महिलाओं ने प्रभारी मंत्री को घेरने की कोशिश की। हंगामा देख डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल बैठक छोड़कर बाहर आईं और समूह की महिलाओं को 15 तारीख तक भुगतान मिलने का आश्वासन दिया।
डीएम के आश्वासन पर महिलाएं शांत तो जरूर हो गई, लेकिन जाते-जाते चेतावनी दे गईं कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 10 दिन बाद वह फिर से अफसरों को घेराव करेंगी। डीएम से चर्चा के बाद डीसी एनआरएलएम जितेंद्र मिश्रा ने समूह की एक-एक महिला से बात करके उनकी समस्याओं को नोट किया और जल्द ही निस्तारण की बात कही।
निघासन ब्लाॅक से आई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि बीएमएम पांच सालों से तैनात हैं, जो मनमानी से काम करते हैं। बिना सुविधा शुल्क लिए वह कोई काम नहीं करते हैं। महिलाओं ने कहा कि समूह सखी का प्रतिमाह एक हजार रुपये मानदेय है, जो कई वर्षों से नहीं मिला।
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बैंक सखियों का चार हजार रुपये मानदेय देने की बात कही गई थी, लेकिन अब नहीं दिया जा रहा है। जिले में 118 एफएलसीआरपी यानी वित्तीय साक्षरता कैडर तैनात हैं। पैसे बचाने के लिए प्रशिक्षण देने के लिए उनको एक दिन में 266 रुपये दिए जाने हैं, लेकिन लंबे समय से भुगतान अटका है।
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पैसा लेकर बनाई बैंक सखी
निघासन के सिंगहा खुर्द निवासी अमीषा देवी ने बताया कि बैंक सखी के लिए पेपर दिया था, लेकिन बीएमएम ने एक दूसरी महिला से पैसा लेकर उसका चयन कर दिया था। उसका फेल होना दिखा दिया। विरोध किया तो बीएमएम ने धमकी दी। पीड़िता ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।
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बिना पैसा कैसे करें काम
समूह की महिलाओं ने बताया कि प्रदेश सरकार महिलाओं को रोजगार देने के लिए काफी प्रयास कर रही हैं, लेकिन जिलास्तर पर उनकी अनदेखी की रही है। विभाग उनसे लगातार काम ले रहा, लेकिन भुगतान नहीं दे रहा। आखिर बिना मानदेय वह कब तक काम करेंगे। चार पैसे के लिए वह इस क्षेत्र में आई और उनको पैसा ही न मिले, तो इस काम का क्या मतलब है।
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डीएम के आश्वासन पर महिलाएं शांत तो जरूर हो गई, लेकिन जाते-जाते चेतावनी दे गईं कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 10 दिन बाद वह फिर से अफसरों को घेराव करेंगी। डीएम से चर्चा के बाद डीसी एनआरएलएम जितेंद्र मिश्रा ने समूह की एक-एक महिला से बात करके उनकी समस्याओं को नोट किया और जल्द ही निस्तारण की बात कही।
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निघासन ब्लाॅक से आई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि बीएमएम पांच सालों से तैनात हैं, जो मनमानी से काम करते हैं। बिना सुविधा शुल्क लिए वह कोई काम नहीं करते हैं। महिलाओं ने कहा कि समूह सखी का प्रतिमाह एक हजार रुपये मानदेय है, जो कई वर्षों से नहीं मिला।
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बैंक सखियों का चार हजार रुपये मानदेय देने की बात कही गई थी, लेकिन अब नहीं दिया जा रहा है। जिले में 118 एफएलसीआरपी यानी वित्तीय साक्षरता कैडर तैनात हैं। पैसे बचाने के लिए प्रशिक्षण देने के लिए उनको एक दिन में 266 रुपये दिए जाने हैं, लेकिन लंबे समय से भुगतान अटका है।
पैसा लेकर बनाई बैंक सखी
निघासन के सिंगहा खुर्द निवासी अमीषा देवी ने बताया कि बैंक सखी के लिए पेपर दिया था, लेकिन बीएमएम ने एक दूसरी महिला से पैसा लेकर उसका चयन कर दिया था। उसका फेल होना दिखा दिया। विरोध किया तो बीएमएम ने धमकी दी। पीड़िता ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की।
बिना पैसा कैसे करें काम
समूह की महिलाओं ने बताया कि प्रदेश सरकार महिलाओं को रोजगार देने के लिए काफी प्रयास कर रही हैं, लेकिन जिलास्तर पर उनकी अनदेखी की रही है। विभाग उनसे लगातार काम ले रहा, लेकिन भुगतान नहीं दे रहा। आखिर बिना मानदेय वह कब तक काम करेंगे। चार पैसे के लिए वह इस क्षेत्र में आई और उनको पैसा ही न मिले, तो इस काम का क्या मतलब है।